वैशाली ने किया कमाल, जीता महिला शतरंज कैंडिडेट्स
कैंडिडेट्स के महिला वर्ग में आठ खिलाड़ी थीं और उनमें रैंकिंग के आधार पर सबसे निचले पायदान पर भारत की ग्रैंडमास्टर आर. वैशाली थीं, लेकिन उन्होंने कमाल करते हुए इस प्रतियोगिता को जीता और क्लासिकल फॉर्मेट शतरंज के विश्व चैंपियनशिप मैच (महिला) के लिए क्वालीफाई किया, जिसमें वह खिताब के लिए विश्व चैंपियन चीन की जू वेनजुन को चुनौती देंगी। खिताबी मुकाबला इसी साल खेला जायेगा, लेकिन इसके लिए तिथि व स्थान का घोषित होना शेष है। गौरतलब है कि ओपन वर्ग में भारत के डी. गुकेश अपने विश्व खिताब का बचाव करेंगे और उन्हें उज्बेकिस्तान के जवोखिर सिंदरोव चुनौती देंगे, जिन्होंने कैंडिडेट्स में शानदार जीत दर्ज की। साइप्रस में 15 अप्रैल 2026 को महिला कैंडिडेट्स शतरंज प्रतियोगिता के अपने अंतिम 14वें चक्र के मैच में 24 वर्षीय वैशाली ने कुछ तनावपूर्ण पलों को बर्दाश्त करते हुए रूस की कटरीना लाग्नो को पराजित किया। इस प्रतियोगिता में वैशाली ने 7 ड्रा, 1 पराजय व 5 जीत के साथ कुल 8.5 अंक अर्जित किये, जो कि कैंडिडेट्स जीतने के लिए यह पर्याप्त थे। ध्यान रहे कि खिताबी मुकाबले के लिए क्वालीफाई करने वाली वैशाली भारत की केवल दूसरी महिला खिलाड़ी हैं। उनसे पहले 2011 में भारत की कोनेरू हम्पी चीन की ही होउ यिफान को चुनौती देने का अधिकार प्राप्त किया था, लेकिन वह हार गईं थीं। हम्पी ने वैशाली व दिव्या देशमुख के साथ इस बार भी कैंडिडेट्स के लिए क्वालीफाई किया था, लेकिन सुरक्षा कारणों से वह साइप्रस नहीं गईं और उनकी जगह यूक्रेन की एना मुजीचुक को खेलने का अवसर मिला।
ज़ाहिर है इस शानदार उपलब्धि पर वैशाली बहुत खुश हैं- ‘मेरे लिए इसका बहुत अधिक महत्व है... मैं सुपर हैप्पी हूं... मैं इस खुशी को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती हूं।’ खिताबी मैच की ओर का मार्ग वैशाली के लिए भारत की ही दिव्या देशमुख ने आसान कर दिया था, जब उन्होंने वैशाली के संग संयुक्त लीड में चल रहीं बीबीसारा अस्सौबयेवा (8 अंक) के साथ अपने मैच को ड्रा खेला। इसका अर्थ यह था कि वैशाली के लिए जीत उन्हें स्पष्ट विजेता बना देती, बिना टाईब्रेक की आवश्यकता के। यही हुआ भी। लीजेंडरी महिला खिलाड़ी जुडित पोल्गर ने वैशाली की जुझारू प्रवृत्ति की तारीफ की और कहा कि इसी की वजह से वह कैंडिडेट्स जीतने में सफल रहीं, जबकि रैंकिंग में वह सबसे निचले पायदान पर थीं। लेकिन साथ ही पोल्गर ने यह भी कहा, ‘अपने खेल के विभिन्न पहलुओं को सुधारने के लिए वैशाली को अविश्वसनीय कार्य करना होगा। जितनी गलतियां उन्होंने इस प्रतियोगिता में कीं उतनी अगर वह जू वेनजुन के खिलाफ खिताबी मुकाबले में करेंगी, तो बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
अंतिम चक्र के मैच में लाग्नो ने वैशाली के खिलाफ सिसिलियन ड्रैगन का चयन किया। इसी मूव का चयन गैरी कास्परोव ने अपने 1995 के विश्व चैंपियनशिप मैच में वी. आनंद के खिलाफ किया था। वैशाली ने अपने जीवन में प्रतियोगी मैचों में सिसिलियन ड्रैगन के सिर्फ तीन गेम खेल थे, जिनमें से दो में उन्होंने जीत दर्ज की थी और तीसरे में वह पिछले साल सफेद मोहरों से भी विज्क आन ज़ी से हार गईं थीं। लेकिन इस बार वैशाली ने मार्ग बदल दिया। उन्होंने एक लम्बा किला बनाया। नतीजतन ड्रैगन जो भारतीय दिलों पर खंजर की तरह काम करता है, वह इस बार पर्याप्त नहीं था। जब 14वां चक्र आरंभ हुआ तो प्रतियोगिता से सिर्फ दिव्या देशमुख व तान जहोंग्यी ही बाहर थीं, हालांकि 7.5 अंकों के साथ वैशाली व बीबीसारा संयुक्त लीडर थीं। इसका अर्थ यह हुआ कि कैंडिडेट्स जीतना का गणितीय अवसर छह खिलाड़ियों के पास था। पांच खिलाड़ी 7-5 अंकों पर समाप्त कर सकती थीं, विभिन्न अनुमानों के तहत और फिर अगले दिन रैपिड टाईब्रेक खेला जाता। प्रतियोगिता की स्थिति से इतर दोनों बीबीसारा व लाग्नो अपनी अपनी पहले चक्र की पराजय का बदला लेना चाह रही थीं क्रमश: दिव्या व वैशाली से, लेकिन ऐसा हो न सका और वैशाली स्पष्ट विजेता बनकर उभरीं। टाईब्रेक की भी ज़रूरत नहीं रही।
दूसरी ओर कैंडिडेट्स के ओपन वर्ग में उज्बेकिस्तान के जवोखिर सिंदरोव ने इतिहास रचा। उन्होंने रिकॉर्ड 10 अंक अर्जित किये, जबकि इससे पहले 9.5 अंक अर्जित करने का ही रिकॉर्ड था, इयान नेपोमिनियात्ची का 2023 में। इस शानदार परफॉरमेंस से सिंदरोव ने न सिर्फ विश्व चैंपियन डी. गुकेश से खिताबी भिड़ंत का हक हासिल किया बल्कि प्राइज फंड में तीन हिस्से प्राप्त किये। साइप्रस में कैंडिडेट्स विजेता होने के नाते 70,000 यूरो। दस अंक अर्जित करने के लिए 100,000 यूरो (प्रति आधा अंक 5,000 यूरो)। वर्ल्ड चैंपियनशिप मैच से कम से कम 1 मिलियन डॉलर। पिछले साल के फाइनलिस्ट डिंग लिरेन ने 1.15 मिलियन डॉलर प्राप्त किये थे। बहरहाल, अगर गुकेश अपना खिताब बचाने में और वैशाली खिताब जीतने में कामयाब हो जाती हैं, जिसकी प्रबल संभावना है, तो यह ऐतिहासिक होगा कि दोनों वर्ग के विश्व चैंपियन भारतीय होंगे। जो काम 2011 में आनंद व हम्पी न कर सके; क्योंकि हम्पी हार गईं थीं, वह गुकेश व वैशाली कर सकते हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



