भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस की उपलब्धि क्या रही ?

 

कांग्रेस पार्टी द्वारा राहुल गांधी के नेतृत्व में 7 सितम्बर, 2022 को कन्याकुमारी (तमिलनाडू) से आरम्भ की गई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। 30 जनवरी को श्रीनगर में तिरंगा ध्वज फहराने तथा एक बड़ी रैली को राहुल गांधी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तथा कुछ अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं द्वारा सम्बोधित किए जाने के साथ ही यह यात्रा पूर्ण हो जाएगी। अब तक यह यात्रा लगभग 3500 किलोमीटर का स़फर तय कर चुकी है।
सवालों का सवाल यह है कि इस यात्रा से अब तक क्या उपलब्धियां हासिल हुई हैं तथा कांग्रेस को इससे आगामी समय में किस-किस तरह के लाभ हो सकते हैं? इन प्रश्नों के दायरे में ही हम इस यात्रा के संबंध में चर्चा करने का प्रयास करेंगे।
सबसे पहली बात यह है कि 2014 में केन्द्र में भाजपा के सत्तारूढ़ होने के बाद देश में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति तेजी के साथ आगे बढ़ती हुई दिखाई देती रही है। अल्पसंख्यकों, विपक्षी पार्टियों के नेताओं, धर्म-निरपेक्षता तथा लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले पत्रकारों तथा बुद्धिजीवियों को भिन्न-भिन्न ढंगों से तंग-परेशान किया जाता रहा है। झूठे-सच्चे मामले बना कर उन्हें जेलों में डाला जाता रहा है। लोगों द्वारा सरकारी नीतियों तथा दमन के विरुद्ध किये जाते प्रत्येक संघर्ष को बेरहमी के साथ दबाने के प्रयास किये जाते रहे हैं। यू.ए.पी.ए. तथा एन.एस.ए. जैसे दमनकारी तथा जन-विरोधी कानून देश की सुरक्षा के नाम पर और अधिक कड़े बनाए गए हैं। विशेष तौर पर देश के बड़े अल्पसंख्यक मुसलमान समुदाय को निशाना बनाया जाता रहा है। प्रैस के बड़े भाग को केन्द्र में सत्ताधारी शासकों द्वारा अपने प्रभाव में ले लिया गया है। देश की बड़ी संस्थाओं तथा केन्द्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग भी विपक्षी पार्टियों तथा विरोधी विचारधारा रखने वालों के विरुद्ध होता आ रहा है। इससे देश में एक तरह से ऩफरत, भय तथा सहम का माहौल बना हुआ था। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भाजपा तथा आर.एस.एस. की इस साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की नीति तथा देश के घटनाक्रम संबंधी भाजपा के प्रवचन (नैरेटिव) को चुनौती देने में निरन्तर असफल होती आ रही थी। यदि चुनावों की बात करें तो 2014 से लेकर अब तक कांग्रेस ज्यादातर विधानसभा चुनाव भी हार गई थी। यदि ज्यादा पीछे न जाएं, वर्तमान की ही बात करें तो सिर्फ हिमाचल प्रदेश में ही इसे सफलता मिली है। 2014 के लोकसभा चुनावों के अलावा 2019 के लोकसभा  चुनाव भी यह बुरी तरह हार गई थी। पार्टी में निराशा का आलम था तथा कांग्रेस हाईकमान की पार्टी पर पकड़ भी कमज़ोर होती जा रही थी। पार्टी के बहुत-से नेता पार्टी को छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे। पार्टी में राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक गुटबंदी बढ़ती जा रही थी। 
इस तरह की स्थितियों में ये प्रश्न उठने लग पड़े थे कि, क्या देश की यह सबसे पुरानी पार्टी अपना अस्तित्व भी बचा कर रख सकेगी या नहीं? इस सन्दर्भ में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की यह बड़ी सफलता रही है कि उसने पार्टी में से निराशा का माहौल खत्म कर दिया है तथा पार्टी के नेताओं, कैडर तथा निचले स्तर पर समर्थकों को उत्साहित किया है। कन्या कुमारी से यात्रा के शुरू होने के साथ ही प्रत्येक प्रदेश में राहुल गांधी के नेतृत्व वाली ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने व्यापक स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। कांग्रेस समर्थकों के साथ-साथ बहुत-सी ़गैर-राजनीतिक बड़ी शख्सियतों ने भी इस यात्रा में भाग लिया। इनमें स्वर्गीय पत्रकार गौरी लोकेश की बहन कविता लोकेश, रोहित बेमूला (हिंसा में मारा गया दलित युवक) की माता राधिका बेमूला, रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघु राम राजन, प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण, मेधा पाटेकर, योगेन्द्र यादव, फिल्म अभिनेता अमोल पालेकर, पूजा भट्ट, रिया सेन, सुशांत सिंह तथा प्रसिद्ध कामेडियन कुनाल कामरा आदि शामिल हैं। इस पूरी यात्रा के दौरान जिस तरह राहुल गांधी खुल कर आम लोगों, युवाओं, बुजुर्गों तथा बच्चों से मिले हैं, उसने व्यापक स्तर पर कांग्रेस तथा राहुल गांधी के पक्ष में समर्थन पैदा किया है।
इस यात्रा की दूसरी बड़ी उपलब्धि यह रही है कि विगत लम्बी अवधि से भाजपा तथा भाजपा-समर्थक मीडिया ने राहुल की छवि एक ़गैर-ज़िम्मेदार अय्याश युवक, जिसे राजनीति तथा देश की गम्भीर समस्याओं की कोई समझ नहीं है, की बना दी थी। ज्यादातर स्थानों पर मीडिया में उनका ‘पप्पू’ कह कर भी मज़ाक उड़ाया जाता रहा है परन्तु इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी की यह छवि पूरी तरह टूट गई है। जिस तरह उन्होंने निरन्तर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति के विरुद्ध प्रेम तथा मोहब्बत भरी भाषा में अपने विचार प्रकट किए हैं, जाति एवं धर्म की घेरेबंदियों को छोड़ कर लोगों को जोड़ने की बात की है, श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की कार्पोरेट-पक्षीय नीतियों के जन-साधारण पर पड़ रहे विपरीत प्रभावों, बढ़ रही बेरोज़गारी तथा महंगाई के मुद्दों को उठाया है, उससे उनकी ‘पप्पू’ वाली छवि बिल्कुल बदल गई है। अब उन्हें ज्यादातर लोग एक गम्भीर युवा नेता के रूप में देखने लगे हैं, जो लगन तथा दृढ़ता के साथ विरोधी हालात में भी अपने विचारों पर खड़ा हो सकता है तथा विश्वास के साथ उन्हें लोगों के समक्ष रख सकता है। उनके द्वारा यात्रा के दौरान लगातार एक ही टी-शर्ट पहने रखने से लोगों में उनकी सादगी का प्रभाव पड़ा है तथा लोग उन्हें अपने में से एक के रूप में पहचानने लगे हैं। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जोकि स्वयं को एक चाय बेचने वाला प्रचारित कर लोगों की सहानुभूति लेने का यत्न करते रहे हैं, का अब पहरावे के मामले में मुकाबला राहुल गांधी के साथ होने लगा है, क्योंकि प्रधानमंत्री अक्सर महंगी पोशाक पहनते हैं तथा भिन्न-भिन्न समारोहों में भाग लेते समय एक दिन में कई-कई पोशाक भी बदलते हैं। समूचे तौर पर कहा जा सकता है कि इस लम्बी यात्रा ने कांग्रेस की छवि भी बदली है और राहुल गांधी की छवि भी बदली है तथा यह यात्रा कांग्रेस को लोगों के निकट लेकर गई है। कांग्रेस में अविश्वास तथा निराशा का वातावरण समाप्त हुआ है। 
परन्तु अगला सवाल यह है कि, क्या यह यात्रा कांग्रेस को इस वर्ष होने वाले 9 प्रदेशों के विधानसभा चुनावों तथा अंतिम तौर पर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों में वोट दिला सकेगी? इस प्रश्न का हां में जवाब देना अभी बहुत कठिन होगा, क्योंकि चुनाव जीतने के लिए उचित कार्यक्रम, कुशल राणनीति, मज़बूत संगठनात्मक ढांचे तथा व्यापक स्तर पर वित्तीय स्रोतों की ज़रूरत होती है। इन पक्षों से कांग्रेस अभी पिछड़ती हुई दिखाई दे रही है। इन कमज़ोरियों को कांग्रेस को दूर करना होगा। 30 जनवरी को यह यात्रा सम्पन्न होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर इस यात्रा के प्रभाव के तौर पर जो कांग्रेस की सकारात्मक छवि बनी है, उसे निरन्तर कायम रखने तथा पूरे देश में निचले स्तर पर लोगों के साथ सम्पर्क बनाए रखने के लिए कांग्रेस को आगे और राजनीतिक कार्यक्रम देने पड़ेंगे तथा विशेषकर 9 प्रदेशों, जिनमें चुनाव होने हैं, उनमें चुनाव जीतने के लिए अपनी गतिविधियों को तेज़ करना होगा। उचित उम्मीदवारों का चयन करने तथा चुनाव जीतने के लिए आवश्यक वित्तीय स्रोत जुटाने के लिए पार्टी को निरन्तर कार्य करना होगा। लोकतांत्रिक, धर्म-निरपेक्षता तथा संघीय ढांचे को मज़बूत बनाने संबंधी प्रचार करने के साथ-साथ भिन्न-भिन्न प्रदेशों के लोगों की समस्याओं को आधार बना कर प्रभावी चुनाव घोषणा-पत्र तैयार करने पड़ेंगे। ऐसे बहुपक्षीय यत्नों से ही वह आगामी समय में विधानसभा चुनावों में भाजपा का कुशलता से सामना करने में समर्थ हो सकेगी। 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी करने के लिए भी उसे अभी से ही सक्रिय होना पड़ेगा, क्योंकि दूसरी ओर भाजपा ने पिछले काफी समय काफी से भिन्न-भिन्न राज्यों के होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों की तैयारी भी शुरू की हुई है। हाल ही में दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हुई बैठक को भी इसी प्रसंग में ही देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री अमित शाह ने देश के भिन्न-भिन्न भागों में चुनावी दौरे भी शुरू कर दिये हैं। अत: आने वाला समय ही बताएगा कि कांग्रेस सफल ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद आने वाली परीक्षा में कितनी सफलता से पास होती है। फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि उसने विचारधारा के क्षेत्र में भाजपा तथा संघ को चुनौती देकर उसके प्रवचन के मुकाबले सफलता से लोगों के समक्ष अपना प्रवचन रखने में सफलता प्राप्त की है।