प्रवासी भारतीयों की समस्याएं

अब फिर कनाडा से कुछ चिन्ताजनक समाचार आ रहे हैं। कनाडा के एक प्रदेश क्यूबिक की सरकार ने बाहरी धार्मिक चिन्हों के प्रति एक कानून बनाया है। इसी प्रदेश की सरकार ने पहले वर्ष 2019 और पिछले वर्ष भी इसी तज़र् पर कानून बनाए थे, जिनमें दर्ज किया गया था कि राज्य सरकार के विभागों में कर्मचारी धार्मिक चिन्ह पहन कर काम नहीं कर सकते। यह भी कि जो ऐसे करेंगे, उनको सरकारी नौकरी से निलम्बित कर दिया जाएगा। इससे भिन्न-भिन्न धर्मों को मानने वालों के लिए वहां समस्याएं खड़ी हो गई हैं। इनमें ईसाई, यहूदी, मुसलमान और सिख भी शामिल हैं। इस संबंधी पूरे कनाडा में भारी चर्चा हो रही है। इसके साथ ही अब कनाडा सरकार ने एक नया इमीग्रेशन कानून भी पारित कर दिया है, जिससे वहां अस्थायी रूप से रह रहे लोगों की चिन्ताएं बढ़ गई हैं। 
इस कानून के तहत अब तक लगभग 30,000 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिनके सिर पर अब वहां निलम्बन की तलवार लटकने लगी है। इस नये कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को कनाडा पहुंचने के एक वर्ष के भीतर शरण लेने के लिए पत्र देना ज़रूरी कर दिया गया है। पहले कानूनों में ऐसा कुछ नहीं था। पहले किसी तरह की समय सीमा निर्धारित नहीं थी। लोग वर्षों बाद भी वहां रहने के लिए याचिका दायर कर सकते थे। अब यदि निश्चित समय में किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा ऐसा आवेदन दाखिल  नहीं किया जाता तो उस पर बिना सुनवाई कार्रवाई की जा सकती है। पहले ज्यादातर लोग वहां शरणार्थी के रूप में बसने के लिए याचिका दायर कर सकते थे। अब इसकी सम्भावना लगभग खत्म होती जा रही है। अब तक 30,000 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें लगभग 9000 पंजाबी शामिल हैं। इस समय भी पंजाब से लाखों की संख्या में युवा विद्यार्थी वीज़ा पर वहां गए हुए हैं, जिनमें पिछले कानूनों के तहत ज्यादातर वहां स्थायी नागरिक बन जाते थे, परन्तु अब ऐसा होना बेहद कठिन होगा। इस कानून को लेकर विनीपैग आदि शहरों में भारी संख्या में पंजाबी युवाओं ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। उनमें अन्य देशों से वहां पढ़ाई करने आए विद्यार्थी भी शामिल हुए हैं। कनाडा के भिन्न-भिन्न शहरों में भारी संख्या में पंजाबी स्थायी रूप से भी बसे हुए हैं। ब्रैम्पटन, सरी और कैलगरी में बड़ी पंजाबी जनसंख्या है। पिछले कुछ वर्षों से कनाडा और भारत सरकार के बीच खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियों को लेकर संबंध बिगड़े रहे हैं, जिस कारण एक बार तो दोनों सरकारों ने अपने राजनीतिक संबंध भी कम कर दिए थे। इससे दोनों देशों में व्यापारिक सम्पर्क भी बहुत सीमा तक खत्म हो गया था। उसके बाद कनाडा में मार्क कार्नी की नई सरकार आने से ये संबंध पुन: पटरी पर आ गए थे, परन्तु अभी भी कुछ मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच गम्भीर विचार-विमर्श जारी है। 
जहां तक भारत का संबंध है, मौजूदा हालात में यहां से बड़ी संख्या में युवा किसी न किसी तरह विदेशों में जाकर अपनी रोटी-रोज़ी और अच्छे जीवन के लिए बसना चाहते हैं। इनमें पंजाब के युवक बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। इसीलिए आज करोड़ों भारतीय विश्व के भिन्न-भिन्न देशों में बसे हुए हैं, जिनमें अमरीका, न्यूज़ीलैंड और कनाडा के साथ-साथ ज्यादातर सभी यूरोपियन देश भी शामिल हैं। इसी तरह अब ईरान और खाड़ी के देशों में जारी युद्ध के कारण उन देशों में बसे एक करोड़ भारतीयों का भविष्य भी बहुत अनिश्चित हो गया प्रतीत होता है।  आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक देश के अपने-अपने नियम-कानून और अपनी-अपनी जीवन-शैली है। भिन्न-भिन्न देशों की अपनी-अपनी सामाजिक और आर्थिक समस्याएं भी हैं। इस कारण इन देशों में बड़ी संख्या में रहते भारतीयों के समक्ष भी अनेक समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। ऐसे समय में भारत सरकार की ज़िम्मेदारियां बेहद बढ़ जाती हैं, जिसके लिए लगातार विश्व भर में फैले भारतीयों की स्थिति के संबंध में अवगत होना ज़रूरी  हो जाता है। आज ऐसी ही उम्मीद केन्द्र सरकार से की जाती है कि वह लगातार विश्व भर में बसे भारतीयों की सुध लेती रही और उनको दरपेश समस्याओं का हल करवाने का यत्न करे।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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