खाड़ी देशों में बेहतर अवसरों के भारत ने खोले द्वार
आज 1 जून से लागू हो रहा भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस मिशन की एक निर्णायक उपलब्धि है, जिसका लक्ष्य नए बाज़ार खोलने और रोज़गार सृजन को गति देने के जरिये भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के लिए वैश्विक समृद्धि के मार्ग बनाना है। भारत और ओमान के बीच गहरे आर्थिक संबंध हैं और लोगों के आपसी संबंध प्रगाढ़ हैं। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें वे व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जिनकी जड़ें 200-300 साल पुरानी हैं। ओमान से भारत को भेजी जाने वाली वार्षिक धनराशि लगभग 2 बिलियन डॉलर है, जबकि देश में 6000 से अधिक भारतीय उद्यम कार्यरत हैं।
दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करता है। यह तुरंत ही ओमान में 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों के लिए 100 प्रतिशत शुल्क मुक्त बाज़ार पहुंच की सुविधा देता है, जिसमें 99.38 प्रतिशत निर्यात शामिल है। यह सीईपीए से पहले की प्रणाली की तुलना में एक उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। पहले की प्रणाली में केवल 15.3 प्रतिशत भारतीय निर्यात ओमान में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश कर सकते थे। भारत की ऐसी वस्तुएं, जिन पर वर्तमान में ओमान में 5 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है और जिनकी कीमत लगभग 3.64 बिलियन डॉलर के निर्यात के बराबर है, अब काफी अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी।
भारत के एमएसएमई क्षेत्र के लिए यह समझौता परिवर्तनकारी हो सकता है, क्योंकि सीईपीए से लाभान्वित होने वाले कई क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों की प्रमुखता है। लोहा और इस्पात, वस्त्र, चमड़ा, वाहन कल-पुर्जे और औद्योगिक उपकरण जैसे कुछ क्षेत्रों में एमएसएमई को बड़े अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डर मिलने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन, निवेश और रोज़गार को बढ़ावा मिलेगा। बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के युग में सीईपीए भारतीय निर्यातकों को जो आर्थिक मंदी और बढ़ते व्यापार बाधाओं का सामना कर रहे हैं, अपने बाज़ारों को विविध बनाने और परंपरागत बाज़ारों पर निर्भरता कम करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यह व्यापार समझौता श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे वस्त्र और परिधान, चमड़ा व जूते, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण और कुछ इंजीनियरिंग क्षेत्रों को लाभ पहुंचाता है, जो भारत के प्रमुख रोज़गार प्रदाता हैं। ओमान को होने वाले वस्त्र निर्यात में वृद्धि से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, करूर, भदोही, मुरादाबाद, जयपुर और अहमदाबाद जैसे प्रमुख क्लस्टर में रोज़गार के अवसरों का सृजन होगा। भारत भर के कारीगर और बुनकर भी अपने उत्पादों की उच्च अंतर्राष्ट्रीय मांग से लाभान्वित होंगे।
भारत भर में विशेष रूप से तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल में साथ ही महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों समेत चमड़ा और जूता के प्रमुख केंद्रों में भी रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। रत्न और आभूषण क्षेत्र एक अन्य उदाहरण है, जो दिखाता है कि सीईपीए रोज़गार वृद्धि को किस प्रकार तेज करेगा। भारत के पास पहले से ही कटे और पॉलिश किए हुए हीरे, सोने और चांदी के आभूषण तथा हस्तनिर्मित आभूषण उत्पादन में मजबूत क्षमताएं हैं। शुल्क बाधाओं के हटने से, भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय और एशियाई प्रतिस्पर्धियों पर निर्णायक बढ़त मिलेगी। उद्योग जगत का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में ओमान को होने वाला निर्यात बढ़ कर 150 मिलियन डॉलर तक हो सकता है। इससे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के आभूषण निर्माण केन्द्रों में महत्वपूर्ण रोज़गार संभावनाएं सृजित होने की उम्मीद है।
समझौते का एक और महत्वपूर्ण पहलू सेवा और आवागमन में निहित है। ओमान ने भारत के लिए विशिष्ट निर्यात क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं व्यक्त की है, जिनमें पेशेवर सेवाएं, कम्प्यूटर और आईटी सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, अनुसंधान और विकास तथा पर्यावरण सेवाएं शामिल हैं। लेखा, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, निर्माण, शिक्षा और परामर्श जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों को बेहतर बाज़ार पहुँच से लाभ मिलने की उम्मीद है। महत्त्वपूर्ण रूप से ओमान ने भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों के लिए आवागमन प्रतिबद्धताओं में वृद्धि पर सहमति व्यक्त की है। अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरित कर्मियों और संविदा सेवा प्रदाताओं को चार साल तक रहने की अनुमति दी जाएगी, जबकि व्यवसाय आगंतुकों और स्वतंत्र पेशेवरों को आसान अस्थायी प्रवेश की सुविधा मिलेगी। इसने अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरित कर्मियों के लिए ऊपरी-सीमा को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। ओमान के साथ समझौता याद दिलाता है कि व्यापार, विकास, रोज़गार सृजन और साझा समृद्धि का एक शक्तिशाली उपकरण है। एक विभाजित और संरक्षणवादी दुनिया में, प्रधानमंत्री मोदी स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि एक नया, आत्मविश्वासी भारत पीछे नहीं हटेगा। यह साझेदारियों, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ेगा।
(लेखक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं।)



