क्या भाजपा अकाली दल पर दबाव बना रही है ?

भाजपा ने अकाली दल को हरी झंडी तो दे दी है, लेकिन तालमेल से पहले इस बात पर अडिग है कि वह बराबर सीटों पर लड़ेगी। भाजपा की यही रणनीति होती है। उसने बिहार में धीरे-धीरे करके नितीश कुमार की पार्टी को अपने बराबर पर ला दिया जबकि 2010 तक जनता दल (यू) बड़ी दल था। वह भाजपा के मुकाबले डेढ़ गुना तक ज्यादा सीटों पर लड़ता था। 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 101 और जनता दल (यू) 142 सीटों पर लड़ा था। लेकिन पिछले चुनाव में दोनों 100-100 सीटों पर लड़े। पंजाब में भी भाजपा चाहती है कि ऐसा ही बराबरी का तालमेल हो। दूसरी ओर अकाली दल की रणनीति भाजपा से दोगुना से ज्यादा सीटों पर लड़ने की है। बराबरी के तालमेल के लिए भाजपा ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने और फिर भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष ने कहा है कि भाजपा अकेले सभी 117 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि भाजपा के पंजाब प्रभारी सतीश पुनिया ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। माना जा रहा है कि जिन नेताओं को अकाली दल से सीधे बातचीत करनी है, उन्हें चुप रहने को कहा गया है और बाकी लोग दबाव बनाने के लिए बयान देंगे। हालांकि यह संभव नहीं है कि अकाली दल बराबरी पर तालमेल करे, लेकिन यह तय है कि लगातार दो चुनावों से हारता आ रहा अकाली दल पहले से कुछ ज्यादा सीटें भाजपा को देने पर सहमत हो जाएगा।
नौ करोड़ युवाओं की दुखद कहानी
अभिजीत दीपके या ‘जेन ज़ी’ यानी 15 से 29 साल की उम्र का कोई युवा यह कहानी नहीं सुना रहा है। यह कहानी खुद भारत सरकार ने सुनाई है। बड़ी दुखद कहानी है। नीति आयोग ने ताज़ा सर्वेक्षण करा कर एक दस्तावेज़ तैयार कराया है, जिसमें बताया गया है कि 15 से 29 साल के युवाओं में करीब नौ करोड़ ऐसे हैं, जो कुछ नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि 1997 से लेकर 2012 के बीच जन्म लेने वालो को ‘जेन ज़ी’ कहा जाता है। नीति आयोग के मुताबिक देश के 8.7 करोड़ युवा, जिनकी उम्र 15 से 29 साल के बीच है, वे न तो पढ़ रहे हैं, न कोई काम कर रहे हैं और न किसी कौशल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। नीति आयोग की यह रिपोर्ट वाकई चिंताजनक है। हो सकता है कि इन युवाओं के पास माता-पिता द्वारा खरीद कर दिया गया मोबाइल फोन हो, जिस पर वे रील्स देखते हो। बड़ा सवाल है कि उनका भविष्य क्या है? और क्या ‘जेन ज़ी’ तक पहुंच बनाने की जो कोशिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दूसरे भाजपा नेताओं की ओर से की जा रही है, उसके दायरे में ये युवा भी आते है? नीति आयोग ने उनके लिए जल्दी से जल्दी कोई कदम उठाने को कहा है ताकि उन्हें नौकरी या स्वरोज़गार के लिए तैयार किया जा सके, लेकिन इसकी संभावना कम दिख रही है। उलटे आने वाले दिनों में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ने का खतरा है।
रेवंत रेड्डी को क्यों रोका?
यह सही है कि मुख्यमंत्रियों को विदेश यात्रा के लिए केंद्र सरकार की मंज़ूरी लेनी होती है। भारत की विदेश नीति और घरेलू नीतियों के साथ-साथ कई और चीज़ें इसमें शामिल रहती है, लेकिन सवाल है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का कौन का कार्यक्रम भारत सरकार को पसंद नहीं आया, जिसकी वजह से उनकी अमरीका यात्रा रोक दी गई? यह भी सवाल है कि जब ब्रिटेन की यात्रा नहीं रोकी गई तो फिर उनके अमरीका जाने में क्या समस्या थी? क्या सरकार मान रही है कि इस समय अमरीका में भारत विरोधी भावना प्रबल है? रेवंत रेड्डी एक साथ ब्रिटेन और अमरीका की यात्रा पर निकले थे, लेकिन ब्रिटेन यात्रा समाप्त होने से ठीक पहले खबर आई कि भारत सरकार ने उनकी अमरीका यात्रा को मंज़ूरी नहीं दी है। जानकार सूत्रों का कहना है कि न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी से उनकी मुलाकात होनी थी और इस वजह से उनकी यात्रा को मंज़ूरी नहीं दी गई। ममदानी भारत के आंतरिक मामलों में दखल दे चुके हैं। उन्होंने जेल में बंद उमर खालिद का समर्थन किया था। हालांकि ममदानी के अलावा रेवंत रेड्डी को उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस से भी मिलना था। यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटे ट्रम्प जूनियर से मुलाकात को भी अच्छा नहीं माना जा रहा था। गौरतलब है कि सबसे बड़ा ट्रम्प टॉवर हैदराबाद में बन रहा है।
भाजपा की खामोशी
महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने का अभियान शुरू किया है। इससे पहले 2017 में राज्य सरकार एक नियम ले आई थी कि मराठी नहीं बोलने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। हालांकि अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। राज ठाकरे जैसे छोटे-मोटे नेता अपना राजनीतिक वजूद बनाए रखने के लिए मराठी भाषा के नाम पर ऑटो और टैक्सी चालकों से मारपीट किया करते थे। यह पहली बार राज्य सरकार व्यवस्थित तरीके से यह प्रयास कर रही है। पुलिस की सुरक्षा में सरकारी कर्मचारी ऑटो और टैक्सी चालकों को रोक कर मराठी का टैस्ट ले रहे हैं। सरकार की ओर से बनाए गए नियम के मुताबिक टैस्ट में फेल होने पर उन्हें एक महीने का समय दिया जाएगा। फिर भी मराठी नहीं सीख पाते हैं तो उनका डाइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की जाएगी। महाराष्ट्र में भाजपा और कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों को इस पर कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि उन्हें स्थानीय राजनीति करनी है, इसलिए सब चुप है। लेकिन भाजपा और कांग्रेस को तो पूरे देश की राजनीति करनी है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के लोग ऑटो, टैक्सी वाले हैं। उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। फिर भी भाजपा इस पर अभी चुप है।
नीचा दिखा रहा है बांग्लादेश 
बांग्लादेश के कारण भारत को बहुत शर्मिंदा होना पड़ा है। हालांकि इसमें कुछ गलती राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों की भी रही, जिन्होंने बिना पूरी पड़ताल किए ही मीडिया को विज्ञप्ति जारी कर दी। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रैस बयान में कहा गया कि रविवार, 23 अगस्त को होने वाला ‘चेंज ऑफ गार्ड’ कार्यक्रम नहीं होगा, क्योंकि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए फुल ड्रेस रिहर्सल होने वाली है। हालांकि एक घंटे के भीतर ही यह बयान वापस लेना पड़ा, क्योंकि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा तय नहीं हुई। गौरतलब है कि बांग्लादेश में जो भी नया प्रधानमंत्री बनता था, वह अपना कार्यभार संभालने के बाद सबसे पहले भारत की यात्रा करता था। लेकिन तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहले चीन चले गए। उसके बाद भी उनका प्रशासन भारत के साथ चूहे-बिल्ली का खेल खेल रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा का कार्यक्रम तय हो गया था, लेकिन बिल्कुल मौके पर उनकी सरकार ने इसे रोक दिया। कहा जा रहा कि शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश कोई मोलभाव करना चाहता है, लेकिन भारत कह चुका है यह फैसला अदालत में होगा। जो हो राष्ट्रपति भवन की शर्मिंदगी पूरे देश की है, लेकिन विदेश मंत्री से लेकर मंत्रालय के किसी अधिकारी पर इसके लिए कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।

#क्या भाजपा अकाली दल पर दबाव बना रही है ?