शिक्षा प्रबन्ध के लिए ठोस यत्न

आखिर लम्बे समय तक हुए हंगामों और बहसबाज़ी के बाद लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश कर ही दिया गया। मोदी सरकार की ओर से इसी तरह का एक कानून फरवरी 2024 में संसद द्वारा पारित करवाया गया था, उसमें भी परीक्षाओं से पहले पेपरों को लेकर की जाती घोटालेबाज़ी को रोकने संबंधी कानून बनाया गया था, परन्तु उसके होते भी नीट पेपर में बड़ी गड़बड़ सामने आई। जहां तक पेपर लीक होने का संबंध है, यह घटनाक्रम विगत लम्बी अवधि से चलता आ रहा है। अलग-अलग समय में केन्द्र सरकारों ने इस पर नियंत्रण करने के यत्न भी किए परन्तु यह नकारात्मक घटनाक्रम नहीं रुक सका।
उस समय जिन मामलों की अधिक चर्चा हुई थी, उनमें वर्ष 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा, वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश बी.एड. दाखिला परीक्षा, वर्ष 2011 में अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा और इसी वर्ष पश्चिम बंगाल में संयुक्त दाखिला परीक्षा के पेपर लीक हुए थे और वर्ष 2012 में भी ए.एस. नई दिल्ली दाखिला परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक हुए थे। उस समय भी इन परीक्षाओं संबंधी सख्त कानून बनाने की बातें उठती रही थीं परन्तु कोई भी ठोस परिणाम नहीं निकल सके थे। वर्ष 2017 में मोदी सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का गठन किया था और वर्ष 2024 में इस संबंध में कानून भी बनाया गया था परन्तु यह कानून भी पूरी तरह प्रभावशाली नहीं बन सका था, जिस कारण इस वर्ष हुए नीट पेपरों में बड़ी घोटालेबाज़ी सामने आने के बाद इनको रद्द कर दिया गया था और पुन: पूरे प्रबन्धों के तहत यह परीक्षा करवा कर इसके परिणाम घोषित किए गए थे, परन्तु नीट पेपर लीक होने के कारण लगभग 22 विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली और पुन: हुई नीट परीक्षा में दो लाख विद्यार्थी पहली परीक्षा के दृष्टिगत शायद निराश होकर कम शामिल हुए। इसी कारण विद्यार्थियों में रोष फैल गया, जिसके परिणाम स्वरूप ही कॉकरोच जनता पार्टी ने आन्दोलन शुरू किया। इसके युवा नेताओं ने नेतृत्व करते हुए इसे एक बड़ी लहर के रूप में बदल दिया। इसके प्रभाव के कारण केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को त्याग-पत्र देना पड़ा और बेबस हुई सरकार को संसद में पहले वाले कानून में सख्त सज़ा जोड़ कर इसे संसद में पेश करना पड़ा। सख्त सज़ाओं के साथ-साथ आरोपियों को शीघ्र सज़ा देने के लिए ‘फास्ट ट्रैक’ अदालतें बनाने की घोषणा भी की गई है। इससे पहले ही बहुत-से राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालतें बना भी दी गई हैं। आगामी दिनों में ये सभी राज्यों में बना दी जाएंगी।
इसलिए इस नए कानून को बनाने के लिए जहां बड़ी संख्या में युवाओं ने संघर्ष किया, वहीं कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी लगातार इस मामले पर केन्द्र सरकार को कटघरे में खड़ा करके रखा। आगामी दिनों में जहां इस कानून के अस्तित्व में आने की सम्भावना है, वहीं भविष्य की सरकारों के लिए भी यह एक बड़ा संदेश माना जाएगा। इसके साथ ही देश भर में शिक्षा सुधारों को समय के अनुसार लागू करना भी बहुत ज़रूरी है। राज्य सरकारों से भी यह उम्मीद की जाती है, कि वे भी इस क्षेत्र में भारत सरकार के साथ सम्पर्क बना कर अपने-अपने ढंग-तरीके से शिक्षा क्षेत्र में शुरू किए जा रहे सुधारों के लिए अपना पूरा सहयोग देने के लिए आगे आएं।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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