इस बार 50 हज़ार हैक्टेयर में सरसों व तेल बीज फसलों की काश्त का लक्ष्य 


वरसोला, 13 अक्तूबर (वरिन्द्र सहोता): कृषि विभाग द्वारा इस सीज़न दौरान 50 हज़ार हैक्टेयर रकबे में सरसाें व तेल बीज फसलों की काश्त करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि गत वर्ष 30.5 हज़ार हैक्टेयर रकबे में तेल बीज फसलों की काश्त हुई थी। कृषि विभाग द्वारा इस कदम को कृषि विभिन्नता से जोड़ कर देखा जा रहा है। यही कारण है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए डायरैक्टर कृषि व किसान भलाई विभाग द्वारा कृषि अधिकारियों को आदेश जारी करते हुए इस लक्ष्य से भी ज्यादा रकबे में सरसों व तेल बीज फसलों की काश्त करवाने के लिए प्रयास करने हेतु कहा गया है। इसके लिए बकाया तौर पर रकबे की बांट करके सूची भी संबंधित ज़िलों को भेज दी गई है। इन आदेशों की पालना करते हुए संबंधित कृषि अधिकारियों द्वारा किसानों को सरसों व तेल बीज की फसलें लगाने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया गया है, परन्तु मंडीकरण की समस्या व भाव कम होने की समस्या को सामने रखते हुए किसानों द्वारा इस प्रति नकारात्मक समर्थन नहीं भरा जा रहा। कई किसान सरसों की गेहूं के साथ तुलना के मुकाबले सरसों को कम आमदन वाली फसल बता रहे हैं।
कनोला सरसों प्रति बढ़ा रूझान
दूसरी ओर इस संबंधी यह बात उभर कर सामने आई है कि बेशक इस बार ज्यादातर किसान सरसों की जी.एस.सी.-7 व पी.ए.सी. 401 किस्म ही बिजाई कर रहे हैं, परन्तु दिन प्रति दिन बढ़ रही बीमारियों व खास करके दिल के रोगों को ध्यान में रखते हुए किसानों में कनोला सरसों की काश्त करने प्रति रूझान बढ़िया है। इसलिए किसान घरेलू प्रयोग के लिए तेल के लिए राइया आर.एल.सी.-3, गोभी सरसों में जी.एस.सी.-6, जी.एस.सी.-7 व हाइयोला पी.ए.सी.-401 कनोला किस्मों की काश्त करने प्रति ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, परन्तु यह भी सिर्फ अपने के लिए ही बहुत कम रकबे में यह किस्मों की काश्त कर रहे हैं। इस संबंधी कृषि विशेषज्ञ डा. अमरीक सिंह ने कहा कि  कनोला सरसों के तेल में 2 फीसदी से कम इरूसिक एसिड होता है, जबकि ज्यादा इरूसिक एसिड वाले तेल से नाड़ें मोटी हो जाती हैं व इसके साथ और बीमारियों के अलावा दिल के रोगों का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।