शी-बॉक्स पोर्टल : कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा का डिजिटल कवच
भारत जब 2047 में अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है, तब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने महिला-नेतृत्वित विकास को राष्ट्रीय प्रगति का केंद्र बिंदु बनाया है। महिलाओं की समावेशी आर्थिक वृद्धि में निर्णायक भूमिका को स्वीकार करते हुए सरकार ने ऐसा सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील कार्य वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया है, ताकि महिलाएं आत्मविश्वास के साथ कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ सकें। इसी दिशा में कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम-2013 एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ के रूप में कार्य करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गत एक दशक में महिला सशक्तिकरण को केवल एक नारा नहीं, बल्कि नीति, संरचना और प्रभावी क्रियान्वयन का विषय बनाया है। ‘नारी शक्ति’ को राष्ट्र की उन्नति का आधार मानते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यापक संस्थागत सुधार किए गए हैं। इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक उदाहरण है महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 में प्रारंभ किया गया शी-बॉक्स पोर्टल, जो कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और न्याय तक सहज पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त डिजिटल मंच के रूप में उभरा है।
आज भारत में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के साथ-साथ स्टार्टअप्सए सेवा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और असंगठित क्षेत्रों में भी महिलाएं बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। ऐसे में यह अनिवार्य हो जाता है कि कार्यस्थल सुरक्षित, सम्मानजनक और भय-मुक्त हों। कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम-2013 (पॉश एक्ट) इसी उद्देश्य से बनाया गया था। मोदी सरकार ने कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल गवर्नेंस के तहत शी-बॉक्स पोर्टल को 29 अगस्त, 2024 को तकनीकी सुधारों के साथ पुन: लागू किया, जिससे यह अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और पारदर्शी बन सके। यह पोर्टल देशभर में गठित आंतरिक समितियों (आई.सी.) और स्थानीय समितियों (एल.सी.) से संबंधित सूचनाओं का एक केंद्रीकृत भंडार (सी.आर.) प्रदान करता है।
शी-बॉक्स पोर्टल का उन्नत संस्करण महिलाओं को सीधे संबंधित आंतरिक समितियों या स्थानीय समितियों के पास शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। इससे शिकायत प्रक्रिया में होने वाली देरी और अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप में कमी आती है। शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मंच सरकारी या निजी, संगठित या असंगठित, हर क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए समान रूप से सुलभ है।
प्रधानमंत्री मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विज़न के अनुरूप शी-बॉक्स पोर्टल महिलाओं को सुरक्षित, सरल और गोपनीय तरीके से शिकायत दर्ज करने और उसकी प्रगति ट्रैक करने की सुविधा देता है। पोर्टल पर दर्ज की गई शिकायत सीधे संबंधित कार्यस्थल की आंतरिक समिति या ज़िले की स्थानीय समिति तक पहुंचती है। गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि आंतरिक समिति की अध्यक्ष के अलावा कोई अन्य व्यक्ति शिकायत का विवरण नहीं देख सकता, जिससे पीड़िता की पहचान सुरक्षित रहती है। पॉश एक्ट के तहत सरकार का दायित्व है कि वह शिकायतों से संबंधित आंकड़ों का संधारण और निगरानी करे। इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी शिकायत की जांच के लिए 90 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिसका पालन सुनिश्चित करने में शी-बॉक्स पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय द्वारा डैशबोर्ड अलर्ट, ईमेल और संदेश के माध्यम से नियमित रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं।
शी-बॉक्स की प्रभावशीलता में नोडल अधिकारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक कार्यस्थल पर नियुक्त नोडल अधिकारी, नियोक्ता, आंतरिक/स्थानीय समिति और शिकायतकर्ता के बीच समन्वय स्थापित करते हैं। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि शिकायतें केवल दर्ज न हों, बल्कि उन पर समय पर और नियमानुसार कार्रवाई भी हो। बहुभाषी समर्थन, रीयल-टाइम ट्रैकिंग और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से शी-बॉक्स पोर्टल कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को केवल एक कानूनी प्रावधान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे एक व्यवस्थित, भरोसेमंद और जवाबदेह संस्थागत ढांचे में परिवर्तित करता है।
शी-बॉक्स वास्तव में एक दूरदर्शी विज़न का सशक्त प्रतिबिंब है, जहां नारी शक्ति को भय से मुक्त कर, सम्मान और आत्मविश्वास के साथ कार्यस्थलों में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है, ताकि महिलाएं अपनी पूरी क्षमता के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।
(लेखक भारत सरकार में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री हैं)



