जत्थेदार रघबीर सिंह के आरोपों को लेकर पंजाब की राजनीति में गर्मा-गर्मी बढ़ी

इस समय सबसे अधिक चर्चित विषय श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार तथा श्री दरबार साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह की प्रैस कांफ्रैंस है। चाहे उनकी  ओर से लगाए गए ज़्यादातर आरोप चाहे पहले ही लोगों के बीच (पब्लिक डोमेन) हैं, परन्तु इन्हें एक पूर्व जत्थेदार द्वारा दोहराना भी विशेष महत्व रखता है। उनकी प्रैस कांफ्रैंस के बाद शिरोमणि कमेटी के विरोधियों तथा समर्थकों के बीच तीव्र विवाद शुरू हो गया है। इस मुद्दे को लेकर अकाली दल (बादल) के नेतृत्व को भी निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर शिरोमणि कमेटी तथा अकाली दल (बादल) के नेता जत्थेदार रघबीर सिंह के आरोपों के पीछे राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी का हाथ होने के आरोप लगा रहे हैं। आरोप है कि आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत पंथक संस्थाओं तथा अकाली दल को बदनाम करने के लिए यह प्रैस कांफ्रैंस करवाई गई है। 
इस बारे में शिरोमणि कमेटी की अंतरिंग कमेटी ने कार्रवाई करते हुए जत्थेदार रघबीर सिंह की सेवाएं खत्म कर दी हैं और उन्हें 72 घंटों में आरोपों संबंधी सुबूत देने को कहा है। इस मुद्दे बारे विस्तार में चर्चा किसी अन्य कालम में करेंगे, परन्तु जो जत्थेदार रघबीर सिंह ने सरबत खालसा बुलाने की बात कही है, आज के हालात में प्राचीन समय में बुलाए जाते सरबत खालसा की तरह ऐसा इ्कट्ठ बुलाया जाना सम्भव नहीं प्रीतत होता। हां, सिखों को एक ऐसी संस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनाने की ज़रूरत है, जो विश्व भर के सिखों के सभी मामलों पर वर्ष में एक-दो बार मिल बैठ कर या आनलाइन विचार-विमर्श करे तथा उन्हें कोई दिशा दे सके। ऐसी कोई संस्था या इंस्टीच्यूशन बनाने के लिए विश्व भर की प्रमुख सिख संस्थाओं के प्रतिनिधियों का इकट्ठ करके ही कोई फैसला लिया जा सकता है। परन्तु इस समय तो हालत यह है कि कौम को अपने रहबरों से ही अधिक खतरा है। हबीब जालिब के शब्दों में :
वतन को कुछ नहीं ़खतरा निज़ाम-ए-ज़र है ़खतरे में,
ह़क़ीकत में जो राहजन है वही रहबर है ़खतरे में।
हरियाणा से सिख सांसद?
16 मार्च को हरियाणा से दो राज्यसभा सदस्य चुने जाने हैं। विधायकों की संख्या के अनुसार एक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 वोट चाहिएं। भाजपा के पास अपने 48 विधायक हैं और कांग्रेस के पास अपने 37 विधायक हैं, परन्तु हरियाणा में राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग होती रही है। इस बार भी चर्चा है कि भाजपा कांग्रेस से क्रास वोटिंग करवाने के यत्न में है।  परन्तु यह चुनाव की रणनीति अपनी जगह, हमें सुनाई दीं ‘सरगोशियों’ से यह प्रभाव बन रहा है कि भाजपा इस बार हरियाणा से किसी पंजाबी को राज्यसभा में भेज सकती है। चाहे पंजाब के 2027 के चुनाव के लिए भाजपा की कमान प्रत्यक्ष रूप में गृह मंत्री अमित शाह के पास है, परन्तु उनकी रणनीति लागू करने का काम हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कर रहे हैं। 
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार हरियाणा से पंजाब के किसी बड़े भाजपा नेता, जिसका पंजाब के लोगों के साथ-साथ किसानों में भी कुछ अच्छा प्रभाव हो, को राज्यसभा में भेजने के लिए विचार-विमर्श हो रहा है, ताकि पंजाब विधानसभा के आगामी चुनाव में पार्टी को लाभ मिल सके। इस संबंधी अन्य नामों के साथ-साथ पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ के नाम पर भी पार्टी के भीतर गम्भीरता से विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो पंजाब में भाजपा को इसका कुछ न कुछ लाभ मिल सकता है।  
मसलहत कह दो इसे या कि सियासत समझो,
और तो कुछ भी नहीं बस हाथ की जादूगरी है।
कृत्रिम बुद्धि शिखर सम्मेलन
एक ओर भारत में ए.आई. इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन हो रहा है, जो भारत को ए.आई. के नक्शे पर एक सम्मानजनक स्थान दिलाने का काम कर रहा है। वैसे भी स्टेनफोर्ड ग्लोबल ए.आई. (कृत्रिम बुद्धि) दर्जाबंदी में भारत के पास अमरीका तथा चीन के बाद तीसरा स्थान है, परन्तु मुख्य प्रश्न यह है कि भारत कैसे विश्व के बड़े देशों के मुकाबले इस तकनीक में टिक सकेगा, क्योंकि भारत में शिक्षा एवं अनुसंधान पर किया जाने वाला खर्च लगातार कम हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारत की जी.डी.पी. का 6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने का है, परन्तु भारत का समूचा शिक्षा बजट जो 2013-14 में जी.डी.पी. का केवल 4.77 प्रतिशत था, तथा अब सिर्फ 2.50 प्रतिशत ही है। 
भारत ने मार्च 2024 में ए.आई. मिशन की प्राप्ति के लिए 10300 करोड़ रुपये रखे थे जो अमरीकी डालर में 1.24 बिलियन डालर बनते हैं, परन्तु चीन इससे लगभग 100 गुणा अधिक बजट ए.आई. के लिए आरक्षित रख रहा है और अमरीका का बजट 650 बिलियन अमरीकी डॉलर है, जो भारत से 600 गुणा से भी अधिक है। इसलिए सिर्फ सम्मेलन के दम पर ही भारत ए.आई. में सम्मानजनक स्थिति में टिका नहीं रह सकेगा, अपितु भारत को इस क्षेत्र में तथा शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना ही पड़ेगा। यहां भारत की एक यूनिवर्सिटी की ओर से चीन से लाए गए रोबोट को अपना ए.आई. उत्पाद कह कर पेश करने से हुई नमोशी चर्चा में है। इसी संदर्भ से हट कर इस बात का ज़िक्र करना ज़रूरी समझ रहा हूं कि इस शिखर सम्मेलन में कुछ सिख वैज्ञानिक भी ए.आई. विशेषज्ञों के तौर पर शामिल हैं। उनका ज़िक्र करना इसलिए  ज़रूरी है ताकि पंजाबी तथा सिख बच्चे यह समझ सकें कि ए.आई. में वे भी बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा अपना भविष्य इस क्षेत्र में बना सकते हैं। पंजाब सरकार को भी इस ओर ध्यान देने की ज़रूरत है। 
इस शिखर सम्मेलन में 38 देशों के 40 ए.आई. वैज्ञानिक एक सिख अमनदीप सिंह गिल के नेतृत्व में शामिल हैं। गिल यू.एन.ओ. के अबर सचिव हैं और वह इस विषय के विशेषज्ञ माने जाते हैं। विश्व की 100 प्रमुख यूनिवर्सिटियों में शामिल तथा भारत की एकमात्र ‘कृत्रिम बुद्धि’ पर फोक्सड (केन्द्रित) यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सल ए.आई. यूनिवर्सिटी मुम्बई के चांसलर तथा संस्थापक तरुणदीप सिंह आनंद भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल हैं। लवली यूनिवर्सिटी द्वारा इस सम्मेलन में पेश किए गये 15 प्रोजैक्टों को तैयार करने वालों में बड़ी संख्या सिख विद्यार्थियों की है। वैसे भी डिजिटल क्रांति की जान मानी जाती आपटिकल फाइबर तकनीक के पितामह माने जाते स्वर्गीय नरेन्द्र सिंह कपानी एक सिख वैज्ञानिक थे, जबकि गुरतेज सिंह पन्नू के पास विश्व में सबसे अधिक 1382 यू.एस. तकनीकी पेटैंट हैं जो सेमीकंडक्टर तथा मेमोरी से ही संबंधित हैं, जिनके बिना ए.आई. का चलना सम्भव ही नहीं। इसके अतिरिक्त रणवीर सिंह सचदेवा तथा प्रीतम सिंह चाहल जैसे वैज्ञानिकों के नाम भी इस क्षेत्र में चमक रहे हैं। 
़खैर, इस अवसर पर बाबा सेवा सिंह खडूर साहिब वालों के निशान-ए-सिखी इंस्टीच्यूट का ज़िक्र करना भी ज़रूरी है, जिनके 100 से अधिक विद्यार्थी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बड़ी नौकरियां हासिल करने में सफल रहे हैं। अभी-अभी जे.ई.ई. मेन्स के परिणाम में भी इस संस्था के 8 विद्यार्थी 90 प्रतिशत से अधिक अंक लेकर पास हुए हैं। एक विद्यार्थी वंशदीप सिंह ने तो 99.03 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इन सभी को देश का कोई भी आई.आई.टी. दाखिले से इन्कार नहीं कर सकेगा। इस सब कुछ का विषय से बाहर जाकर वर्णन करने का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि काश, अन्य सिख संस्थाएं भी लंगर, इमारतों तथा नगर कीर्तनों पर पैसा लगाने के साथ-साथ पंजाबियों तथा सिखों के बच्चों को टैंक्नोक्रेट इंजीनियर तथा आई.ए.एस. बनाने के लिए पैसा खर्च करने हेतु आगे आएं।
हमीं वो इल्म के रौशन चिराग हैं जिन को,
हवा बुझाती नहीं है, सलाम करती है।
(नदीम शानी)
अकाली दल पुनर-सुरजीत की अनुशासन समिति
अकाली दल (पुनर-सुरजीत) द्वारा जल्दी ही अनुशासन समिति बनाए जाने की चर्चा है। उम्मीद है कि यह समिति फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च के पहले सप्ताह में घोषित की जाएगी। अभी विचार-विमर्श चल रहा है कि यह समिति तीन सदस्यीय हो या पांच सदस्यीय। इस समिति में शामिल किये जाने के लिए सम्भावित नामों में पूर्व स्पीकर रविइन्द्र सिंह, परमिन्दर सिंह ढींडसा, गुपप्रताप सिंह वडाला, संता सिंह उमैदपुरी, सुच्चा सिंह छोटेपुर तथा सरवण सिंह फिल्लौर के नाम चर्चा में हैं। अकाली दल (पुनर-सुरजीत) के यूथ विंग को सक्रिय किये जाने के भी बहुत आसार हैं। हमारी जानकारी के अनुसार जल्द ही यह अकाली दल चार यूथ कोआर्डिनेटर नियुक्त करेगा। इनमें से दो मालवा क्षेत्र में तथा एक-एक दोआबा तथा माझा क्षेत्र में नियुक्त किये जाएंगे। 

-1044, गुरु नानक स्ट्रीट, समराला रोड, खन्ना
-मो. 92168-60000

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