बहुत खतरनाक है विवाह समारोहों में शराब और गोली का रुझान


बहुत पुराने समय से कहावत यही चलती है कि चोर को मत मारो, चोर की मां को मारो। लेकिन व्यवहार में ऐसा देखा ही नहीं जाता जहां अपराधी की मां को दंड दिया जाता हो। जब अपराध करवाने वाले व्यक्ति न होकर कोई सामाजिक या सरकारी बुराई हों तो फिर उसे दंड दिया कैसे जाए। इसका उत्तर तो यही होगा कि दंड उन्हें दीजिए जो यह बुराई फैलाते हैं और लोगों को अपराधी बनाते हैं। वैसे भी कानून है कि अगर कोई व्यक्ति दूसरे को हत्या आदि अपराध करने के लिए उकसाता है अथवा अपराध करवाने के लिए धनराशि जिसे आजकल सुपारी कह दिया जाता है, देता है तो वह भी बड़ा अपराधी है। अभी कुछ दिन पहले पंजाब के जिला होशियारपुर में घटित दुर्घटना का समाचार है। एक घर में शादी का जश्न, जागो का आनंद भरा अवसर और उसके साथ ही डी.जे., नाच-गाना चल रहा है। इसी बीच वहां हत्या हो गई। 
जानबूझकर किसी ने नहीं की, पर हत्या का कारण एक व्यक्ति के शराब में धुत होकर शादी की खुशी में फायरिंग करना बना। यह फायर पड़ोसी युवती की मौत का कारण बना, जो अपने घर की छत से ही इस वैवाहिक जश्न को देख रही थी। गोली चलाने वाला दुल्हन का पिता था। वह हत्यारा घोषित हो गया। गिरफ्तार हो गया। बेटी की डोली उठाने का भी उसे मौका नहीं मिला होगा। अब वही प्रश्न क्या दुल्हन का पिता अपराधी है? अपराधी वह सरकार भी है जो सभी कागजी घोषणाएं करने और कानून बनाने के बाद भी विवाह आदि समारोहों में गोली चलाने की बुराई नहीं रोक पाई। इससे भी बड़ी बुराई यह कि शादी को शराब के साथ जोड़ दिया गया। अधिकतर पारिवारिक, सामाजिक उत्सवों में शराब पीना-पिलाना सामाजिक उच्च स्तर का अथवा प्रगतिशील होने का प्रतीक बन गया। पुलिस का यह कहना है कि अपराधी व्यक्ति को जब पकड़ा गया तो वह नशे में बुरी तरह से धुत्त था कि किसी भी प्रश्न का उत्तर देने में समर्थ नहीं हो सका। इस शराब के कहर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पंजाब के ही बठिंडा से प्राप्त हुई। पावरकॉम के एक जे.ई. ने केवल इसलिए पत्नी को गोली मार दी कि उसे घर का दरवाजा खोलने में थोड़ा विलम्ब हो गया। सूत्रों के अनुसार जे.ई. उस समय नशे में मदमस्त था, कुछ सूझ नहीं रहा था उसे और विश्वसनीय सूत्रों ने यह जानकारी दी कि शराब का आदी यह जे.ई. अनेक बार पत्नी और परिजनों को पीट देता था। फिर वही प्रश्न अपराधी कौन? फिरोजपुर में एक व्यक्ति ने दुकानदार पिता से उसी की शिकायत करने आए युवक को पीट-पीट कर मार दिया। वह भी शराब के रंग में रंगा था और अमृतसर में ऐसी अनेक घटनाएं हो चुकी हैं। फिर ताजा समाचार है कि कोई शराब पीने की सुविधा न मिलने पर अथवा मांगने पर नई बोतल देने से इंकार करने पर दुकान मालिक की हत्या कर दी गई। अनेक बार यह समाचार मिलते हैं कि कभी शराबी ड्राइवर के कारण दुर्घटनाएं हुईं और कीमती जीवन मौत के मुंह में चले गए। सच्चाई यह है कि पंजाब के साथ ही अन्य कई प्रांतों की सरकारें शराब से प्राप्त राजस्व से ही अपनी नैया पार करती हैं। अनेक उच्चाधिकारी और नेता भी इसी नशे से अपनी परेशानियां और थकान दूर करने की बात कहते हैं। 
कितने अपराध, कितनी सड़क दुर्घटनाएं सरकार द्वारा पिलाने वाले इस लाल पानी से हो जाती हैं, उसकी पूरी संख्या कोई नहीं जानता। अधिकतर दुष्कर्म और हत्याएं भी नशों के कारण ही होती हैं। जिगर, कैंसर, टी.बी. जैसी भयानक बीमारियों के लिए भी यही नशा उत्तरदायी है, पर सरकार को क्या?  कोई मरे कोई जिए, सरकार आराम से पिलाए और पिए। देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का वैसे भी अभाव है। 
सच यह भी है कि नशे के पानी से बीमार अधिकतर बहुत गरीब लोग होते हैं। उनके पास उपचार की सुविधा नहीं, पर न तो देश की सरकारें नशों पर नियंत्रण कर सकी हैं, न ही हमारे समाज के विशिष्ट नेता देश में नशों के विरुद्ध वातावरण बना सके। सभी जानते हैं कि डंडे से कोई सुधार नहीं होता और आम जन समय के शीर्ष व्यक्तित्वों के पथ का ही अनुसरण करते हैं। अब जिनके पथ का अनुसरण करना है उनमें से बड़ी संख्या में अपने घर के विवाह आदि उत्सवों पर पूरा जश्न लाल पानी के साथ ही करते हैं। पीते हैं, पिलाते हैं और पंजाब का तो एक अनोखा समाचार है। कुछ वर्ष पूर्व मंत्री रहे एक नेता ने इतनी पिलाई, जिससे बहुत से लोग अर्द्धबेहोश होकर गिरे, पर बहुत दरियादिली और सहानुभूति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेताजी ने वहां कुछ एंबुलैंस भी खड़ी कर दीं, जिससे नशों से डगमगाते लोगों को घरों अथवा आवश्यकतानुसार अस्पताल तक पहुंचा दिया जाए। गुजरात, मणिपुर और बिहार को छोड़कर  कोई भी राज्य सरकार शराब की कमाई से मुंह मोड़ने को तैयार नहीं। प्रधानमंत्री मोदी जी से भी यह निवेदन किया कि मन की बात में एक बार देश को यह संदेश अवश्य दें कि शराब का सेवन न करें। यह भी प्रार्थना की कि कम से कम विवाह आदि समारोहों में शराब न पिएं-पिलाएं, पर अभी तक ऐसा हो नहीं सका। कड़वे करेले पर नीम यह कि जिन मैरिज पैलेसों में मदिरा पान की छूट दी गई है उन्हें हर ऐसे समारोह के लिए हजारों रुपये सरकार को देने पड़ते हैं, जहां लाल पानी पिया पिलाया जाएगा। संभवत: सभी प्रांतों की सरकारें नोट कमाने के लिए यही धंधा अपनाती हैं। गोवा में तो जुआ भी सरकारी आमदनी का एक मजबूत साधन है। कुछ प्रांतों में वेश्यावृत्ति भी सरकारी नाक के नीचे चलती है। भारत के शासकों विशेषकर प्रधानमंत्री जी को याद होगा कि परीक्षित ने कलियुग को रहने के लिए जो स्थान दिए थे वे हैं मदिरालय, वेश्यालय, द्यूत क्रीड़ा स्थान (जुआ) और बूचड़खाने हैं। जब यह सब कुछ देश में चलाया जा रहा है तो कलियुग के प्रभुत्व वाले ठिकानों में राम राज्य लाने की कल्पना निश्चित ही अधूरी रह जाएगी। भारत देश के शासकों से यह आशा की जाती है कि वे जनता को स्वस्थ वातावरण दें, जिससे नैतिक मूल्यों में वृद्धि हो और चोर की मां को ही अपना विस्तार न करने दे, फिर चोरों से जूझने की आवश्यकता नहीं रहेगी।