विश्व का सबसे बड़ा निजी महल उम्मेद भवन पैलेस
विश्व के किसी भी राजा-महाराजा द्वारा बनवाये गये अपने निजी महलों में अब तक का सबसे बड़ा महल राजस्थान के दूसरे बड़े शहर जोधपुर में छीतर पैलेस है। ‘छीतर पैलेस’ को ‘टेंपल माउंटेन पैलेस’ के नाम से भी जाना जाता है। छीतर पैलेस मारवाड़ के तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह का कीर्ति स्तम्भ है। सन् 1925 मे जब महाराजा उम्मेद सिंह इंग्लैड गये थे, तब लंदन की एक प्रख्यात फर्म ‘लंकास्टर एण्ड लोज’ को इस पैलेस के निर्माण के लिए पच्चीस सौ पौंड का चैक देकर अनुबंधित किया गया था। लेंकास्टर एण्ड लोज ने सन् 1928 में वास्तुविद् सर वाल्टर्स जार्ज के साथ छीतर पैलेस का काष्ठ मॉडल बनाकर भेजा था। मॉडल पसन्द आने पर महाराजा ने इस विशालकाय महल का निर्माण 18 नवम्बर 1929 को अरावली पर्वतमाला की पहाड़ी के ऊपर भूमि पूजन तथा भव्य शिलान्यास समारोह के साथ प्रारम्भ करवाया था।
छीतर पैलेस के बनाने मे तीन सौ श्रमिकों के साथ बीस कनिष्ठ अभियंता, छ: वरिष्ठ अभियन्ता और दस कार्यालय कर्मचारियों के साथ अनकों सहयोगियों ने श्रम किया था। महल के निर्माण के लिए बारह मील लम्बी मीटरगेज की रेल लाईन पत्थर की खान तक बिछाई गई थी। फिदूसर की खानों से बलूई रंग के पत्थर भरकर प्रतिदिन 50 डिब्बों की एक मालगाड़ी पहाड़ी तक पहुंचती थी। दस टन क्षमतावाली भारी भरकम छ: क्रेनों से बड़े-बड़े पत्थर उठाने का कार्य किया गया था। इस कार्य के लिए काठियावाड़ (गुजरात) से कुशल श्रमिकों के विशेष तौर पर बुलवाया गया था। वास्तुकारों ने पत्थरों को जोड़ने के लिए सीमेंट और चूने के मसाले के बजाय इंटरलॉंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया था। पैलेस की दीवारों को बनाने में मकराना के संगमरमर की खानों से पत्थर से 200 वेगन भरकर लाये गये थे। वह इटली से विशेष तौर पर काले संगमरमर का पत्थर पानी के जहाजों में भरकर भी मंगवाया गया था। महल के निर्माण के समय खड्डे भरने हेतु 6 हजार गधों पर थैले भरकर मिट्टी भी मंगवाई थी। एक सौ साठ फुट ऊंचे इस महल में सौ कमरों के साथ साठ बैडरूम तथा बीस बड़े स्टेरूम हैं। महल की गैलेरी इतनी लम्बी है, कि यदि इसके प्रत्येक हिस्से में दौड़ लगायी जाये, को कुल दूरी छह मील के बराबर बैठती है। छीतर पैलेस की बरादरियों के बीच लॉन में दस हजार लोगों के बैठने की क्षमता है। छीतर पैलेस में खूबसुरत नक्काशी और चित्रांकन कार्य के लिए पौलेंड के विख्यात चित्रकार एस. नार्बलिन को बुलाया गया था, जिसने जोधपुर में दो वर्ष रहकर अपने अथक परिश्रम से दरबार हाल व तरणताल में उसकी दीवारों पर ऐसी खूबसूरत नक्काशी का कार्य किया, जिसकी मिसाल दुनिया के किसी भी महल में देखने को नहीं मिलती है।
यह विश्व का अनूठा महल उस समय डेढ़ करोड़ रूपये की लागत से 15 वर्षों में बनकर तैयार हुआ था। पैलेस का विधिवत् उद्घाटन 13 फरवरी 1943 में महाराज कुमार हनंवत सिंह के विवाह के अवसर पर स्वयं महाराजा उम्मेद सिंह ने किया था। महल के प्रमुख द्वार पर लगे सोने की चाबी घुमाकर सात वर्षीय महाराज कुंवर दिलीप सिंह ने इसका दरवाजा खोला था। छीतर पैलेस को बनवाने का मकसद उन दिनों मारवाड़ में पड़े भीषण अकाल के दौरान महाराजा द्वारा अपनी प्रजा के लिए रोज़गार मुहैय्या करवाना था। यह महल उम्मेद भवन पैलेस के नाम से भी जाना जाता है।
ऐतिहासिक सूर्यनगरी जोधपुर में आज इस भव्य महल को देखने वालों का तांता लगा रहता है। छीतर पैलेस की शोभा देखने आने वालों में सर्वाधिक संख्या दूर दराज देशों से आने वाले विदेशी पर्यटकों की होती है। पैलेस के एक भाग में जोधपुर के पूर्व नरेश गजसिंह सपरिवार रहते है। महल का एक बड़ा हिस्सा म्यूजियम की भांति है, जिसमें रजवाड़ों के शासनकाल की कई प्राचीन व कलात्मक दुर्लभ वस्तुएं सुरक्षित रखी हुई हैं। यह महल देश का सबसे बड़ा ‘हैरिटेज होटल’ भी कहलाता है। (सुमन सागर)





