ब्रिटेन की विश्व प्रसिद्ध राजधानी है लंदन

ब्रिटेन की राजधानी लंदन कई विशेषताओं के कारण पूरे संसार में मशहूर है। किसी समय में यह नगर उस विशाल साम्राज्य की राजधानी रही है जहां कभी सूर्यास्त नहीं होता था। उस समय विश्व राजनीति की गतिविधियों में इसकी प्रमुख भूमिका रहती थी किन्तु युग ने करवट बदली और ग्रेट-ब्रिटेन के साथ लंदन की स्थिति में भी बदलाव आया। कभी अपनी शाही चमक-दमक और वैभव के लिए प्रसिद्ध ब्रिटेन का राजसी परिवार अब किसी प्रकार से परंपरा का निर्वाह भर कर रहा है।
ब्रिटेन का सामान्य नागरिक राजनीति तथा राजनीतिक दलों से अधिक रूचि अपने व्यावसायिक कार्यों और मनोरंजन में दिखाता है। रविवार तथा अन्य छुटिट्यों के दिन यहां का नागरिक विशेषकर युवा वर्ग घर से बाहर आमोद-प्रमोद मनाने में मशगूल रहता है। ‘पब’ यानी मयखाने तथा नदी और समुद्र के तट पर मौज-मस्ती चाहने वालों की भीड़ लगी रहती है।
टेम्स नदी पर स्थित ऐतिहासिक नगर लंदन का प्रमुख दर्शनीय स्थल लंदन टावर है, जिसके पास ही ‘बिग बेन’ ब्रिटिश पार्लियामेंट तथा वेस्ट मिस्टर एबी की गिरजाघर है। लंदन टावर नदी टेम्स पर लोहे और पत्थरों से बनाया गया पुराना पुल है जिस पर ऊंचे मीनार में स्थित कमरों को शाही कैदियों को रखने या मार डालने के लिए बंद रखा जाता था।
‘बिग बेन’ नदी-तट पर बनी पत्थर की मीनार पर लगी सबसे बड़ी घंटी है जिस पर चारों ओर चार विशाल घड़ियां लगी है। इसके बगल में ही ब्रिटिश पार्लियामेन्ट की भव्य इमारत है जिसे मध्यकालीन स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना कहा जा सकता है। ब्रिटिश पार्लियामेंट की इमारत के दूसरी ओर वेस्टमिंस्टर एवी है। यह गिरजाघर है। इसके साथ ब्रिटेन के राजपरिवार तथा अन्य विशिष्ट व्यक्तियों का समाधि-स्थल भी है। ब्रिटिश पार्लियामेंट तथा ‘एवी’ के मध्य सुंदर पार्क तथा हरी घास का मैदान है। यहां दिन में काफी चहल-पहल रहती है।
मध्य लंदन में स्थिति शाही परिवार का निवास बकिंघम पैलेस एक सुंदर दर्शनीय स्थल है। राजपरिवार के इस भव्य निवास की व्यवस्था बहुत उचित ढंग से की गई है। इसके सामने विक्टोरिया फव्वारा तथा फूल-पौधों की क्यारियां भी अत्यंत आकर्षक हैं। दूसरी ओर दूर तक फैला हुआ ऐतिहासिक रिजेंट पार्क है जहां नहरें, पेड़-पौधे तथा खिले पुष्पों की पंक्तियां मनमोहक हैं।
लंदन महानगर के हृदय क्षेत्र में स्थित है पिकाडेली। नई दिल्ली के कनॉट प्लेस की तरह फैशन-बाजार, सजी सजाई दुकानें, सिनेमाघर तथा सड़कों के किनारे बैठे अनेक चित्राकार, जो कुछ ही मिनटों में आपकी तस्वीर उतार देंगे। सड़क के किनारे तरह-तरह के रेस्तरां और ‘पब’ जहां किस्म-किस्म की शराब और अनेक प्रकार के सामिष व्यंजन तैयार मिलते हैं। वहां शाम ढली और बिजली की चकाचौंध के साथ नाटक गृह और कैबरे का तमाशा आरंभ हो जाता है। यहां से अलग दूसरे इलाके में ब्रिटिश म्यूजियम की शानदार इमारत है। संसार के अनेक संग्रहालयों में से एक यह ब्रिटिश म्यूजियम अपनी विशालता तथा सुव्यवस्था के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। उल्लेखनीय है कि इस संग्रहालय में भारत-संबंधी एक अलग विभाग है, जहां प्राचीन और मध्यकालीन भारत की अनेक वस्तुएं तथा अभिलेख प्रदर्शित किए गए हैं। 
व्यस्त नगरी लंदन में दूसरा सुप्रसिद्ध मनबहलाव का स्थान है, ट्राफलगर स्क्वायर। वहां पर खुली जगह में एक विशाल फव्वारा है तथा साथ में ऊंचे स्तंभ पर ब्रिटिश सेनानायक जनरल टाफलगर की मूर्ति है। संध्या के समय वहां रौनक रहती है, रंग-बिरंगे फव्वारों की फुहार के अलावा यहां की विशेषता असंख्य कबूतरों की है। काले और सफेद रंग के अनेक कबूतर निडर होकर आपके हाथ या कंधों पर बैठ जायेंगे। यहां का वातावरण सदैव उल्लासमय बना रहता है।  अत्यंत व्यस्त तथा बढ़ती आबादी वाले इस विशाल नगर लंदन को यदि पार्कों का शहर कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। इन पार्कों के अवलोकन से यह पता चलता है कि वास्तव में अंग्रेज फूल-पौधों के शौकीन होते हैं। लंदन के पार्कों में हाइड पार्क का विशेष स्थान है। इसमें एक ओर सुंदर झील है जिसमें छोटी-छोटी नावों मनोरंजन के लिए चलाई जाती हैं। दूसरी ओर पेड़-पौधों का झुरमुट हैं बीच में खुला मैदान है जहां एक कोने में प्राय: शाम को भाषणबाजी होती रहती है। यहां पर कोई भी वक्ता कुछ भी बोल सकता है किन्तु शाही परिवार के प्रति मर्यादा रखनी होगी।
मध्य लंदन में एक अजूबा मूर्ति घर है तुसाद गैलरी जहां संसार के अनेक देशों के महान व्यक्तियों की मूर्तियां सजाकर रखी गई हैं। मोम से बने ये पुतले सजीव लगते हैं। इनमें भारत के गांधी और नेहरू भी हैं। इंदिरा जी,  राजीव गांधी तथा नरसिम्हाराव की प्रतिमायें भी वहां स्थापित की गई हैं जो भारतीय दर्शकों को खूब आकर्षित करती हैं। (उर्वशी)

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