विश्व कप में पाकिस्तान पर भारत की शानदार जीत

विश्व कप में भारत बनाम पाकिस्तान का एक और मैच, भारत की एक और जीत। इस बार (ई)शान से। कोलम्बो में टी-20 विश्व कप का मैच इतना अधिक एकतरफा था कि पाकिस्तान के लचर प्रदर्शन को देखते हुए मेरे एक दोस्त ने व्यंग्य किया कि मैन इन ग्रीन के लिए बायकाट ही बेहतर विकल्प था लेकिन पूर्णत: कमर्शियल हो चुके क्रिकेट में पैसे का जादू इतना सिर चढ़कर बोलता है कि पाकिस्तान ने भारत के विरुद्ध अपने ग्रुप मैच को बायकाट करने की ज़िद (जो बेवकूफी के अतिरिक्त कुछ न थी) छोड़ी और 15 फरवरी 2026 के शाम को मैदान में उतरा। बहरहाल, इस मैच के हीरो रहे ईशान किशन जो 6 माह पहले, जब भारत ने एशिया कप जीता था, तो वह विश्व कप के लिए तैयार की जा रही टीम की योजना में भी न थे। लेकिन सैय्यद मुश्ताक अली ट्राफी में झारखंड के लिए अपने शानदार प्रदर्शन (और शुभमन गिल के टी-20 में खराब फॉर्म) के चलते 27 वर्षीय ईशान किशन को लगभग दो साल बाद राष्ट्रीय टीम में अवसर मिला और अब वह देश के हीरो बनकर उभरे हैं। 
ईशान किशन ने रविवार को अपनी विस्फोटक व साहसिक पारी से दिखाया कि धीमे व स्पिन लेते विकेट पर किस तरह से बल्लेबाज़ी की जाती है। उनकी 40 गेंदों में 77 रन की पारी की बदौलत भारत ने अपने निर्धारित 20 ओवर में 175 रन बनाये और फिर जब पाकिस्तान खेलने के लिए उतरा, तो जसप्रीत बुमराह ने अपने पहले ही ओवर में दो विकेट चटकाकर मुकाबले को नो-कांटेस्ट (मुकाबला नहीं) बना दिया। बाकी कसर हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल व वरुण चक्रवर्ती ने 2-2 विकेट लेकर पूरी कर दी। पाकिस्तान 18 ओवर में मात्र 114 रन पर सिमट गया और भारत को 61 रन से शानदार व प्रभावी जीत मिली। इस मैच में भारत के दबदबे का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि बुमराह, कुलदीप, वरुण व पांड्या को अपने-अपने निर्धारित 4 ओवर फेंकने की भी ज़रूरत नहीं पड़ी और ज़ख्म पर नमक छिड़कते हुए कप्तान सूर्य कुमार यादव ने अपने बैटर्स तिलक वर्मा व रिंकू सिंह से गेंदबाज़ी करायी, जिसकी वजह से पाकिस्तान 100 रन से ऊपर बना सका, वर्ना उसके 9 विकेट तो मात्र 97 रन पर गिर चुके थे। 
वैसे इस मैच को दो विशेष कारणों से याद रखा जायेगा। एक, ईशान किशन की कठिन पिच पर शानदार व स्मार्ट बल्लेबाज़ी, जिससे मैच एकतरफा हो गया। हालांकि भारत ने अभिषेक शर्मा (जो पिछली छह पारियों में रिकॉर्ड चार बार शून्य पर आउट हो चुके हैं, जिनमें से 3 गोल्डन डक हैं) को जल्दी खो दिया था, लेकिन इससे विचलित हुए बिना ईशान किशन ने शाहीन शाह आफरीदी के दूसरे ओवर में दो छक्के लगाये और फिर उन्होंने स्पिनर्स पर हमला बोला। अबरार अहमद व शादाब खान की समझ में नहीं आ रहा था कि वह ईशान किशन को किस जगह गेंद करें, क्योंकि वह ज़बरदस्त पॉवर से अपने स्ट्रोक्स लगा रहे थे, जबकि पिच में पेस था ही नहीं। ईशान किशन ने तिलक वर्मा के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 87 रन जोड़े, जोकि टी-20 में पाकिस्तान के खिलाफ नया भारतीय रिकॉर्ड है। इस विकेट के लिए पिछला रिकॉर्ड वीरेंद्र सहवाग व विराट कोहली के नाम था, जिन्होंने 30 सितम्बर 2012 को कोलम्बो में ही 74 रन की साझेदारी की थी। यहां यह बताना आवश्यक है कि ईशान किशन ने अपनी पिछली छह पारियों में 60.83 की औसत से 365 रन बनाये हैं, जिनमें एक शतक व तीन अर्द्धशतक शामिल हैं और उनका स्ट्राइक रेट 217.26 रहा है। सूर्य कुमार यादव के अनुसार, ‘शून्य पर पहला विकेट खोने के बाद किसी को तो ज़िम्मेदारी लेनी थी और जिस प्रकार ईशान किशन ने इस ज़िम्मेदारी को समझा वह ़गज़ब है। इस विकेट पर 155 का स्कोर संघर्षमय हो सकता था, लेकिन हमने उससे 20 रन ऊपर बनाकर मैच को उनकी पहुंच से दूर कर दिया। यह देखकर अच्छा लगा कि गेंद से हर किसी ने योगदान दिया। अब हम वापस जाकर थोड़ा मज़ा करेंगे और फिर अगले मैच के बारे में सोचेंगे।’ 
अनुमान यह है कि भारत-पाकिस्तान के इस मैच ने लगभग 250 मिलियन डॉलर का राजस्व एकत्र किया। यह बहुत अधिक पैसा है, लेकिन क्रिकेट के वैश्विक स्वास्थ्य के संदर्भ में अत्यधिक गुमराह करने वाला आंकड़ा है। इस समय टी-20 विश्व कप में जो 20 टीमें खेल रही हैं उनमें से कुछ तो अगली आईसीसी प्रतिस्पर्धा से पहले ‘फुल मेम्बर’ के विरुद्ध शायद ही कोई मैच खेल सकें। कुलीन चक्र के बाहर अर्थपूर्ण एक्सपोज़र दुर्लभ है। वेस्टइंडीज, जो दो बार टी-20 चैंपियन रह चुका है, में क्रिकेट चिंताजनक पतन की ओर है। जहां फीफा दुनियाभर में फुटबॉल विकसित करने के लिए ज़बरदस्त निवेश करता है, वहीं आईसीसी का राजस्व वितरण तीन बड़ी टीमों में ही अधिक हो जाता है। ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी बहुत पहले हो जानी चाहिए थी- 2028 लॉस एंजेल्स गेम्स लेकिन ऐसा इसलिए नहीं हुआ; क्योंकि आईसीसी अपने विशिष्ट कैलेंडर में संशोधन करने के लिए तैयार नहीं था। 
बहरहाल, कैमरा के सामने भारत-पाकिस्तान के संबंध मैदान पर वहीं रहे जहां उन्हें रहना था। खिलाड़ियों ने आपस में हाथ नहीं मिलाये। लेकिन वह ‘दुश्मनी’ (या बदतमीज़ी) भी देखने को नहीं मिली, जो पिछले साल सितम्बर में एशिया कप के फाइनल में देखने को मिली थी। कोई किसी पर बेहूदा व्यंग्य नहीं कर रहा था और भारत के टेलिविज़न समीक्षकों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को इंटरव्यू किया। मैच खेल भावना के साथ खेला गया। वह हरकतें नहीं हुईं जिनसे क्रिकेट संसार ज़हरीला हो गया था। उस्मान तारिक जब वार्मअप कर रहे थे, तो उनके एक्शन के सबसे बड़े आलोचक हरभजन सिंह पास में ही खड़े थे। उस्मान ने वरिष्ठ खिलाड़ी को ‘सलाम’ किया और हरभजन ने भी शालीनता से उसे स्वीकार करते हुए जवाब दिया।          -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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