दूसरे राज्य भी अपना रहे योगी का अपराध नियंत्रण तरीका
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का अपराध नियंत्रण स्टाइल अब पूरे देश में चल निकला है। एक समय था, जब चोरी, छीना-झपटी, मारपीट, डकैती, चेन स्नैचिंग, महिला अपराध जिसमें छेड़खानी प्रमुख था, अवैध रूप से ज़मीनों पर कब्ज़ा करना, अपहरण और भी न जाने कैसे-कैसे अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस के पास दो तरीके थे। एक अपराधी को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ करना और अगर वह पकड़ में नहीं आ रहा है, अपराध संगीन कर रहा है तथा वह समाज के लिए नासूर बन गया है, तो उसका एनकाउंटर करना। पूछताछ के लिए वह उससे थर्ड डिग्री तरीका अपनाती थी, लेकिन इसके बाद भी अपराधियों पर कोई खास असर नहीं होता था, पर जब से उत्तर प्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथ आयी, तब से अपराधियों को लगने लगा है कि उनकी जान सांसत में है। योगी ने इसके लिए जो तरीका अपनाया वह था—हाफ एनकाउंटर।
पूछताछ में थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करना खतरनाक माना जाता था। थर्ड डिग्री का मतलब तलवों पर मारना, मिर्ची डालकर छोड़ देना, उल्टा लटकाना, बर्फ की सिल्ली या धूप में बांधे रखना था। कई बार इस प्रक्रिया में पूछताछ करने वाला मनोवैज्ञानिक तरीके से भी डराता था। इतना सब करने के बाद भी अपराधियों पर उतना असर नहीं था जितना आशा की जाती थी। एनकाउंटर में अपराधी को आमने-सामने की मुठभेड़ में मौत मिलती थी, लेकिन कई बार पुलिस के जवान भी शहादत को प्राप्त होते थे और नतीजा वही जो थर्ड डिग्री के बाद रहता था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी ने इसका जो तोड़ निकाला, वह कानून के अनुसार ही माना जाता है, इसमें भागते अपराधी को रोकने के लिए उसके शरीर के निचले अंगों पर फायर करने की छूट थी। बस यही बात अपराधियों के लिए थर्ड डिग्री तथा एनकाउंटर से भी खतरनाक सिद्ध हुई।
पुलिस को इस हाफ एनकाउंटर के साथ ही मदद मिली आपरेशन लंगड़ा, बुलडोज़र एक्शन से। हाफ एनकाउंटर का डर कितना होता है यह सोशल मीडिया और न्यूज चैनल पर जब अपराधियों को दिखाया जाता है, तो साफ नजर आता है। कोई अपराधी पैर व टांगें में गोली लगने से घायल हो जाता है या भागते एवं कूदने समय गिरने से घायल हो जाता है। हालांकि हाफ एनकाउंटर का काफी विरोध भी हुआ है लेकिन मुख्यमंत्री योगी एक ही बात करते हैं कि अगर अपराधी गोली चलाएगा, तो पुलिस भी गोली चलाएगी।
हाफ एनकाउंटर और बुलडोज़र एक्शन अब उत्तर प्रदेश से निकलकर राजस्थान में भी आ गया है, बिहार में भी और गुजरात में भी। मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, झारखंड में भी बुलडोज़र की धमक अपराधियों द्वारा हथियाई गई सरकारी-गैर-सरकारी संपत्ति को मुक्त कराने के लिए सुनाई दे रही है। उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है और दूसरे राज्यों में अब तक कम से कम दो हजार से अधिक मामले सामने आए हैं। आज से कई साल पहले ये किस्से शहरों के साथ ही गांवों में भी सुनाई देते थे कि अब बदमाश पुलिस के पास जाकर गिरफ्तार करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। खुद उत्तर प्रदेश की पुलिस ने माना है कि करीब 13 हज़ार आरोपियों को मुठभेड़ में घुटने के नीचे गोली मारी गई या लगी।
दरअसल पहले जब थर्ड डिग्री या एनकाउंटर का मामला होता था और कोई हादसा हो जाता था, तो सीधे पुलिस पर कार्रवाई होती थी और अपराधी यह सोचकर आगे बढ़ जाता था कि देखा जाएगा जो होगा। लेकिन अब हाफ एनकाउंटर में इस तरह की बातें स्थान नहीं पा रहीं। यह बात भी नहीं भूलनी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी इस पर कहा है कि इसे बेहद गंभीर माना है और कहा है कि आरोपी को सजा देना पुलिस का काम नहीं है, यह अधिकार सिर्फ न्याय पालिका के पास है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि अपराधी कई बार कानून से बचने का तरीका तलाश लेते रहे हैं, संविधान के अनुच्छेद 21 में थर्ड डिग्री को उल्लंघन माना गया है, जिससे अपराधियों को पुलिस की सख्ती से बचने की राह मिली है, कई बार गवाह आदि के कारण आरोपी बच जाता है, लेकिन हाफ एनकाउंटर में वह जिस दर्द, कष्ट, मानसिक तनाव, आर्थिक हानि, परिवार से विछोह, परेड के कारण सामाजिक संताप से गुजरता है, वह उसे उस कष्ट का अनुभव कराता है जिसे वह अपराध करते समय ध्यान में नहीं रखता। शायद त्वरित न्याय, हाफ एनकाउंटर और आपरेशन लंगड़ा तथा बुलडोज़र इसलिए चलन में कायम हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



