कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सम्भावना और आशंकाएं
21वीं सदी को विज्ञान और टैक्नोलॉजी के बोलबाले वाली सदी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इस दौर में प्रतिदिन विज्ञान और टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़े-बड़े अनुसंधान हो रहे हैं, जो न केवल लोगों के जीवन में बड़े बदलाव ला रहे हैं, अपितु उन्हें अचम्भित भी कर रहे हैं। नि:संदेह जब से विश्व में सूचना की क्रांति हुई है, उस समय से लोगों के कामकाज और रहन-सहन के क्षेत्र में बहुत बड़े बदलाव आए हैं। कम्प्यूटर, इंटरनेट, स्मार्ट फोन से लेकर डिजिटलाइजेशन तक का स़फर बहुत ही दिलचस्प रहा है। इस तरह प्रतीत होता है कि प्रत्येक क्षेत्र की जानकारी मनुष्य की हथेली में बंद हो गई है। यह सिलसिला अलादीन के चिराग वाली कहावत से भी अधिक आश्चर्यजनक है। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) से विश्व में और भी बड़े आश्चर्य और परिवर्तन होने वाले हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रत्येक क्षेत्र को छूने और बदलने वाली है। इस तकनीक के आगामी समय में बढ़ने वाले महत्त्व के दृष्टिगत ही भारत सरकार ने नई दिल्ली में पांच दिवसीय ए.आई. शिखर सम्मेलन, ‘इंडिया ए.आई. इम्पैक्ट सम्मिट-2026’ के नाम पर रखा है। इसके साथ ही इंडिया ‘ए.आई. इम्पैक्ट एक्सपो’ नामक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विगत दिवस भारत मंडपम में ‘इंडिया ए.आई. इम्पैक्ट-2026’ और प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया है। उनकी ओर से इसमें 19 फरवरी को भाषण भी दिया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का ज़िम्मेदार ढंग से इस्तेमाल करने और इसका दृष्टिकोण जन-साधारण तक बनाने पर बल दिया है। उपरोक्त शिखर सम्मेलन का महत्त्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि इसमें भिन्न-भिन्न देशों के 20 से अधिक राष्ट्र प्रमुख, 60 मंत्री और लगभग 500 विभिन्न देशों के कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र से संबंधित कम्पनियों के प्रतिनिधि, अनुसंधानकर्ता और विद्वान शामिल हो रहे हैं। इस अवसर पर लगाई जाने वाली प्रदर्शनी में भी 600 से अधिक उच्च सामर्थ्य वाले स्टार्ट-अप हिस्सा ले रहे हैं और प्रदर्शनी में 13 देशों के पैविलियन भी स्थापित किए गए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी इस समय विश्व में पाए गए आकर्षण के दृष्टिगत भारी संख्या में युवाओं के भी इस अवसर पर लगी प्रदर्शनी को देखने आने की सम्भावना है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक ऐसी तकनीक है जो प्रत्येक तरह की जानकारी मिनटों-सैकेंडों में आपको उपलब्ध करती है, और भिन्न-भिन्न काम करने के लिए हमें ढंग-तरीके भी बताती है। इससे औद्योगिक, व्यापारिक, शैक्षणिक, मैडीकल, कृषि और मनोरंजन उद्योग में भी बड़े बदलाव हो रहे हैं। प्रत्येक विषय की खोज करने में शिक्षार्थियों और पेशेवर लोगों को बड़ी सहायता मिल रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग जब कम्प्यूटर, रोबोट और स्मार्ट फोन द्वारा और अधिक होने लगेगा ताकि इनकी सामर्थ्य और कार्यकुशलता में और भी अधिक वृद्धि होगी। बहुत-से ऐसे कामकाज जो आज मनुष्य द्वारा किए जा रहे हैं वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस रोबोट या अन्य मशीनी यंत्र करके दिखाई देंगे। इसकी अपार सम्भावनाएं के दृष्टिगत विश्व भर में लोगों को यह डर भी सताने लगा है कि कृत्रिम बुद्धि से काम करते मशीनी और संचार यंत्र मनुष्य से अधिक समर्थ और उचित परिणाम देने वाले होने के कारण धीरे-धीरे ये भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में मानवीय श्रम और गतिविधि को बाहर कर देंगे जिससे व्यापक स्तर पर लोगों की नौकरियां जाती रहेंगी। कम्प्यूटर तथा आधुनिक टैक्नोलॉजी ने पहले ही अनेक क्षेत्रों में लोगों की नकौरियों में कमी लाई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अधिक इस्तेमाल से रोज़गार के अवसरों में और भी कमी आने की सम्भावना प्रकट की जा रही है।
इस सन्दर्भ में सरकारों की ज़िम्मेदारी बेहद महत्त्वपूर्ण हो जाती है। प्रत्येक देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल वहां के लोगों की ज़रूरतों के अनुसार ही होना चाहिए। इस बात को मुख्य रखा जाना चाहिए कि इससे रोज़गार के अवसरों में ज्यादा कमी न आए, अपितु इससे रोज़गार के और नये अवसर पैदा हों। विशेष रूप से शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी और ज़िम्मेदारी से करने की ज़रूरत है, ताकि कड़ी मेहनत करके मौलिक ज्ञान अर्जित करने की नई पीढ़ी की इच्छा और ख्वाहिश ही न मर जाए। अनुसंधान के क्षेत्र चुराई गई जानकारी पर आधारित न हो जाएं। यह देखा जाना ज़रूरी है कि मनुष्य की बौद्धिक सामर्थ्य बढ़ने के स्थान पर उसकी इस सामर्थ्य में किसी भी तरह की कमी न आए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में मानव की कारगुज़ारी में सुधार लाने के लिए तो होना ही चाहिए परन्तु व्यापक स्तर पर इसका इस्तेमाल मनुष्य के विकल्प के रूप में न हो। इस संबंध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल बढ़ाने के साथ-साथ अलग-अलग देशों की सरकारों को अपनी-अपनी ज़रूरतों के अनुसार आवश्यक कानून और नियम भी बनाने पड़ेंगे। इस तकनीक के इस्तेमाल से बौद्धिक सम्पदा के मालिकाना अधिकारों संबंधी जिस तरह के ़खतरे पैदा होंगे, उनके भी सरकारों को हल ढूंढने पड़ेंगे। मीडिया में इसका हो रहा दुरुपयोग भी एक बड़ा मामला है, जिसे हल करने की ज़रूरत है।
परन्तु एक बात स्पष्ट है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आविष्कार हो चुका है। यह हमारे द्वार पर दस्तक ही नहीं दे रही अपितु हमारे घरों में दाखिल हो चुकी है। इसे दृष्टिविगत करना या इससे किनारा करना सम्भव नहीं है। इसका इस्तेमाल इस प्रकार का होना चाहिए, कि लोगों के जीवन में सुधार हो परन्तु उनमें बौद्धिक और आर्थिक असमानताओं में ज्यादा वृद्धि न हो। प्रत्येक पक्ष से इसका इस्तेमाल एक बेहतर दुनिया और एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए ही किया जाये। इस तरह की सावधानियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आमद का स्वागत करना बनता है। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि भारत इस नई तकनीक का इस्तेमाल कौन-से क्षेत्रों में और कितनी सार्थकता से करता है।

