मेरा दायित्व समाज के सभी लोगों को साथ लेकर चलने का है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली, 16 अप्रैल - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर कहा, "हमारे देश में जब से महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि तब सबने सर्वसम्मति से इसे पारित किया तो यह विषय ही नहीं रहा। इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह चर्चा शुरू हुई..राष्ट्र के जीवन में कुछ ज़रूरी पल आते हैं। ऐसे समय में, समाज की सोच और नेतृत्व की क्षमता उस पल को पकड़ लेती है और उसे देश की अमानत बना देती है, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है। भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में, ये वैसे ही पल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर कहा, "जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, मैं चाहूंगा कि वे खुद के पिछले 30 सालों के परिणामों को देख लें... मैं समझता हूं कि इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। आज से 25-30 साल पहले जिसने भी इसका विरोध किया, वह विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया लेकिन आज ऐसा समझने की गलती न करें। पिछले 25-30 सालों में जमीनी स्तर, पंचायती चुनाव व्यवस्था में जीतकर आई बहनों में एक राजनीतिक चेतना है, वे ज़मीनी स्तर पर ओपिनियन मेकर हैं। आज वे वोकल हैं... वे कहती हैं कि अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभाएं और संसद में होती हैं। मुलायम सिंह जी थे तब से एक विषय चला आ रहा है, उनके परिवार वाले भी वह विषय चला रहे हैं। आप देश की महिलाओं पर भरोसा करें, एक बार 33% बहनों को यहां आने दें, आकर उन्हें निर्णय करने दें कि किस वर्ग को देना है, किस वर्ग को नहीं, हम उनके सामर्थ्य पर आशंका क्यों जताते हैं? उन्हें आने तो दीजिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर कहा, "मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं लेकिन मेरा दायित्व समाज के सभी लोगों को साथ लेकर चलने का है। मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है, मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है। यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसे अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को यह दायित्व दिया।

