चर्चा में है बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा
हरियाणा में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पिछले काफी दिनों से सद्भाव यात्रा निकाल रहे हैं। बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा आजकल प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस यात्रा से राज्य के कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने शुरू से ही दूरी बनाई हुई है। बृजेंद्र सिंह को इससे कोई फर्क नही पड़ रहा और उनकी यात्रा जारी है और प्रदेश के आधे से ज्यादा विधानसभा क्षेत्र वे कवर कर चुके हैं। राज्य के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों से होकर उनकी यह यात्रा गुजरेगी। सद्भाव यात्रा के बहाने वे न केवल पूरे राज्य को कवर करेंगे बल्कि इस दौरान हर चुनाव क्षेत्र में अपने समर्थक भी खड़े कर लेंगे। बृजेंद्र सिंह की यात्रा को सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा और राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला का साथ जरूर मिला है। उनके पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बिरेंद्र सिंह भी उत्साह बढ़ाने के लिए पूर्व सांसद के साथ हैं। बृजेंद्र सिंह की माता प्रेमलत्ता भी विधायक रह चुकी हैं।
कांग्रेस में मजबूती से अपनी राह बनाने के मकसद से बृजेंद्र सिंह ने सद्भाव यात्रा शुरू की है। इस यात्रा को भले ही हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं से खुलकर समर्थन नहीं मिल रहा हो, लेकिन पार्टी नेतृत्व का आशीर्वाद तो उन्हें हासिल है। माना जा सकता है कि कांग्रेस नेतृत्व भविष्य में उनको कोई बड़ी जिम्मेदारी देने की सोच सकता है। बृजेंद्र सिंह आईएएस अधिकारी रहे हैं और आईएएस से इस्तीफा देकर उन्होंने भाजपा टिकट पर हिसार से लोकसभा चुनाव लड़ा था और वे 2019 में हिसार से सांसद बने थे। वह इकलौते ऐसे भाजपा सांसद थे जो सांसद रहते हुए अपने सांसद पद से व भाजपा से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हुए थे। 2024 में कांग्रेस ने बृजेंद्र को टिकट नहीं दिया लेकिन वे कांग्रेस के साथ सक्रियता से जुड़े रहे और विधानसभा चुनाव भी कांग्रेस टिकट पर लड़ा था। उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बृजेंद्र सिंह ने उचाना कलां क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन भीतरघात के चलते मात्र 32 वोटों से चुनाव हार गए। इस मामले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और मामला अभी लंबित है।
इनेलो में वापसी
इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला पार्टी की खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए न सिर्फ लगातार प्रयासरत हैं बल्कि इनेलो छोड़कर गए पुराने नेताओं को धीरे-धीरे साथ जोड़ने में भी लगे हुए हैं। हरियाणा के पूर्व वित्तमंत्री व पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रो. संपत सिंह और पूर्व खेल मंत्री एवं पूर्व डिप्टी स्पीकर डॉ. वासुदेव शर्मा को पार्टी में शामिल करने के बाद पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा भी इनेलो में शामिल हो गए हैं। प्रो. संपत सिंह किसी समय में चौधरी देवीलाल और चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के सबसे भरोसेमंद साथियों के तौर पर जाने जाते थे। उसके बाद वे इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस के बाद वे फिर भाजपा में चले गए और भाजपा से वापस कांग्रेस से होते हुए अब इनेलो में शामिल हो गए हैं। डॉ. वासुदेव शर्मा भिवानी क्षेत्र के प्रमुख राजनेता हैं और ब्राह्मण समाज में उनके परिवार की बहुत भारी प्रतिष्ठा है। अब इनेलो में शामिल हुए पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा आबकारी एवं काराधान विभाग में अधिकारी रहे हैं और उनके भाई कैलाश शर्मा भी एक बार विधायक रहने के अलावा चौटाला सरकार में राजस्व राज्यमंत्री रह चुके हैं। राधेश्याम शर्मा और कैलाश शर्मा का नांगल चौधरी इलाके में अच्छा खासा प्रभाव है और इनके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा भी बेहद प्रभावशाली रही है। इनेलो नेताओं का दावा है कि आने वाले समय में अभय चौटाला प्रदेश के कुछ अन्य प्रमुख नेताओं व इनेलो के पूर्व साथियों को साथ जोड़ने के अभियान में लगे हुए हैं। वे इस मामले में कहां तक सफल होते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इनेलो नेता प्रदेश में अपनी खोई राजनीतिक जमीन हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
कौन जाएगा राज्यसभा
हरियाणा से खाली हो रही राज्यसभा सीट पाने के लिए भाजपा और कांग्रेस के अनेक नेता अपने-अपने प्रयासों में जुटे हुए हैं। बंसीलाल की पुत्रवधु किरण चौधरी और भाजपा पिछड़े वर्ग के नेता रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल इसी अप्रैल के शुरू में ही पूरा होने पर हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटें खाली होने जा रही हैं। यह दोनों राज्यसभा सांसद भाजपा से संबंधित हैं। मौजूदा हरियाणा विधानसभा में संख्याबल को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट मिलने के आसार हैं। इस समय हरियाणा विधानसभा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं और 3 निर्दलीय विधायक भी भाजपा के साथ हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और दो विधायक इनेलो से संबंधित हैं। भाजपा की ओर से टिकट पाने के लिए श्रीमति किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मोहनलाल बड़ोली, पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु भी राज्यसभा सीट के लिए प्रबल दावेदार हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से किसी बड़े केंद्रीय नेता को हरियाणा से राज्यसभा सांसद बनाया जा सकता है। कांग्रेस की ओर से जिन प्रमुख नेताओं के नाम राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर चर्चा में हैं, उनमें मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा का नाम भी शामिल है।
कांग्रेस अगर हरियाणा के किसी नेता को राज्यसभा में भेजने का निर्णय लेती है तो उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह, उनके बेटे व पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह, प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष उदयभान के नाम भी चर्चा में हैं। हरियाणा के राज्यसभा उम्मीदवार के लिए कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा, इसको लेकर तरह-तरह की अटकलें चल रही हैं। वैसे कांग्रेस जिस किसी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाएगी, वह निश्चित तौर पर नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की पसंद का होगा। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के जितने विधायक हैं, उनमें से ज्यादातर भूपेंद्र हुड्डा के समर्थक हैं। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान हुड्डा की सलाह से ही राज्यसभा उम्मीदवार तय करेगी और उस उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी भूपेंद्र हुड्डा को ही सौंपेंगी। इसी के चलते माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान इस बार हरियाणा से बाहर के किसी कांगे्रसी नेता पर दाव लगा सकती है।
हमेशा चौंकाती है भाजपा
भाजपा हमेशा ही अपने उम्मीदवार का चयन करते समय राजनीति के जानकारों को चौंकाती रही है। इस बार भी ऐसा ही हो सकता है। भाजपा किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा में से किस को फिर से राज्यसभा में जाने का मौका देगी, अभी कुछ साफ नही है। वैसे किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी प्रदेश की नायब सिंह सैनी सरकार में सिंचाई मंत्री हैं। किरण चौधरी और श्रुति चौधरी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बंसीलाल की राजनीतिक विरास्त को संभाल रही हैं। किरण चौधरी दिल्ली विधानसभा में डिप्टी स्पीकर रहने के अलावा हरियाणा में भूपेंद्र हुड्डा की सरकार में कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस विधायक दल की नेता रह चुकी हैं। बंसीलाल हरियाणा के चार बार मुख्यमंत्री और केंद्र में रक्षा मंत्री व रेल मंत्री भी रहे। बंसीलाल के बेटे व किरण चौधरी के पति चौधरी सुरेंद्र सिंह भी हरियाणा से सांसद और मंत्री रहे थे। श्रुति चौधरी भी भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी है। इस बार 2024 में कांग्रेस ने श्रुति चौधरी को लोकसभा का टिकट नहीं दिया और लोकसभा चुनाव के बाद किरण चौधरी व श्रुति चौधरी कांगे्रस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा ने जहां दीपेंद्र हुड्डा द्वारा खाली की गई राज्यसभा सीट से किरण चौधरी को सांसद बना दिया, वहीं उनकी बेटी श्रुति को तोशाम से विधानसभा टिकट दी गई और चुनाव जीतने के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। अब राज्यसभा चुनाव के काफी रोचक समीकरण बन रहे हैं। -मो.-9855465946



