तेल को आग

ईरान और अमरीका-इज़रायल युद्ध को तीन सप्ताह हो गए हैं। इस समय प्रत्येक पक्ष को अरबों-खरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। दोनों पक्षों से संबंधित देशों का प्राथमिक ढांचा बड़ी सीमा तक तबाह होता जा रहा है। पिछले दिनों इज़रायल ने ईरान के सबसे बड़े गैस उत्पादन करने वाले ढांचे, जो साऊथ पारस के नाम से जाना जाता है, पर हमला किया था। यह ईरान का वह इलाका है, जहां ईरान की कुल गैस का 70 प्रतिशत उत्पादन और सप्लाई का काम होता है। भारत ईरान के इन गैस भंडारों से भी गैस और तेल मंगवाता रहा है। यहां की कम्पनियों ने इस क्षेत्र के उत्पादन को मुख्य रख कर ही ईरान के साथ अरबों डॉलरों के समझौते किए हुए हैं। भारत के लिए भी पैदा हुई यह स्थिति बेहद गम्भीर है। यह अपनी 80 प्रतिशत ऊर्जा की पूर्ति बाहर से करता है और इसलिए यह बड़ी सीमा तक ईरान और खाड़ी देशों पर निर्भर करता है। खाड़ी देशों में 90 लाख के लगभग भारतीय कारोबारी और श्रमिक काम करते हैं।
यदि बड़ी उथल-पुथल के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों को यहां वापिस आना पड़ता है तो इससे और भी गम्भीर और बड़ी समस्याएं पैदा हो जाएंगी। ईरान ने इज़रायल द्वारा इस गैस भंडार वाले क्षेत्र पर किए हमले की प्रतिक्रिया के तौर पर सऊदी अरब, कतर, कुवैत, यू.ए.ई. के साथ-साथ इज़रायल की रिफाइनरियों और गैस भंडारों को निशाना बनाया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। ऐसी स्थिति के साथ दुनिया भर में बड़ा आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। ईरान ने कतर को निशाना बनाया है। भारत 47 प्रतिशत गैस कतर से लेता है। देश में चाहे एल.एन.जी. और पैट्रोल-डीज़ल की कमी नहीं है, परन्तु पैदा हुए घरेलू गैस के संकट के साथ भारत के समक्ष बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं और इसे प्रत्येक पक्ष से जूझना पड़ सकता है। कुछ सप्ताह में ही तेल 62 डालर प्रति बैरल से एकाएक बढ़ कर 118 डालर प्रति बैरल हो चुका है। इसके साथ-साथ इन अत्यावश्यक चीज़ों की कमी से भी हर तरफ बेचैनी पैदा होने की सम्भावना बन गई है। 
चाहे दर्जन भर खाड़ी देशों ने ईरान को चेतावनी दी है, परन्तु जिस तरह का माहौल बन चुका है, उसकी उलझन में खाड़ी देश भी फंस सकते हैं, जिससे टकराव का यह दायरा और भी विशाल हो जाएगा। विगत समय में सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का यह समझौता हुआ था कि दोनों में से किसी भी देश पर हमले का दोनों देश साझे तौर पर सामना करेंगे और यदि इस समझौते के कारण पाकिस्तान भी इस युद्ध में शामिल होगा तो भारत के लिए भी यह स्थिति खतरे की घंटी वाली हो जाएगी। चाहे अमरीकी राष्ट्रपति की विदेशों में भी तथा अपने देश में भी इस कार्रवाई के कारण कड़ी आलोचना होनी शुरू हो गई है, परन्तु अमरीकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान अब सबसे बड़े हमले के लिए तैयार रहे। अमरीकी सेना ने ईरान के भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर बंकर बस्टर बम फैंके हैं और वहां के 7000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। पीट हेगसेथ के अनुसार 120 से अधिक जहाज़ों तथा बारूदी सुरंग बिछाने वाली 44 पनडुब्बियों को निशाना बनाया गया है।  
भारत ने भी इस स्थिति संबंधी अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि तेल और गैस भंडारों पर किए जा रहे हमले बेहद चिन्ताजनक हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए। इसके स्थान पर टकराव कम करने के लिए आपसी विचार-विमर्श तथा कूटनीति का सहारा लिया जाना चाहिए। नि:संदेह यदि यह युद्ध इसी तरह तेज़ होता गया तो दुनिया के लिए यह एक बहुत ही विनाशकारी एवं निराशाजनक संदेश लेकर आएगा।   
 


—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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