पंजाब में भू-जल स्तर घटा, स्थिति चिंताजनक बनी


पटियाला, 19 जनवरी (अ.स.) : भारत की हरी क्रांति लहर में कीमती योगदान डालने वाले पंजाब की धरती में से लगातार पानी निकाले जाने कारण पिछले 4 दशकों से राज्य का धरती निचले पानी का स्तर चिंताजनक स्तर तक कम गया है। सरकारी आंकड़ों से अनुसार पंजाब के 138 ब्लाकों में से 109 ब्लाकों का धरती निचला पानी बहुतायत में निकाले जाने कारण इन ब्लाकों को ज़्यादा शोषण (ज़रूरत से कहीं ज़्यादा पानी निकालने वाले ब्लाक) वाले ऐलान दिया गया है। जबकि राज्य के बचे 2 ब्लाक नाजुक, 5 ब्लाक अर्ध नाजुक और 22 ब्लाकों में धरती निचला पानी सुरक्षित पाया गया है। यह आंकडा वर्ष 1984 में 118 में से 53 ब्लाकों के पानी के स्तर को डार्क जोन ऐलान दिया गया था। धरती निचला पानी घटने पीछे अलग-अलग माहिर कई कारण मानते हैं। पहला राज्य में धान की फसल की काश्त निचला क्षेत्रफल बढ़ना और पंजाब पिछले 37 वर्षों के समय दौरान ट्यूबवैलों की संख्या दुगनी से भी ज़्यादा हो जाना। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1980 में पंजाब 6 लाख से अधिक ट्यूबवैल थे। जबकि यह संख्या वर्ष 2017 -18 दौरान 14 लाख 76 हज़ार पहुंच गया था। दूसरा राज्य सरकार की तरफ से फसली भिन्नतावों का फार्मूला ज्यादतर किसानों की तरफ से अपनाए न जाने कारण किसान धान की फसल की ही काश्त करते हैं। तीसरा पंजाब के कुछ इलाकों में ज़मीन की सिंचाई के लिए नहरी और दरियाओं के पानी की पहुंच है। जबकि ज़्यादातर भूमि की सिंचाई ट्यूबवैलों पर ही निर्भर है। चौथा भारत और पंजाब में अलग-अलग समय की सरकार की तरफ से किसानों को रवायती फसलों को छोड़ कर ओर फसलों की तरफ आकर्षित करने वाली नीतियां बनाने में असफल रही है। पांचवा राज्य में धरती निचले पानी को दोबारा भरने के लिए रिचार्ज कुएं की कमी होना संबंधी भी माहिरों का कहना है। दूसरे तरफ अलग-अलग किसानों ने इस संबंधी बताया कि पंजाब के धरती निचला पानी का स्तर घटने के पीछे किसान ज़िम्मेवार नहीं हैं, वह तो केवल वर्ष के तीन महीने ही धान की फसल पालन के लिए पानी का अधिक प्रयोग करते हैं। जबकि उद्योगपति और फैक्टरियां पूरा वर्ष पानी का प्रयोग करती हैं। ज़मींदारों का कहना था कि अगर सरकार ओर फसलों का मंडीकरन करे जिससे उनको धान की फसल जितनी आमदन हो तो वह धान की फसल क्यों लगाने? वह धान की फसल छोड़ने को तैयार हैं यदि सरकार उन्हें ओर फसलों के द्वारा उनकी आमदन यकीनी बनाए।