भाजपा की रैली

फरवरी 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए लगभग सभी पार्टियों ने कमर कस ली है और अपने-अपने ढंग-तरीके से उन्होंने सक्रिय होना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी ने इस दिशा में पहले ही सक्रियता दिखानी शुरू कर दी थी, कांग्रेस ने भी अब तक पूरी तत्परता दिखाई है। अलग-अलग अकाली दलों ने भी इस दिशा में अपने-अपने रास्ते अख्तियार कर लिए हैं। पिछले दिनों सुखबीर सिंह बादल ने भी शिरोमणि अकाली दल (ब) द्वारा एक महीने में दर्जनों ही रैलियां करने की घोषणा की थी। उसकी ओर से अलग-अलग स्थानों पर प्रतिदिन ये रैलियां की जा रही हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी द्वारा मोगा के गांव किल्ली चाहलां में अभी की गई प्रभावशाली रैली को देखा जा सकता है।
विगत लम्बी अवधि से प्रदेश में भाजपा अकाली दल बादल के साथ मिलकर राजनीति करती रही है और अकाली दल बादल के साथ मिलकर यह सरकारों का हिस्सा भी बनी रही है। अकाली दल (ब) का अढ़ाई दशकों का गठबंधन सितम्बर 2020 में टूट गया था। जब केन्द्र द्वारा नए कृषि कानून लागू करने की घोषणा की गई थी। उसके बाद दोनों पार्टियों ने अपने-अपने रास्ते चुन लिए थे, जो अब तक राजनीतिक रूप से उनके लिए नुकसानदायक सौदा ही रहे हैं। हालात यह हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव में 117 सीटों में अकाली दल ने मात्र तीन सीटें ही जीती थीं और भाजपा के मात्र 2 विधायक ही चुने गए थे, परन्तु इसके बावजूद तथ्यों के आधार पर यह बात ज़रूर कही जा सकती है कि भाजपा ने पिछले समय में प्रदेश में अपना प्रभाव बड़ी सीमा तक बढ़ाने का निरन्तर यत्न किया है। उदाहरणतया वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अकाली दल (ब) के साथ गठबंधन के समय भाजपा ने 8.7 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। दोनों का समझौता टूटने के बाद वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में इसका मत प्रतिशत कम होकर 6.60 प्रतिशत रह गया था, परन्तु वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव अकेले ही लड़ने से भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ कर 18.56 हो गया था, जो अब तक प्रदेश में उसका सबसे अधिक मत प्रतिशत है। इसके साथ-साथ विगत अवधि में इस पार्टी ने अपनी निरन्तर और ठोस योजनाबंदी से प्रदेश में ज्यादातर शहरों के साथ-साथ गांवों में भी अपना आधार बनाने का यत्न किया है।
विगत अवधि में लगातार अन्य पार्टियां विशेष रूप से कांग्रेस और अकाली दल (ब) के सभी भाईचारों से संबंधित दर्जनों ही वरिष्ठ नेता इस पार्टी का दामन  थाम रहे हैं। इसी कारण यह पार्टी आज पूरे विश्वास और हौसले में दिखाई देती है। नि:संदेह अब इसकी ओर से की गई भारी रैली से इसका प्रभाव और भी बढ़ा हुआ दिखाई देने लगा है। किल्ली चाहलां में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ बातें बहुत ही स्पष्ट रूप में की हैं। उन्होंने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा की। इसके साथ विगत लम्बी अवधि से चल रही इस चर्चा को विराम लग गया है कि यह अकाली दल (ब) के साथ मिलकर आगामी चुनाव लड़ेगी। इसकी बजाय गृह मंत्री ने पूरे विश्वास के साथ यह स्पष्ट घोषणा की कि आगामी चुनाव के बाद भाजपा अपनी सरकार बनाएगी और प्रदेश को दरपेश अनेकानेक समस्याओं को हल करने में सफल होगी। आगामी समय में इस पार्टी के स्वतंत्र रूप से विचरण करने के लिए ज़मीन साफ हो गई है। अन्य राजनीतिक पार्टियां भी इस सक्रियता को बड़ी गम्भीरता और दिलचस्पी के साथ देख रही हैं। 
आम आदमी पार्टी की सरकार ने 4 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उसकी ओर से विगत अवधि में स्थान-स्थान पर अपनी सरकार की उपलब्धियों का लोगों के समक्ष विवरण पेश किया जा रहा है। गत दिवस उन्होंने अपने किए वादों में एक और वादा पूरा करते हुए जनरल वर्ग की महिलाओं को प्रति महीना 1000 रुपये और अनुसूचित वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये देने की घोषणा भी कर दी है और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मुफ्त स्वास्थ्य उपचार की बनाई योजनाओं को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्धता दिखानी शुरू कर दी है। गत दिवस बरनाला में कांग्रेस ने भी एक बड़ी रैली की थी, जिसमें राहुल गांधी ने भाग लिया था तथा पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हुए उन्होंने आगामी चुनाव जीत कर प्रदेश को अच्छी सरकार देने की घोषणा की थी। उन्होंने कांग्रेसियों को गुटबंदी छोड़ने संबंधी भी निर्देश दिए थे।
चाहे आज राजनीतिक मंच पर कई अकाली गुट बन चुके हैं और वह अपने-अपने तौर पर बड़े दावे कर रहे हैं, परन्तु अकाली कतारों में बड़ी सीमा तक एकता लाना इन गुटों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। नि:संदेह आने वाले समय में प्रदेश का राजनीतिक माहौल और गर्माता दिखाई देगा, जिसमें लोगों को प्राथमिक रूप से अपनी नई सरकार के चयन हेतु स्वयं को तैयार करना होगा, ताकि प्रदेश के विकास की गति को और तेज़ किया जा सके।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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