तपती धरती जलते जंगल : यूरोप में जंगलों की आग से हाहाकार
एक तरफ दुनियां मंगलवार को प्रकृति संरक्षण दिवस मना रही है वहीं दूसरी तरफ प्रकृति प्रदत भयंकर गर्मी और जलवायु बदलाव की अनोखी लीला से उत्पन्न वनाग्नि से लोग परेशान और भयाक्रांत है। दुनिया के कई हिस्सों में भीषण आग से लगने से धरती पर जंगलों का सफाया हो रहा है। पिछले कुछ सालों से गर्मी के कारण कई देशों में जंगलों के एक बड़े हिस्से में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप इस समय जंगलों की आग की चपेट में आ चुका है। फ्रांस और स्पेन के जंगलों में लगी भीषण आग की वजह से अब तक तीन लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं, वहीं ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। फ्रांस की टीमें बोर्डो शहर के आस-पास के इलाकों में आग बुझाने में जुटी हैं, जबकि स्पेन के फायरफाइटर मैड्रिड इलाके में आग को दोबारा भड़कने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। फ्रांस में 98 हजार हेक्टेयर जमीन जलकर राख हो गई, जो एक नया रिकॉर्ड है। यह देश के इतिहास में जंगल की आग का सबसे भयानक संकट है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रोसांचेज ने कहा है कि अब तक एक लाख तीस हजार हेक्टेयर जमीन जल गई है। जंगल में लगी आग को तेज हवाओं ने और ज्यादा भड़का दिया।
प्राकृतिक आपदाएं हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा हैं। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि प्राकृतिक आपदाएं पृथ्वी पर जीवन का एक दुर्भाग्यपूर्ण और विनाशकारी हिस्सा हैं। मानव जीवन पर भूकम्प और आग जैसी प्राकृतिक आपदाएं भारी पड़ रही है। इन दोनों आपदाओं पर लाख प्रयासों के बाद भी काबू नहीं पाया जा सका है। जलवायु परिवर्तन के साथ गर्मी के शुरू होते ही दुनियाभर में जंगलों में आग की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बढ़ते तापमान से आग लगने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। ग्रीष्म ऋतु में जंगलों में आग लगने की घटनाओं में तेजी से इजाफा होने लगा है। आग के चलते पेड़ पौधों के साथ जंगली जानवर मौत के शिकार हुए वहां भूमि भी बंजर हो गयी। ताजा संकट कनाडा में देखने को मिल रहा है जहां भीषण आग ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसका कारण हीटवेल बताया जा रहा है। गर्मी के महीनों के दौरान अक्सर जंगल की आग की चपेट में आ जाता है। हालांकि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप के अनेक देशों में गर्मी का प्रकोप और अधिक बढ़ गया है। कई स्थानों पर बहुत से लोग अकाल मृत्यु के शिकार भी हो चुके है।
जैसे-जैसे तापमान बढ़ता हैए पेड़ सूखने लगते हैं और उनमें आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। ग्लेशियर और बर्फ की चादरें एक ही समय में पिघलती हैं, जिससे जंगल लंबे समय तक सूखे रहते हैं। आने वाले वर्षों में जंगल की आग और अधिक आम हो जाएगी क्योंकि तापमान और ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि जारी रहेगी। तापमान में वृद्धि से जंगल में वनस्पति और वन्य जीवन दोनों प्रभावित होंगे। गर्मी और पानी की कमी जंगल की आग और भी अधिक प्रभावित करेगी। दरअसल जंगलों की आग से न केवल प्रकृति झुलसती है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारे व्यवहार पर भी सवाल खड़ा होता है। जंगलों में लगी आग से जान-माल के साथ-साथ पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। पेड़-पौधों के साथ-साथ जीव-जन्तुओं की विभिन्न प्रजातियां जलकर राख हो जाती हैं। जंगलों में विभिन्न पेड़-पौधे और जीव-जन्तु मिलकर समृद्ध जैव विविधता की रचना करते हैं। जंगलों में यदि आग विकराल रूप धारण कर लेती है, तो उसे बुझाना आसान नहीं होता है।

