लहलहा रही चैलेंज की फसल

आजकल चैलेंज करने की परम्परा की फसल हर जगह लहलहा रही है। यूं कहिए, चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। खासकर जब से सोशल मीडिया पर पैसे वाला फार्मूला लागू हुआ है, तब से यह फसल और भी तेजी से बढ़ी है।
आज के दौर में जो थोड़ा आगे निकल कर दहाड़ता है, उसे पछाड़ने के लिए चैलेंज करने वाले कुकुरमुत्ते की तरह बेतरतीब उग आए हैं। अगर अपनों में से कोई एक फेमस हो जाए, तो पीछे रह गए कुछ लोग नीच हरकत करने से बाज नहीं आते। अगला जिस क्षेत्र में कदम रखे, या उसी क्षेत्र में पहले से काम कर रहे हों, तो यह बात उन्हें हजम नहीं होती।
ऐसे लोग मन में जलन का भाव लेकर सोशल मीडिया पर बयान चलाते हैं और उस आगे निकल गए व्यक्ति से सीधे पंगा लेते हैं। अरे भाई, जो आगे निकल गया है उसे भला तुम्हारा चैलेंज स्वीकार करने की क्या ज़रूरत है?
इनका मकसद साफ है। लोगों का ध्यान भटकाकर अपने ऊपर खींचना। एक झटका मारकर वे भी सफलता की सीढ़ी पर चढ़ना चाहते हैं। लेकिन जो आगे बढ़ता है वह पीछे मुड़कर नहीं देखता। वह अपने प्रतिद्वंद्वियों पर कोड़े बरसाता है, उन्हें पीछे छोड़ता है, रास्ते में आए पत्थरों को तोड़ते हुए अपनी अमिट छाप छोड़ते आगे बढ़ता जाता है।
इनके पीछे वाला अपने होड़ में इतना उलझ जाता है कि चैलेंज की सीमा लांघकर कन्फ्यूजन फैलाने लगता है। लेकिन सामने वाला ऐसी बातों को तनिक भी तवज्जो नहीं देता। वह अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता रहता है और सफलता की सीढ़ियां चढ़ता जाता है। पीछे लगा हुआ व्यक्ति मुंह की खाकर अपनी कुंठा जाहिर करता है। कहता है- ‘हम कैसे पीछे रह गए और वह हमसे इतना आगे निकल गया?’
आज ऐसे लोगों को हवा देने के लिए खबरिया चैनल भी तैयार बैठे हैं। वे आगे-पीछे डोलते हैं, उनके बोल कैद करते हैं और बाजार में परोस देते हैं। चैलेंज करने वाला ऊंट की तरह मुंह बाए भौंक रहा होता है और माइक ठीक उसी के मुंह के लेवल पर लग जाता है।
आज के दौर में जो फेमस हो जाता है, उसी के पीछे लटककर कुछ लोग उसे डाउन करने में जुट जाते हैं। और वह व्यक्ति झटके पर झटका देता हुआ, बेरहमी से उन्हें लताड़ता रहता है। फिर भी ये दावे से दहाड़ते हैं- ‘इस बंदे में चैलेंज स्वीकार करने की हिम्मत नहीं है। यह कैसे फेमस हो गया? मैं इससे लाख दर्जे बेहतर कर सकता हूं।’ ऐसी सोच वाले बीच मझधार में ही ‘टांय-टांय फिस्स’ हो जाते हैं।
अगर बारीकी से देखें तो इसके पीछे मंशा कुछ और ही दिखती है। इसमें भरी हुई है सिर्फ जलन। अगर ऐसा नहीं होता तो क्लास में टीचर सबको एक समान पढ़ाता है, फिर भी कोई फर्स्ट आता है, कोई पीछे रह जाता है और कोई लटक जाता है। जबकि टीचर का ध्यान सब पर बराबर होता है।
सीधी बात यह है कि फेमस होने के समय मैदान खाली मिलता है। जो मेहनत करता है, वह आगे निकलकर सफलता का परचम लहरा देता है।
हाल में ही एक टीचर के फेमस होते ही उनके आगे, पीछे, ऊपर, नीचे बहुत से लोग लटक गए। और वह झटके पर झटका देते हुए सबको उठा-उठाकर पटक रहा है। कुछ लिच्चड़ और फटीचर किस्म के लोग अदाकारी करते हुए अगला क्या, नमक-मिर्च लगाकर पोल खोलने में लगे हैं। इनकी ओछी हरकतों को जनता सब समझ रही है।
आज भी चैलेंज देने का क्रम जारी है, लेकिन जो आगे निकल चुका है, उसे दूसरे के चैलेंज से क्या मतलब? बस पिछलग्गू बनकर मीन-मेख निकालते रहो और अपने बयान से जनता को पकाते रहो।
-मो. 8329680650

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