अमरीका का ‘गन कल्चर’

विगत दिनों अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर हुए हमले को दुनियाभर में बड़ी हैरानी के साथ देखा गया है। जहां तक ट्रम्प का सवाल है, उस पर पिछले 2 वर्षों में पहले भी ऐसे हमलों की कोशिश की गई थी। यह उसके साथ जुड़ी तीसरी घटना है। ट्रम्प ने बाद में यह कहा कि जो भी व्यक्ति बड़े काम करता है, उसके साथ ऐसा ही होता है और यह भी कि अमरीका के राष्ट्रपति का पद बेहद खतरनाक है। इस संबंधी जहां तक अमरीकी राष्ट्रपतियों की बात है, समय-समय उन पर भी ऐसे हमले होते रहे हैं। ऐसे ही हमलों में अब तक 4 राष्ट्रपति मारे भी जा चुके हैं। सबसे महत्वपूर्ण हमला अमरीका के बड़े प्रभाव वाले राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन पर वर्ष 1865 में हुआ था। उसके बाद जेम्स गारफील्ड, विलियम मैकिन्ले और बहुचर्तित रहे राष्ट्रपति जौहन एफ. कैनेडी पर हुआ था। ऐसे ही हमले अन्य राष्ट्रपतियों पर भी हुए हैं, जो बच निकले थे।
ट्रम्प से 45 वर्ष पहले 1981 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पर हमला हुआ था। विशेष बात यह है कि यह हमला भी इसी हिल्टन होटल में हुआ था, जिसमें ट्रम्प अपने अहलकारों और बड़ी संख्या में जुड़े पत्रकारों के साथ रात का खाना खाने वाले थे। उसके बाद गेराल्ड फोर्ड और उससे पहले रूजवेल्ट और बाद में गेराल्ड फोर्ड पर भी ऐसे हमले हुए थे। आज दुनियाभर में ‘गन कल्चर’ का बोलबाला है। जगह-जगह से लगातार गोलियां चलने के समाचार मिलते रहते हैं, परन्तु अमरीका में ‘गन कल्चर’ की हमेशा चर्चा रही है। प्रत्येक तरह की मानसिकता वाले लोग हाथों में हथियार लिए बाज़ारों में, स्कूलों में तथा कई बार समारोहों में गोलियों की बौछार करके दर्जनों निर्दोष व्यक्तियों की हत्या करते रहे हैं। अभी भी ऐसा ‘कल्चर’ जारी है। समय-समय पर अमरीकी प्रशासनों ने इस चलन को नियंत्रित करने का बड़ा यत्न भी किया, परन्तु उन्हें इसमें अधिक सफलता नहीं मिली। ट्रम्प से पहले राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी ऐसे चलन पर अंकुश लगाने के लिए कुछ कानून बनाए थे, परन्तु डोनाल्ड ट्रम्प ने आते ही ऐसे आदेशों को खत्म कर दिया। चाहे ट्रम्प पर हमले की घटना का ट्रम्प द्वारा आरम्भ की गई अंतर्राष्ट्रीय लड़ाइयों से सीधा संबंध न भी हो तो भी कम समय में ही ट्रम्प का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बेहद विवादपूर्ण बन गया है। उनके अपने देश में भी उनकी नीतियों के कारण उनकी लोकप्रियता कम होने लगी है। उनकी कार्यशैली तथा स्वभाव को लेकर अब भारी संख्या में अमरीकी अप्रसन्न दिखाई दे रहे हैं। 
यहां तक कि उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में भी उसकी नीतियों को लेकर दरारें उभर आई हैं। ऐसा माहौल सृजित करके उन्होंने विश्व भर के लिए प्रत्येक पक्ष से बड़ी मुश्किलें पैदा कर दी हैं। चाहे उन पर हुए हमले को लेकर विश्व भर के बड़े नेताओं ने इसकी अपने-अपने ढंग से आलोचना की है, परन्तु इसके साथ-साथ यह प्रभाव भी स्पष्ट दिखाई दिया है कि ट्रम्प एक सबसे शक्तिशाली देश के सबसे बड़े पद की गरिमा को कायम रखने में सफल नहीं हो सके, जिसके भयावह परिणाम आज विश्व को भुगतने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द 

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