प्रशासनिक सख्ती का समय


प्रदेश में निरन्तर बढ़ रहे नशे के प्रयोग के विरुद्ध कार्रवाई में एक बार फिर तेजी आई है। इसका बड़ा कारण सरकार की ओर से इस संबंध में नियोजित ढंग से पुन: प्रयास करना है। भिन्न-भिन्न इलाकों से ऐसे समाचार प्राप्त हो रहे हैं। इसका पता इस बात से भी चलता है कि एक बार फिर नशा छोड़ो केन्द्रों में मरीज़ों की संख्या बढ़ने लगी है। पंजाब पुलिस की ओर से नशा तस्करों के विरुद्ध सख्ती करने से नशे के आसानी से मिलने में परेशानी उत्पन्न होने लगी है जिसके कारण नशेड़ी इन केन्द्रों का सहारा लेने लगे हैं। केवल भिन्न-भिन्न प्रकार के नशों की ही बात नहीं, अपितु नशेड़ी नशे के टीके एवं नशीली गोलियों के साथ भी नशे की लत को पूरा करने में लगे हैं। यह प्रसार इस हद तक बढ़ गया है कि इसे समेट पाना अब बहुत कठिन प्रतीत होता है। चाहे प्रदेश में हज़ारों ऐसे क्लीनिक एवं अस्पताल खुल चुके हैं, परन्तु इसके बावजूद इस धंधे पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जाना अतीव कठिन प्रतीत होता है। कुछ ज़िलों के पुलिस अधिकारियों ने अपने कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई शुरू की है ताकि तस्करों, नशेड़ियों एवं बहुत से पुलिस कर्मियों की मिली-भुगत के साथ चल रहे इस कारोबार पर अंकुश
लगाया जा सके। पंजाब सरकार ने डोप कार्यक्रम के अन्तर्गत पुन: भारी सतर्कता दिखाई है। बठिंडा में 24 वर्ष की एक लड़की की नशे के कारण हुई मौत को लेकर इस समस्या की ओर सभी की नज़रें खिंची हैं। इस नशेड़ी युवती ने पहले यह बताया था कि वह पिछले 6-7 वर्ष से चिट्टे का नशा करती आ रही है। नशों में महिलाओं के भी लिप्त हो जाने को लेकर उसने अन्य कई प्रकार के खुलासे भी किये थे। बटाला से हमारे स्टाफ रिपोर्टर की रिपोर्ट के अनुसार आज प्रदेश की हज़ारों ऐसी महिलाएं नशों में फंसी हुई हैं। वे शराब एवं सिगरेट के अतिरिक्त ़खतरनाक नशा स्मैक, हैरोइन और चिट्टे का सेवन लगातार कर रही हैं। चिंताजनक बात यह है कि कालेजों एवं स्कूलों में युवा छात्रों के अतिरिक्त बहुत-सी छात्राओं को भी यह बुरी आदत लग चुकी है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष सैकड़ों नौजवान मौत के मुंह में समा रहे हैं। पिछले दिनों इस संबंध में एक ज़िला के पुलिस कप्तान ने जो बातें कहीं, वे भी अत्याधिक ध्यान आकर्षित करती हैं। उन्होंने नशों के
संबंध में करवाये गये एक सैमीनार में बोलते हुए अपने ही विभाग की कड़ी आलोचना की तथा यह कहा कि इसकी बड़ी नैतिक ज़िम्मेदारी पुलिस पर आयद होती है तथा वह इस नैतिक ज़िम्मेदारी को स्वीकार करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भरी सभा में यह कहा कि वह दो-तीन महीने में ही इस ज़िला में से नशे का पूरी तरह से सफाया कर देंगे। उन्होंने यह चेतावनी भी दी थी कि पुलिस वर्दी में विचरण करती ‘काली भेड़ों’ को भी पूरी सज़ा दी जाएगी। हम ऐसे पुलिस अधिकारी की भावनाओं के साथ अवश्य सहमत हैं, परन्तु ऐसे मोर्चे पर सफलता तभी मिल सकती है, यदि इस हेतु सभी पक्ष एकजुट होकर कार्य करें। हमारी सूचना के अनुसार आज पुलिस तंत्र में ऊपर से लेकर निचले स्तर तक राजनीतिक दखल इस सीमा तक बढ़ चुका है, कि यदि ऐसे अधिकारी समर्पित भावना के साथ कार्य करना भी चाहें तो राजनीतिक हस्तक्षेप उनके राह में आ खड़ा होता है। यह अभियान तभी सफल हो सकता है यदि समाज एवं सरकार के सभी पक्ष ईमानदारी के साथ
एकजुट होकर इसके विरुद्ध कार्य करें। ऐसे यत्नों के साथ ही इस महामारी के संताप को घटाया जा सकता है। हम आशा करते हैं कि सरकार की ओर से इस संबंध में नई पहलकदमी हेतु लिया गया फैसला अच्छे परिणामों का धारणी हो सकता है।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द