कम होता वजूद
पाकिस्तान की सरकार के पांवों तले से ज़मीन निकलती जा रही है। इसके सबसे बड़े और अहम प्रांत बलोचिस्तान में वर्षों से फैली ब़गावत के सामने सरकार बेबस दिखाई दे रही है। इस प्राकृतिक खज़ानों से भरपूर प्रांत में चीन ने अरबों-खरबों रुपये खर्च करके जो योजनाएं बनाई थीं, वह अधर में ही लटकी पड़ी हैं। नाज़ुक हालात देख कर अब चीन ने भी निर्माण किए जा रहे इन प्रोजैक्टों से अपने हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं। हालात ये हैं कि यहां अन्य प्रांतों से आने वाले लोग डरने लगे हैं। बलोचों द्वारा विशेष रूप से पंजाबियों को अपना निशाना बनाया जा रहा है। बसों और रेलगाड़ियों में से चुन-चुन करबाहर निकालकर उन्हें गोलियां मारी जा रही हैं। यह प्रांत देर या सवेर पाकिस्तान के हाथों से फिसलता दिखाई दे रहा है। इसी प्रकार अ़फगानिस्तान के साथ लगते दूसरे बड़े प्रांत ़खैबर पखतूनख्वा में प्रतिदिन गोलियां और बम चलने का सिलसिला जारी है। एक तरफ सरकार अ़फगान शरणार्थियों को लाखों की संख्या में सीमा पार धकेल रही है।
दूसरी तरफ आतंकवादी संगठन पाकिस्तानी तालिबान ने सरकार के नाक में दम किया हुआ है। इसी मामले को लेकर इसका पड़ोसी देश अ़फगानिस्तान के साथ युद्ध जारी है। अ़फगानिस्तान की तालिबान सरकार से पाकिस्तान सरकार लगातार यह शिकायत कर रही है कि वह पाकिस्तानी तालिबान को शरण और हथियार देकर उसके विरुद्ध हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की छूट दे रही है। पाकिस्तान अपने अस्तित्व को लेकर अब तक कश्मीर का राग अलापता रहा है। उसने कश्मीर के बड़े भाग पर अपना कब्ज़ा किया हुआ है। पाक अधिकृत कश्मीर की पूर्वी सीमा पर पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. ने कई आतंकवादी शिविर और लॉन्च पैड बनाए हुए हैं, जहां से वह लगातार भारत के विरुद्ध अपनी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देता रहता है। इमरान खान की पार्टी पी.टी.आई. ने एक अहम बयान जारी करते हुए कहा है कि सेना के अत्याचारों के कारण अब वह दिन दूर नहीं है, जब पाक अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान के हाथ से निकल जाएगा। पाक अधिकृत कश्मीर को अब एक तरह से सेना की छावनी में बदल दिया गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आस़िफ ने तो यहां तक कह दिया है कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को वह भारत की तरह ही पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं। ये लोग विगत लम्बी अवधि से वहां करवाए जा रहे चुनाव का विरोध कर रहे हैं। इनकी ओर से लगातार महंगाई और बेरोज़गारी के मामलों को लेकर बड़े प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। यह केन्द्र सरकार द्वारा यहां करवाए जा रहे चुनाव को सरकार का एक पाखंड ही मानते हैं और किसी भी स्थिति में ये इन चुनावों को सफल नहीं होने देना चाहते। अब तक फैली गड़बड़ में सैकड़ों ही लोग मारे जा चुके हैं।
विगत दिवस ब़गावत का गढ़ माने जाते रावलकोट से सांझी अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में लाखों की भीड़ मार्च के रूप में राजधानी मुज्ज़फराबाद की ओर जा रही थी, जिन पर सेना ने गोलीबारी करके कम से कम 30 प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी और सैकड़ों ही घायल हो गए। इससे एक बार तो पाकिस्तान पूरी तरह कांप गया है। भारत द्वारा भी इस संबंध में कड़ी प्रतिक्रिया प्रकट की गई है। जम्मू-कश्मीर नैशनल कांफ्रैंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने केन्द्र सरकार को यह कहा है कि वह इस पर चुप न बैठे और अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के समक्ष सेना के अत्याचारों संबंधी आवाज़ उठाए, परन्तु अब इस तरह प्रतीत होने लगा है कि सेना का अत्याचार भी फैल रही इस ब़गावत को रोक पाने में असमर्थ होता जा रहा है। देश भर में बने ऐसे हालात पाकिस्तान के लिए ़खतरे की घंटी हैं। लगातार बिगड़ते हालात के कारण ही आज पाकिस्तान का वजूद ़खतरे में पड़ चुका है। ऐसे घटनाक्रम से लगातार उसका वजूद कम होता भी दिखाई दे रहा है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

