बच्चों के होमवर्क को बोझ न समझें
मैं अपने बेटे को होमवर्क कैसे कराऊं? हर रात मुझे टीवी बंद करने और उसे होमवर्क करवाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। होमवर्क से बच्चा सीखता है और पैरेंट्स का जुड़ाव बच्चे की शिक्षा से होता है। बच्चों के होमवर्क में पैरेंट्स के रुचि लेने से बच्चे का उत्साह बढ़ता है। और वे हंसी-खुशी इस काम को करते हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि पैरेंट्स को बच्चों के होमवर्क को बोझ नहीं समझना चाहिए। होमवर्क से बच्चे में अच्छी आदतों का विकास होता है। टीचर से मिला अच्छा रिमार्क बच्चों को और अच्छा करने के लिए प्रेरित करता है। होमवर्क करवाते समय यह हमेशा ध्यान रखें कि उसके होमवर्क के टाइम न तो आप कोई और काम करें और न ही बच्चों को करने दें।
रेखा की बेटी स्मृति पांचवीं क्लास में है। रेखा कहती हैं कि मैं अपनी बेटी का होमवर्क हमेशा खुद करवाती हूं, क्योंकि मैं जानती हूं कि मेरी बेटी को मेरी मदद से होमवर्क करना अच्छा लगता है। आखिर उसे पता चलता है कि उसकी मां को उसके होमवर्क में कितनी दिलचस्पी हैं। पैरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों के होमवर्क के लिए शेड्यूल बनाकर रखें और उसी दौरान उन्हें पढ़ाएं। हालांकि जब बच्चा थोड़ा बड़ा, यानी नौवीं या उससे बड़ी क्लास में हो, तो आप उसे रात को भी पढ़ा सकती हैं।
बच्चों को जिस कमरे में होमवर्क करवाएं, वहां रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। आखिर उसकी आंखों का ख्याला भी तो आपको ही रखना है। उस समय घर में शोर बिल्कुल न होने दें। टीवी बंद कर दें, तो फोन भी अटेंड न करें। अगर आपका संयुक्त परिवार है, तो घर के सदस्यों को बच्चे के होमवर्क के टाइम किसी तरह का शोर-शराबा करने से रोकें। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चा जितना शांत माहौल में पढ़ेगा, उसे उतनी जल्दी याद होगा और होमवर्क भी उतनी जल्दी ही पूरा हो जायेगा। यह भी ध्यान रखें कि बच्चे के होमवर्क से जुड़ी सारी चीजें मसलन पेन, पेंसिल, रबड़, डिक्शनी, शार्पनर, ज्योमेट्री बॉक्स आदि एक जगह पर हों, यानी आपको समय बर्बाद न करना पड़े। आखिर आपके बच्चे का एक-एक मिनट कीमती है। (सुमन सागर)



