देश के युवा कहां जाएं
पिछले कुछ महीनों से नीट परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले को लेकर देश भर में व्यापक चर्चा और विवाद छिड़ा रहा है। डाक्टरी शिक्षा से संबंधित इस परीक्षा में पास तो कुछ लाख विद्यार्थियों ने ही होना होता है परन्तु इस परीक्षा में देश भर से 20 से 24 लाख तक युवा शामिल होते हैं। सोचने वाली बात यह है कि जो युवा यह परीक्षा पास नहीं करते, उनकी स्थिति किस तरह की होती है? वह एक बार फिर अपनी ज़िन्दगी के अनिश्चित दौर में विचरण करने लगते हैं। कई युवा कई-कई बार भी यह परीक्षा देते हैं।
देश में बेरोज़गारी लगातार बढ़ती जा रही है। करोड़ों ही युवाओं को अपना भविष्य धूमिल होता दिखाई देता है, जो उनके मनों में निराशा और रोष पैदा करता है। बड़ी संख्या में युवाओं द्वारा इस मामले पर देश भर में जगह-जगह पर प्रदर्शन भी किए जाते हैं, जो उनके भीतर पैदा हुए गुस्से और रोष का प्रकटावा करते हैं और कई बार वह प्रदर्शन हिंसक रूप भी धारण कर लेते हैं। सरकारों के समक्ष यह एक बड़ी और गम्भीर चुनौती है, जिसका हल निकाला जाना बेहद कठिन है। देश में बनी यह विस्फोटक स्थिति समाज के लिए प्रत्येक पक्ष से बेहद जन-विरोधी सिद्ध हो सकती है। आगामी समय में उठते इस तूफान की मार सरकार और समाज के लिए सहन करना संभव नहीं होगा। यह भी सही है कि महत्त्वपूर्ण दाखिला परीक्षाओं में पेपर लीक होने के साथ-साथ परीक्षाओं संबंधी स्थान-स्थान पर लगातार कई प्रकार की अनियमितताएं भी समक्ष आती रहती हैं। उन्होंने जहां समाज के भीतर उपजी अनियमितताएं और लालसा का पर्दाफाश किया है, वहीं संबंधित राज्य सरकारें और केन्द्र सरकार के लिए इस घटनाक्रम ने बड़ी नामोशी पैदा की है। मोदी सरकार से पहले भी तत्कालीन सरकारों में ऐसे नकारात्मक घटनाक्रम की चर्चा होती रही है, परन्तु इस समस्या के हल की कोई बात सफल न हो सकी। वर्ष 2024 में ऐसी अनियमितताओं के विरुद्ध कानून ज़रूर बनाया गया था, परन्तु यह ठोस परिणामों की धारणी नहीं बन सका था। इसी क्रम में नीट की परीक्षा में हुई गड़बड़ी को देखा जा सकता है। यह पेपर लीक होने से एक तरह से सभी ओर अफरा-तफरी मच गई थी। विवशता में सरकार को यह परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और पुन: यह बेहद कठिन प्रबन्धों में करवाई गई, जिसके पूरी देख-रेख में बाद में परिणाम भी सामने आ गए थे।
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच जनता पार्टी को जिस तरह का समर्थन मिला, उसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी। विगत दिवस सभी ने इस मामले पर बने हालात देखे हैं, जिन्होंने केन्द्र सरकार को एक बार तो उलझन में डाल दिया था। आखिर मोदी सरकार को विद्यार्थियों की शिक्षा मंत्री के त्याग-पत्र की मांग के समक्ष झुकना पड़ा था। अब परीक्षाओं में होने वाली धांधलियों, विशेष रूप से पेपर लीक होने से रोकने के लिए सख्त सज़ा और भारी ज़र्ुमाने की व्यवस्था वाला संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित कर दिया गया है। इसके बाद इसे राज्यसभा से भी पारित करवाया जाएगा, जिससे तूफान बन कर उठा यह मामला एक बार तो शांत हो जाएगा, परन्तु इसके साथ ही देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को सम्भालने के लिए सरकार को ज़रूर चिंतित होना चाहिए, यह भारत जैसे बेहद बढ़ती जनसंख्या वाले देश को दरपेश एक बड़ी समस्या है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

