क्या भाजपा राहुल गांधी पर मुकद्दमा चलाएगी ?
राहुल गांधी वैसे तो मुकद्दमों के आदी हो गए हैं। देश का शायद ही कोई राज्य होगा, जहां उनके खिलाफ मुकद्दमा नहीं हुआ है। इसलिए दिल्ली पुलिस ने जो नया मुकद्दमा दर्ज किया है, वह कायदे से उनके लिए ज्यादा चिंता की बात नहीं होनी चाहिए। लेकिन सरकार को उम्मीद है कि वह इस मुकद्दमे के जरिए दबाव बढ़ाएगी। वह दबाव राहुल के साथ-साथ कुछ दूसरे लोगों पर भी हो सकता है। यह मुकद्दमा लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब लेकर जाने का है। बहरहाल, दिल्ली पुलिस जब इस बात की जांच करेगी कि राहुल गांधी को किताब कहां से मिली तो उसके साथ कई चीज़ों की जांच होगी। जांच की आंच पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे तक भी पहुंचेगी क्योंकि अगर प्रकाशक ने नहीं लीक की तो दूसरा स्रोत लेखक ही हो सकता है। सरकार के संसदीय प्रबंधक उम्मीद कर रहे हैं कि इससे वे कांग्रेस और विपक्ष पर दबाव बना पाएंगे। दूसरी ओर राहुल गांधी की टीम का कहना है कि यह विवाद जितना बढ़ेगा उतना सरकार को नुकसान होगा। लोगों के मन में सवाल उठेगा कि आखिर सरकार क्यों एक पूर्व सेना प्रमुख की किताब की बातें बाहर आने से रोकना चाहती है। लोगों को यकीन हो गया कि पूर्व सेना प्रमुख कुछ ऐसा बताना चाहते हैं, जो सरकार छिपाना चाहती है, तो उसका उलटा असर होगा। सेना को लेकर सरकार जो भी वृत्तांत (नैरेटिव) बनाती है, वह खराब होगा। इसलिए मुकद्दमा दोधारी तलवार है। सरकार को उलटा भी पड़ सकता है।
अजित पवार की मौत से जुड़े सवाल
शरद पवार के पोते और उनकी पार्टी के विधायक रोहित पवार ने अपने चाचा अजित पवार की मौत के पीछे साज़िश की बात कही है। पिछले दिनों एक प्रैस कॉन्फ्रैंस में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देकर रोहित ने आरोप लगाया कि अजित पवार के विमान हादसे के पीछे बड़ी साज़िश है। जिस समय रोहित पवार पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दे रहे थे, उसी समय सुनेत्रा पवार ने औपचारिक रूप से उप-मुख्यमंत्री का पद संभाला। अभी उनकी या उनके दोनों बेटों की तरफ से इस तरह का कोई बयान सामने नहीं आया है। इसीलिए सवाल है कि शरद पवार खेमे के नेता क्यों ऐसी बात कर रहे हैं। खुद शरद पवार ने पहले दिन साज़िश की बात से इन्कार किया था। बहरहाल, रोहित पवार ने यह सवाल भी उठाया कि जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, वह दो दिन पहले सूरत क्यों गया था? उन्होंने पायलट सुमित कपूर के आचरण का सवाल उठाया और कहा कि वह शराब पीने की लत की वजह से कई बार विवाद में रहे हैं। पहले उनको अजित पवार का विमान लेकर बारामती नहीं जाना था, लेकिन अचानक पहले से तय पायलट की जगह उनको भेजा गया। रोहित ने कहा कि हादसे से पहले पायलट ने ‘मे डे’ अलर्ट नहीं किया। पहली नज़र में सवाल जायज़ लग रहे हैं, लेकिन अगर यह आरोप लगाते समय अजित पवार की पत्नी या बेटे भी साथ होते तो इनकी गंभीरता बढ़ जाती।
ए.आई. सम्मेलन के लिए होटलों में भीड़
राजधानी दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) का पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 16 से 20 फरवरी के होने जा रहा है। इसमें हिस्सा लेने के लिए दुनिया भर की ए.आई. कंपनियां और स्टार्टअप्स के लोग आ रहे हैं। इस मौके पर ए.आई. अनुसंधान संगठन ओपन ए.आई. के सैम ऑल्टमैन व सैकड़ों सीईओ और टेक्नोक्रेट भी दिल्ली आएंगे। लेकिन इस सम्मेलन को लेकर भारत में अभी तक मुख्य रूप से जो खबर चर्चा में है, वह होटलों हो रही मारामारी को लेकर है। इस सम्मेलन में भारत की कितनी कंपनियां इसमें हिस्सा लेंगी और इससे भारत में ए.आई. इकोसिस्टम पर क्या असर होगा, इसकी चर्चा की बजाय होटल के कमरे महंगे होने की खबर है। दिल्ली के सभी पांच सितारा होटल 16 से 20 फरवरी तक के लिए भर गए हैं और एक भी कमरा खाली नहीं है। यह भी खबर है कि कमरे का किराया जो पहले 20 हज़ार रुपये था, वह अब 50 हजार रुपये से ऊपर है और 40 हज़ार के कमरे का किराया डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा हो गया है। सवाल है कि क्या इतना बड़ा सम्मेलन दिल्ली में हो रहा है तो सरकार को किराया कीमतों पर नियंत्रण नहीं रखना चाहिए? भारत में हर मौके पर चाहे वह इस तरह का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हो या कोई आपदा हो, विमानन कंपनियों से लेकर होटल वाले और कैब सर्विस वाले अधिक किराया वसूलने लगते हैं।
भाजपा सिर्फ हिंदू-मुस्लिम मुद्दे के सहारे
असम में चुनाव होने वाले हैं, लेकिन वहां दूसरे सारे मुद्दे गौण होते जा रहे हैं। वहां 10 साल से भाजपा की सरकार है, लेकिन 10 साल से अपनी इस डबल इंजन सरकार के कामकाज की बजाय भाजपा सिर्फ हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। एक प्रयोग के तौर पर पिछले दिनों एआई से बना एक वीडियो वायरल कराया गया, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को दो मुस्लिम दिख वाले लोगों पर बंदूक से निशाना साधते देखा गया था। बाद में उस वीडियो को हटा लिया गया है। सरमा ने इसी तरह का ज़हरीला प्रचार 2024 के झारखंड चुनाव में भी किया, लेकिन भाजपा बुरी तरह से चुनाव हारी। अब देखना है कि असम में वे इस मुद्दे को कितना चला पाते हैं।
सब चाहते थे कि पाकिस्तान मैच खेले
आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती, पाकिस्तान के संदर्भ में यह बात भारत सरकार के शीर्ष नेता अक्सर कहते रहते हैं। इसी तर्ज पर भारत के क्रिकेट प्रशासक और प्रसारणकर्ता भी कहते हैं कि आतंकवाद और क्रिकेट दोनों साथ-साथ नहीं चल सकता। लेकिन बात जब कारोबार की आती है तो सब चलने लगता है। इस बार भी करीब 10 दिन के ड्रामे के बाद टी-20 विश्व कप में पाकिस्तान 15 फरवरी को कोलंबो में भारत से मैच खेलने को तैयार हो गया। यह भी कमाल का संयोग है, जो आईसीसी के हर टूर्नामेंट में होता है कि भारत और पाकिस्तान एक ही ग्रुप में रखे जाते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि कम से कम एक मैच दोनों देशों के बीच ज़रूर हो। यह सबके लिए फायदे का कारोबार होता है। बहरहाल, भारतीय मीडिया यह माहौल बना रहा है कि पाकिस्तान झुक गया। लेकिन यह कोई नहीं बता रहा है कि बीसीसीआई भी चाहता था कि मैच हो और टूर्नामेंट के प्रसारण का अधिकार लेने वाली कंपनी को भी मैच की ज़रुरत थी। अगर मैच नहीं होता तो बीसीसीआई को भी नुकसान था और जियो का भी बहुत नुकसान होता।





