भाजपा के नये प्रधान का चयन
वर्ष 2027 के शुरू में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए सभी संबंधित राजनीतिक पार्टियों ने कमर कसना शुरू कर दिया है। इनमें से इस समय भाजपा की गतिविधियां अधिक दिखाई देती हैं। पश्चिम बंगाल की जीत के बाद पार्टी का हौसला बढ़ा है। हरियाणा में भी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद पार्टी अधिक दृढ़ता और विश्वास में दिखाई दे रही है। पार्टी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पंजाब में आगामी चुनावों के लिए एक तरह से कमान सौंपी हुई है। सैनी पंजाब में बखूबी विचरण करके पार्टी का प्रभाव बढ़ाने के लिए अपना अच्छा योगदान डालते नज़र आ रहे हैं।
लगभग 46 वर्ष पहले 1980 में पंजाब भाजपा के पहले प्रधान डा. बलदेव प्रकाश बने जो कि एक प्रभावशाली नेता थे। वह लम्बे समय तक इस पद पर रहे। उनके बाद लम्बे समय तक इस पार्टी का प्रभाव शहरी मध्य वर्ग में ही माना जाता रहा। प्रदेश में तीन दशकों तक इसने अकाली दल (ब) के साथ अपनी राजनीतिक साझ डाले रखी। स. प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में बनी सरकारों में भी इसकी हिस्सेदारी रही परन्तु इस गठबंधन के कारण भी इसका मतदाताओं में प्रभाव सीमित हद तक ही रहा। वर्ष 2020 में अकाली दल से अलग होने के बाद इसने अपनी नयी योजनाबंदी और लामबंदी करनी शुरू की। नि:संदेह पिछले समय में इसने अपना दायरा बढ़ाने में सफलता हासिल की है। इसका वोट शेयर 8 प्रतिशत से बढ़ कर 19 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब इसके नेता वर्ष 2027 में विधानसभा के चुनाव अकेले ही लड़ने के दावे कर रहे हैं। पिछले समय में भाजपा हाईकमान ने बड़े हैरानीजनक फैसले लिए हैं। कभी कांग्रेस के कद्दवार नेता रहे सुनील जाखड़ को प्रदेश प्रधान बनाए जाने के ऐलान ने एक बार तो सबको हैरान कर दिया था। सुनील जाखड़ ने लोकसभा के चुनाव के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसको पार्टी ने स्वीकार नहीं किया था। बाद में उनके साथ अश्वनी शर्मा को कार्यकारी प्रधान बना दिया गया था।
विगत कुछ वर्षों में पार्टी द्वारा विशेष तौर पर कांग्रेस और अकाली दल (ब) के बड़े सिख चेहरों को पार्टी में शामिल करके और उनको ज़िम्मेदारियां देकर प्रदेश में एक नया संदेश दिया गया और इस प्रभाव को लगातार तोड़ने का भी यत्न किया गया कि यह सिर्फ एक वर्ग के साथ संबंधित शहरी लोगों की पार्टी है। अब पिछले कुछ माह से पार्टी का नया प्रधान बनाने की तैयारियां चल रही थीं। पार्टी के कुछ पुराने नेताओं के साथ-साथ कुछ नये सिख चेहरों के बारे में भी अंदाज़े लगाए जा रहे थे। अब केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का प्रधान बनाने की घोषणा ने एक बार फिर सबको हैरान कर दिया है। स. ढिल्लों पिछले चार वर्ष पहले भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वह साढ़े तीन दशक से भी अधिक समय तक कांग्रेस में कार्यशील रहे। मालवा में से वह विधानसभा के सदस्य भी रहे। इस पूरे समय में कांग्रेस में उनका बड़ा प्रभाव भी माना जाता था। लम्बे समय तक वह कैप्टन अमरिन्दर सिंह के निकटतम साथी भी रहे। स. ढिल्लों का बढ़िया और परिपक्व राजनीतिज्ञ होने का प्रभाव बना रहा है। लम्बे समय तक इस क्षेत्र में विचरण करते हुए वह संकीर्ण दायरों में घिरे नहीं रहे, बल्कि पंजाब के हितों के लिए उन्होंने अपनी गतिविधियों को और व्यापक किया।
यह बड़ी ज़िम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने किसानी क्षेत्र की ओर अधिक ध्यान देते हुए 23 फसलों पर न्यूनतम खरीद मूल्य देने की वकालत की और कहा कि उनकी बड़ा पहल किसानी की ओर होगी। यह भी कि भाजपा प्रदेश को विकास के रास्ते पर चलाने के लिए यत्नशील रहेगी और अमन-कानून की समस्या के साथ दृढ़ता से निपटेगी। यह भी कि प्रदेश में फैले भ्रष्टाचार और परिवारवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नि:संदेह स. ढिल्लों की नियुक्ति पार्टी के लिए नये रास्ते खोलने में सहायक होगी और पार्टी के आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां तेज़ करके अधिक विश्वास के साथ चुनाव मैदान में उतरने की सम्भावना है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

