बच्चे के लिए दो सुरक्षित सीटों की खोज

उनके यहां पहली बार एक लड़का पैदा हुआ था। वो लड़के को लेकर मरे जा रहे थे। उनकी एक ही और बस एक ही चिंता थी कि किसी तरह कोई लड़का पैदा हो। और अंतत: लड़का ही पैदा हुआ, लेकिन लड़का सतमासु था। उसको बड़े जतन से आई.सी.यू. में रखा गया। उसके लिए डॉक्टरों की एक पूरी फौज इकट्ठी की गई थी। उसके छींकते ही डॉक्टरों के हाथ पांव फूल जाते। नेता जी बेतहाशा परेशान है जाते। उसके इलाज में डॉक्टर झोंक दिए जाते। 
यही लड़का धीरे-धीरे बड़ा होने लगा। बड़ा होकर जैसे हर नेता का लड़का नेता बनता है। वो भी नेता ही बना। 
 उसको लांच किया जाना था। जैसे वो कोई बैलेस्टिक मिसाईल हो। जैसे किसी सुपरस्टार का लड़का हो। उसके लांचिंग लिए बाकायदा पंडितों से ग्रह-नक्षत्र और मुहूर्त विचारे गए। उसके लांचिग से पहले अखबारों का पहले पृष्ठ पर बड़े-बड़े आदमकद छपवाए गए। उसके लांचिंग कि ये तो बहुत बाहर की खबर थी। उसको लांच करने के समय पार्टी के सदस्यों की राय और वरीष्ठता को ताक पर रख दिया गया। अप्रत्यक्ष रूप में वे लोग जो उम्र में और तजुर्बे में युवा सतमासु बच्चे से बहुत वरिष्ठ थे। मन-ही-मन नाराज़ थे लेकिन प्रत्यक्ष में बहुत खुश दिखाई दे रहे थे। सब लोग और लोगों की तरह सतमासु बच्चे के पार्टी के सी.ई.ओ. या अध्यक्ष बनने पर खुश दिखाई दे रहे थे। फिर बच्चा और बड़ा हुआ।  अब वो आंतरिक और बाह्य सभी मामलों की देख-रेख करता था। सतमासु बच्चे का कद इतना बढ़ा कि वरिष्ठ लोग भी मंचों पर उनका आशीर्वाद लेने के लिए सतमासु बच्चे का पैर छूने लगे। 
 अगर लोगों को पार्टी में बने रहना था। तो पार्टी के आंतरिक संविधान के अनुसार चलना पड़ता था। पार्टी का संविधान साफ कहता था कि उम्र के हिसाब से लोग अध्यक्ष का पांव नहीं छूएंगें। बल्कि पद के हिसाब से लोगों के पांव छूएंगें।   इस तरह पार्टी के लिए गरिष्ठ होते हुए भी वो लड़का पार्टी का वरिष्ठ नेता बन गया था। अब वो 18 साल का हुआ। पिता जी को उसके लांचिंग की चिंता हुई। तो अखबार में बड़े-बड़े आदम कद विज्ञापन निकाले गए। पार्टी की लोगों को सबसे सुरक्षित सीट खोजने के लिए कहा गया। इस खोज का मतलब था। नेताओं की नींद का हराम होना। सब लोग हलकान हुए जा रह थे। विधानसभा नज़दीक था।  लिहाजा उनके लिए सुरक्षित सीट का चुना जाना सबसे ज़रूरी काम था। लिहाजा दो सुरक्षित सीटों को चुना गया। जिस पर सतमासु चुनाव लड़ रहा था। सबसे सुरक्षित सीट वो थी। 
जहां से उनके दादा हर बार चुनाव जीतते आ रहे थे। बाद में उसके पिता उस सीट से लड़कर अभी केंद्र में मंत्री थे। सुरक्षित सीट से लड़कर नेता जी अपनी बेइज्जती नहीं होना देना चाहते थे। दूसरी सीट उनके चाचा की थी, जो उनकी चाची के मरणोपरंता चाचा वहां से विधायक थे। चाचा जी वाली दूसरी सुरक्षित सीट को सतमासु बच्चे के लिए चुना गया था। फिलहाल सतमासु बच्चा दोनों सीट से लड़ रहा है। चुनाव का मौसम है। रिजल्ट का इंतजार कीजिये।

-मेघदूत मार्केट फुसरो 
बोकारो झारखंड, पिन 829144 

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