विलुप्त क्यों हो रहे हैं पक्षी ?
पक्षी प्रकृति की एक अनमोल देन हैं। उनकी मीठी चहचहाहट, रंग-बिरंगे पंख और खुले आसमान में उड़ान इंसान को प्रकृति से जोड़ती है। पक्षी सिर्फ सुंदरता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। पक्षी बीजों को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने, फूलों के परागन में मदद करने और कीड़े-मकौड़ों की संख्या को नियंत्रण में रखते हुए धरती पर जीवन चक्र को संतुलित रखने में अहम योगदान देते हैं।
आज दुनिया पक्षियों की कई प्रजातियां तेज़ी से कम हो रही हैं और कई तो धरती से हमेशा के लिए विलुप्त हो चुकी हैं। यह सिर्फ प्रकृति के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए भी बड़ी चिंता का विषय है। पक्षियों के विलुप्त होने का सबसे बड़ा कारण जंगलों की लगातार कटाई है। जंगल पक्षियों का प्राकृतिक आवास होते हैं, जहां उन्हें भोजन, घोंसले बनाने के लिए पेड़ और सुरक्षित माहौल मिलता है। लेकिन बढ़ती आबादी, नई कॉलोनियों, सड़कों, फैक्ट्रियों और कृषि हेतु ज़मीन के लिए हर दिन हज़ारों पेड़ काटे जाने से पक्षियों उचित स्थान न मिलने के कारण बहुत-से पक्षी अन्य स्थानों पर जाने के लिए मजबूर हैं, जहां वे जीवित नहीं रहते।
प्रदूषित पर्यावरण भी पक्षियों के विलुप्त होने का एक बड़ा कारण है। उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं और रासायनिक गैसें हवा को दूषित कर रही हैं, जिससे पक्षियों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। नदियों और झीलों में डाला जाता दूषित पानी और कचरा जल-जीवों के लिए खतरा बन रहा है, पानी के प्रदूषण की वजह से मछलियां और जल-जीवों के मरने से पक्षियों को भोजन नहीं मिलता। प्रदूषण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से पक्षियों की संख्या कम कर रहा है। कृषि में कीटनाशकों और रासायनिक खाद का अधिक इस्तेमाल भी पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है क्योंकि जब पक्षी खेतों से दाना चुगते हैं और कीड़े खाते हैं तो ज़हरीले रसायन उनके शरीर में चले जाते हैं जिससे कई पक्षी मर जाते हैं। कुछ की प्रजनन क्षमता कम हो जाने से नए बच्चे पैदा नहीं होते या कमज़ोर पैदा होने से उनकी संख्या कम हो रही है।
जलवायु परिवर्तन भी पक्षियों के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। धरती का तापमान लगातार बढ़ने से मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है। कभी बहुत ज़्यादा गर्मी, कभी बहुत ज़्यादा सर्दी, कभी सूखा तो कभी भारी बारिश होती है। इस कारण पक्षियों के प्रवास, प्रजनन और भोजन प्राप्त करने के तरीके प्रभावित हो रहे हैं। कुछ लोगों का पक्षियों का शिकार करने का शौक भी पक्षियों के खत्म होने की एक वजह है। कई लोग गैर-कानूनी तरीके से दुर्लभ पक्षियों को पकड़कर बेचते हैं, जिससे कई कीमती प्रजातियों की संख्या कम हो रही है। मोबाइल टावरों से निकलने वाली विद्युत चुम्बकीय (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक) तरंगें से कुछ पक्षियों के दिशा-निर्धारण और व्यवहार पर प्रभाव पड़ने की आशंका है, इस पर वैज्ञानिक अनुसंधान जारी है।
बड़ी इमारतें, कांच की दीवारें और बिजली के तार भी पक्षियों के लिए खतरा बनती हैं। कभी बार पक्षी कांच में आसमान का प्रतिबिम्ब देख कर उससे टकरा जाते हैं। बिजली के हाई-वोल्टेज तार से टकरा कर प्रतिदिन कई पक्षी मर जाते हैं। प्लास्टिक प्रदूषण भी पक्षियों के लिए एक गंभीर समस्या बन गया है। कई पक्षी लोगों द्वारा फैंकी गई प्लास्टिक की थैलियों, बोतलें और दूसरे कचरे को भोजन समझ कर खाने और प्लास्टिक की रस्सी या जाल में फंसकर मर जाते हैं। आजकल तेज़ी से बढ़ शहरीकरण के कारण हर जगह पेड़ काटे जा रहे हैं और सीमेंट के जंगल बनाए जा रहे हैं। जंगल की आग, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से भी पक्षियों के घोंसले और अंडे नष्ट हो जाते हैं। ऐसी घटनाओं के कारण भी कई प्रजातियों को भी नुकसान होता है।
पक्षियों की रक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिएं और जंगलों की कटाई रोकनी चाहिए। कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करके पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने की ज़रूरत है। प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना चाहिए और कचरे को सही तरीके से निपटाना चाहिए। घरों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी के बर्तन और दाना रखना चाहिए। लोगों में जागरूकता पैदा करके उन्हें पक्षियों की रक्षा के लिए प्रेरित करना चाहिए।
अंत में यह कहा जा सकता है कि पक्षियों का विलुप्त होना सिर्फ जीव-जंतुओं की समस्या नहीं है, बल्कि धरती के पर्यावरण और इंसानी जीवन के लिए भी बड़ा खतरा है। यदि पक्षियों की संख्या इसी तरह कम होती रही, तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ने के गंभीर नतीजे मनुष्य को भी भुगतने पड़ेंगे। इसलिए सभी लोगों, सरकार, कृषि वैज्ञानिकों और सामाजिक संगठनों को मिलकर पक्षियों की रक्षा के लिए काम करना चाहिए। यदि हम आज प्रकृति और पक्षियों का ध्यान रखेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां भी उनकी मीठी चहचहाहट का आनंद ले पाएंगी और धरती भी हरी-भरी, सुंदर और जीवंत बनी रहेगी।
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