सही मार्ग


एकलड़के ने अपनी जवानी में पैर ही रखा था कि उसको हर बात पर बहुत गुस्सा आता था। कई बार तो वह गुस्से में आकर अपने दोस्तों को पीट भी देता था। उसकी इस आदत से उसके माता-पिता दुखी रहने लगे, परंतु उनके बेटे को कैसे सबक दिया जाए? इस सोच में पड़े रहते।
एक दिन उसके पिता ने एक तरकीब सोची और अपने बेटे को अपने पास बुलाया और उसको ढेर सारी कीलें देते हुए कहा कि बेटा जब भी आपको क्रोध आए तो घर के सामने लगे पेड़ में ये कीलें ठोक दें। पहले दिन उस लड़के को जब क्रोध आया तो उसने उस पेड़ में पचास कीलें ठोंक दीं। पचास कीलें ठोकने के बाद उसका क्रोध शांत हो गया। प्रतिदिन यह प्रक्रिया करता रहा  और उसके द्वारा पेड़ में कीलें ठोंकने की गिनती कम होती गई। अंत में जब उसको क्रोध आता तो वह पेड़ में दो या तीन कीलें ठोंकता और उसका क्रोध शांत हो जाता। इस तरह करते हुए एक दिन ऐसा आ गया जिस दिन उसको क्रोध नहीं आया और उसने एक भी कील उस पेड़ में नहीं ठोंकी। वह अपने पिता के पास जाकर बोला कि पिता जी आज मैंने एक भी कील इस पेड़ में नहीं ठोंकी क्योंकि मुझे आज एक बार भी क्रोध नहीं आया। पिता बोले, अच्छा यह तो ठीक हो गया और अब आप ऐसे करो कि आपने जितनी भी कीलें इस पेड़ में ठोंकी हैं, सभी को निकाल कर लाओ। उस लड़के ने बड़ी मेहनत से सभी कीलें उस पेड़ से निकाल लीं और पिता के पास जाकर बोला, ‘पिता जी आपके कहने पर मैंने सभी कीलें निकाल दी हैं।’
पिता ने अपने इस लड़के को पकड़ा और उस पेड़ के पास जाकर बोला, ‘बेटा देखो, इस पेड़ में पहले आपने कीलें ठोंकी और अब निकाल ली हैं और अब ध्यान से देखो कि इस पेड़ में कैसे-कैसे निशान पड़ गए हैं। यह पहले जैसा खूबसूरत नहीं रहा।’ लड़का बोला, यह तो है इस पेड़ में काफी निशान पड़ गए हैं। पिता ने अपने लड़के को बताया बेटा ज़रा सोचो जब आप क्रोध में आते थे, तो लोगों को बुरा-भला कहते थे उनके मन में भी इस तरह के निशान पड़ जाते थे, जैसे इस पेड़ में निशान पड़े हुए हैं। अब कुछ भी नहीं हो सकता। कभी भी ऐसा काम न करो जिससे आपको बाद में पछताना पड़े। यह देखकर वह लड़का अपने पिता के गले लगकर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा और बोला पिता जी मेरे से बहुत बड़ी गलती हो गई। आज के बाद में ऐसा कभी भी नहीं करूंगा। इसलिए बच्चो, इस तरह इस लड़के को सही मार्ग मिला।