निडर होते साईबर अपराधी

देश में नये-नये और नायाब तरीकों से साईबर धोखाधड़ी के ज़रिये बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने समाज, राजनीति और प्रशासनिक धरातल पर गम्भीर चिन्ताजनक स्थिति पैदा कर दी है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि देश में पिछले पांच वर्ष में डिजिटल अपराधों के ज़रिये देश के जन-साधारण के 52,976 करोड़ रुपये साईबर अपराधियों ने लूट लिये हैं। लगभग एक दशक पहले तक देश में साइबर अपराध जैसी कोई इक्का-दुक्का घटना ही घटित होती थी, किन्तु विगत पांच-सात वर्षों में देश में उपजी कथित डिजीटल क्रांति के बाद से ऐसी घटनाएं जैसे पंछी-पंख लगा कर फैलती गई हैं। वर्ष 2023 से लेकर अब तक के तीन वर्षों में 86 हज़ार से अधिक मामले दर्ज किये गये जिनमें अरबों रुपये की जन-धन राशि साईबर जालसाज़ी के माध्यम से लूट ली गई है। 
साईबर अपराधी इतने शातिर होते हैं कि एक विफलता के बाद दूसरा विकल्प ढूंढ लेते हैं। साईबर अपराध जैसी एक घटना से एक बार रू-ब-रू हुई एक महिला उच्चाधिकारी के अनुसार विदेशों में भी ऐसे आपराधिक तत्व मौजूद हैं। उन्होंने एक घटना का हवाला देते हुए बताया कि कैसे टैक्सी चालक कृत्रिम मेधा यानि ए.आई. के ज़रिये शक्ल-ओ-सूरत बदल कर सवारी को अपना शिकार बनाते हैं। उन्होंने अपनी आंखों के समक्ष घटित हुई ऐसी एक घटना का हवाला भी दिया। ऐसे अपराधों से लुटे-पिटे लोगों में से कई अपनी जीवन भर की अर्जित पूंजी तो गंवाते ही हैं, कई बार वे आत्महत्या कर लेने को भी विवश हो जाते हैं। डिजीटली अरेस्ट के ज़रिये लूटने की घटनाएं बेशक अब आम हो चुकी हैं। इनको लेकर समाचार पत्रों के माध्यम से बार-बार लोगों को जागरूक भी किया जाता है किन्तु इसके बावजूद लोग इनका शिकार बन जाते हैं। अचानक धन हासिल होने अथवा अवैध कृत्यों से फोन-सम्पर्क होने के आरोप लगा कर साईबर धोखाधड़ी करने के  मामले भी आम हो चुके हैं। देश की राजधानी दिल्ली के बाद हरियाणा ऐसी घटनाओं के लिए जैसे बड़ी ज़रखेज़ भूमि बन कर उभरा है। हरियाणा में विगत छह वर्षों से साईबर ठगी के मामले निरन्तर बढ़ते चले गये हैं। पंजाब में भी एक समय ऐसे मामलों की बाढ़-सी आ गई प्रतीत हुई थी, किन्तु विगत दो-तीन वर्षों से प्रदेश में ऐसे मामलों की वृद्धि पर अंकुश लगा है।
देश भर में ऐसे अपराधों की निरन्तर बढ़ती संख्या को देखते हुए केन्द्र सरकार, प्रदेश सरकार और उनके प्रशासन तंत्रों की ओर से चलाये गये सुरक्षा एवं जागरूकता अभियान के दृष्टिगत आज ऐसे मामलों में अपेक्षाकृत कमी आते महसूस की गई है। पंजाब में भी प्रदेश सरकार, बैंकों, पुलिस तंत्र और प्रशासनिक इकाई की ओर से चलाये गये ज़बरदस्त सतर्कता अभियान एवं इससे उपजी जागरूकता के दृष्टिगत लोगों में समझदारी का दायरा बढ़ा है। इस कारण जन-साधारण अब ऐसे मामलों से कन्नी कतराने लगे हैं। तथापि साईबर अपराधी ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ की तर्ज पर नये-नये तरीके ईजाद कर नई घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। इस हेतु उन्होंने बाकायदा नये-नये जाल बिछा रखे हैं। अपने तंत्र को बनाये रखने के लिए वे मोबाइल और सोशल मीडिया के ज़रिये बेरोज़गार और नव-शिक्षित हुए युवकों को लालच देकर अपने नेटवर्क में भर्ती करते हैं। 
इस प्रकार के बढ़ते चलन के बाद नि:संदेह सरकारी गुप्तचर एजेंसियों के तंत्र भी सक्रिय हुए हैं, और लाखों शिकायतों की त्वरित जांच के बाद 7130 करोड़ रुपये की राशि पीड़ित लोगों को लौटाई भी गई है। ज़रा-सा संदेह होने पर बैंकों एवं प्रशासनिक तंत्र के अधिकारी स्वयं भी लोगों को सतर्क करने लगे हैं। साईबर अपराधों का तंत्र इतना व्यापक है कि गुप्तचर एजेंसियां भी कई बार आश्चर्यचकित रह जाती हैं। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार स्वत: संज्ञान लेते हुए केन्द्र सरकार को एन.आई.ए., सी.बी.आई. और साईबर क्राइम तालमेल कमेटियों के सदस्यों पर आधारित समन्वय समितियां बनाने को भी प्रेरित किया है।
हम समझते हैं कि ऐसे अपराधों से बचने हेतु सर्वाधिक ज़िम्मेदारी स्वयं जन-साधारण पर भी आयद होती है। लोगों को ऐसे मामलों से बचने के लिए लालच में नहीं आना चाहिए, न ही भयभीत होकर आत्म-समर्पण करना चाहिए। ज़रा-सा संदेह होने पर अपने पारिवारिक सदस्यों, परिचितों, बैंक अथवा पुलिस अधिकारियों से तत्काल सम्पर्क करना चाहिए। हम समझते हैं कि थोड़े-से अतिरिक्त साहस, चौकसी, सतर्कता और सूझ-बूझ के साथ ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है, अथवा इनकी तादाद को कम किया जा सकता है। मोबाइल कम्पनियों का अपना गुप्तचर सेवा तंत्र भी ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने हेतु कारगर तरीका साबित हो सकता है।

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