भारत-फ्रांस संबंधों का महत्त्व

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान सम्पन्न हुए 21 समझौतों से एक ओर जहां दोनों देशों के बीच संबंधों की प्रगाढ़ता और बढ़ने की प्रबल सम्भावना है, वहीं भिन्न-भिन्न क्षेत्रों से सम्बद्ध इन समझौतों के कारण देश की विकास दर को भी पंछी पंख लगने की आशा उपजती है। इन समझौतों में रक्षा के क्षेत्र से वाबस्ता समझौते पर अमल होने से देश की सामरिक एवं रणनीतिक क्षमता में भारी वृद्धि होगी। यह समझौता भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बीच बनी सहमति के बाद सम्पन्न हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों देश मिज़ाइल निर्माण, विमानों के निर्माण और पनडुब्बी-विस्तारण में सहयोग बढ़ाएंगे।  फ्रांसीसी दिग्गज कम्पनी सफरान और भारत इलैक्ट्रानिक्स संयुक्त उद्यम के तहत भारत में ही शक्तिशाली और शत्रु के लिए ़खतरनाक हैमर मिज़ाइलों का निर्माण करेंगे। भारी-भरकम यह मिज़ाईल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है, और धरती से किसी भी ओर दूर तक मार कर सकती है। इसी समझौते के एक अहम पायदान पर दोनों देशों की थल-सेनाएं आपसी सहयोग बढ़ाने हेतु अवसरों की तलाश करेंगी।
इसी समझौते के तहत भारत में ही विश्व के एकमात्र सर्वोत्तम किस्म के हैलीकाप्टर एच-125 के निर्माण पर भी सहमति हुई है। भारी-भरकम क्षमता वाले इस हैलीकाप्टर का निर्माण फ्रांस की विमान-निर्माता कम्पनी एयरबस और भारतीय कम्पनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम मिल कर करेंगे। यह हैलीकाप्टर एक ओर जहां एक बार में 630 किलोमीटर की दूरी तक उड़ पाने में सक्षम है, वहीं यह हिमालय की चोटी पर उतरने और फिर वहां से उड़ान भरने की योग्यता भी रखता है। यह समझौता भी दोनों देशों के इन दोनों शीर्ष नेताओं के बीच सहमति से सम्पन्न हुआ है। इस परियोजना  पर तेजी से काम शुरू होने से इसके अगले वर्ष तक देश में ही बन जाने की सम्भावना है। 1400 किलोग्राम वज़नी यह उड़न खटोला 287 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। यह सात लोगों को अपने भीतर समेट कर गर्मी, सर्दी और बर्फीले, किसी भी प्रकार के मौसम में बड़ी आसानी से उड़ सकता है। इन 21 समझौतों में उच्च तकनीकी निर्माण, पुन: इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा, स्वास्थ्य क्षेत्र और दुर्लभ धातु-खोज क्षेत्र भी शामिल हैं। एक अन्य समझौता जिसे लेकर दोनों देशों में व्यापक सहमति बनी है, और जिसके सम्बन्ध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, दोनों ने स्वयं अपने बयान में ज़िक्र भी किया है, वह आतंकवाद और उसके मुकाबले हेतु उठाये जाते पगों को लेकर है। आतंकवाद आज पूरे विश्व के लिए एक बड़ा ़खतरा बन कर उभरा है, और कि भारत इस मुद्दे पर शून्य सहनशीलता की नीति पर चल रहा है। फ्रांस ने भी वैश्विक आतंकवाद को लेकर सदैव भारत की नीतियों का समर्थन किया है। विगत वर्ष ऑपरेशन सिंदूर भारत की इसी प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति करता है।
भारत और फ्रांस की मैत्री बहुत पुरानी और विश्वसनीयता की कसौटी पर बार-बार परखी गई है। वर्तमान में भी एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस को देश के सबसे पुराने रणनीतिक भागीदारों में एक करार दिया है, वहीं उन्होंने दोनों देशों के बीच मौजूद एक विशेष रिश्ते का भी ज़िक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में दुनिया अब तक के सर्वाधिक अनिश्चितता वाले माहौल में से गुज़र रही है, किन्तु हम राष्ट्रपति मैक्रों के साथ मिल कर वैश्विक स्थिरता हेतु निरन्तर कार्य करते रहेंगे। उन्होंने दोनों देशों के रिश्ते को रणनीतिक भागीदारी के धरातल पर ग्लोबल सांझेदारी तक ले जाने पर बल दिया। इसी तर्ज-ए-ब्यानी के आधार पर राष्ट्रपति मैक्रों ने भी भारत को जहां एक विश्वसनीय रणनीतिक सांझेदार करार दिया, वहीं उन्होंने यह भी कहा कि राफेल विमान का निर्माण क्षेत्र हो या पन्न-डुब्बी का संदर्भ हो, या फिर विश्व की पांचवीं पीढ़ी के विमानों के इंजन के निर्माण का मामला हो, भारत और फ्रांस एक-दूसरे के घनिष्ठ सहयोगी बन कर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि अभी कुछ ही दिन पूर्व दोनों देशों के बीच दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता सम्पन्न हुआ है। उन्होंने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत और फ्रांस की सोच एक समान होने का दावा किया। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष जुलाई में फ्रांस में अन्तरिक्ष अनुसंधान को लेकर एक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भारत को पहले से ही दावत दी गई है।
हम समझते हैं कि नि:संदेह फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का यह तीन दिवसीय भारत दौरा देश के लिए एक ओर जहां एक बड़ी उपलब्धि जैसा सिद्ध हो सकता है, वहीं देश की सामरिक और रणनीतिक क्षमता में वृद्धि का सूचक भी बनेगा। दुनिया आज जैसे बारूद के ढेर पर बैठी दिखाई दे रही है। अनेक देश एक-दूसरे के विरुद्ध युद्धों में उलझे हैं। भारत के चारों ओर भी युद्ध के बादलों का जमघट है। ऐसे में भारत जैसे विकासशील देश को अपनी सामरिक शक्ति में निरन्तर इज़ाफा करते रहना बहुत ज़रूरी है। फ्रांस यूरोपीय देशों के गठबंधन का एक बेहद अहम देश है। इसकी दोस्ती भारत के लिए यूरोप में अपनी मौजूदगी बनाये रखने को बेहद अहम हो सकती है। इमैनुएल मैक्रों के मन में भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति कैसी निष्ठा है, इसका पता नई दिल्ली पहुंचने पर उनकी गतिविधियों और भारतीयों के प्रति दर्शाये गये उनके अपनत्व भरे व्यवहार से चल जाता है। उन्होंने मुम्बई की सड़कों पर खुलेआम जॉगिंग की, और भारतीय सिने कलाकारों के साथ मैत्री-भेंट भी की। भारत और यहां के लोग उनके इस दौरे का स्वागत करते हैं, और अपनी धरती पर उन्हें खुश-आमदीद कहते हैं।

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