केरलम में वामपंथियों को कमज़ोर करना चाहती है भाजपा
भारतीय जनता पार्टी का ऑपरेशन केरलम शुरू हो गया है। उसे लग रहा है कि जब तक केरलम में त्रिकोणात्मक लड़ाई होगी और वामपंथियों की मौजूदगी बनी रहेगी, तब तक भाजपा के लिए सम्भावनाएं नहीं बनेंगी। दो चुनावों में उसने देख लिया है कि उसका वोट 12 फीसदी से ऊपर नहीं जा रहा है। लोकसभा चुनाव में ज़रूर थोड़ा ज्यादा वोट मिले, लेकिन इन विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस तथा सीपीएम गठबंधन की बीच ही रहा। भाजपा को यह पता है कि केरलम के 55 फीसदी हिंदू मतदाताओं में से ज्यादातर का रुझान वामपंथियों यानी सीपीएम गठबंधन की ओर है। इसीलिए ऑपरेशन केरलम के तहत सीपीएम को निशाना बनाया गया है। राज्य में सीपीएम के सबसे बड़े नेता और लगातार दो बार मुख्यमंत्री रहे पिनरायी विजयन के यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापे से इसका संकेत मिलता है। यह मामला विजयन की बेटी की कंपनी से जुड़ा है। विजयन पर यह आरोप पहले लगा था कि उन्होंने अपनी बेटी वीणा के पति को राज्य सरकार में मंत्री बनाया। फिर वीणा की कंपनी को बिना काम कराए भुगतान का मामला आया। अगर परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप से वामपंथी पक्ष कमज़ोर होता है तो भाजपा के लिए अपने-आप जगह बनेगी। गौरतलब है कि वामपंथी नेताओं खास कर विजयन के हिन्दू वोट पर ज्यादा फोकस करने का नुकसान पार्टी को हुआ। ईसाई और मुस्लिम वोट कांग्रेस की ओर गोलबंद हुआ। अगर हिन्दू वोट वामपंथ से टूट कर भाजपा की ओर आता है तो भाजपा और कांग्रेस का आमने-सामने का मुकाबला बनेगा, जिसमें भाजपा को फायदे की संभावना दिख रही है।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन
अमरीका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो पिछले सप्ताह भारत के दौरे पर थे। वे जब दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे तो वहां की तस्वीरें देख कर भाजपा के इकोसिस्टम ने सोशल मीडिया में बढ़-चढ़ कर प्रचारित किया कि भारत ने अमरीका को हैसियत बता दी। अमरीकी विदेश मंत्री का स्वागत करने सिर्फ अमरीकी राजदूत और भारत सरकार के दो जूनियर अधिकारी पहुंचे थे। प्रोटोकॉल के तहत ही रूबियो को हवाई अड्डे पर स्वागत, लेकिन उसके बाद अमरीकी विदेश मंत्री हवाई अड्डे से निकले और सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचना अभूतपूर्व था, जहां प्रधानमंत्री उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। वहां रूबियो ने प्रधानमंत्री के साथ एक घंटे तक द्विपक्षीय वार्ता की, जिसके बारे में बताया गया कि ऊर्जा सुरक्षा से लेकर तकनीक, व्यापार और पश्चिम एशिया के संकट के बारे में बात हुई। सोचने वाली बात है कि यह प्रोटोकॉल का कितना बड़ा उल्लंघन है कि भारत का प्रधानमंत्री किसी देश के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रहा है। आमतौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है। इस लिहाज से रूबियो की बात जयशंकर से होनी चाहिए थी। ऐसा कभी नहीं होता है कि प्रधानमंत्री किसी देश के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करें।
अन्ना डीएमके के लिए खतरा
आमतौर पर विपक्षी पार्टियां अपने विधायकों-सांसदों को भाजपा द्वारा तोड़े जाने को ऑपरेशन लोटस ही कहती है। अब तमिलनाडु में इसी तर्ज पर एक ऑपरेशन की चर्चा है, जिसका नाम है ऑपरेशन ‘एल’। यहां ‘एल’ का मतलब है लॉटरी या लीमा या लीव। इस ऑपरेशन के चलते ई. पलानीसामी की पार्टी अन्ना डीएमके का अस्तित्व खतरे में है। पहले तो विधानसभा चुनाव के तत्काल बाद उसके 47 में से 30 विधायकों ने बगावत कर विश्वास प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को समर्थन दे दिया। अब शेष 17 में से चार विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। ये चारों विधायक अब विजय की पार्टी टीवीके में शामिल होकर उसके टिकट पर उप-चुनाव लड़ेंगे। सबसे ज्यादा दिलचस्प मामला लॉटरी और लीमा का है। गौरतलब है कि लॉटरी किंग के नाम से मशहूर सैंटियागो मार्टिन की पत्नी का नाम लीमा रोज मार्टिन है। वह अन्ना डीएमके की टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीती हैं। उनके दामाद आधव अर्जुन टीवीके के नेता है और विजय की सरकार में मंत्री है। माना जा रहा है कि आधव अर्जुन और उनकी सास लीमा रोज मार्टिन अन्ना डीएमके को तोड़ने का अभियान चला रहे हैं। इस अभियान का मकसद टीवीके को अकेले दम पर बहुमत दिलाना है। अभी टीवीके की 107 सीटें हैं। मुख्यमंत्री विजय दो सीटों से जीते थे। एक सीट से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। सो, अब पांच सीटें खाली हैं, जिन पर उप-चुनाव होगा। जल्दी ही कुछ और विधायकों का इस्तीफा होगा। बहुमत का आंकड़ा 118 का है। यानी से कम 11 सीटें और जीतने की ज़रूरत हैं।
विद्यार्थियों की परेशानी
समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार और उसकी एजेंसियां शिक्षा व छात्रों के साथ क्या करना चाहती हैं? 12वीं की परीक्षा में कापियों की दोबारा जांच के चक्कर में इस समय लाखों छात्र भटक रहे हैं तो नीट के करीब 23 लाख छात्रों की किस्मत भी अधरकम में लटका दी गई है। अब सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे है। गत 24 मई को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की आईएएस, आईपीएस सहित दूसरी केंद्रीय सेवाओं के लिए प्रारंभिक परीक्षा हुई। परीक्षा के बाद ही प्रश्न पत्र को लेकर सवाल उठने लगे। ऐसा लग रहा है कि सारे प्रयोग सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ही करना चाहती है। बताया जा रहा है कि इस साल यूपीएससी का पेपर इतना जटिल था कि ज्यादातर छात्रों को समझ ही नहीं आया। कुछ लोगों का कहना है कि अगर पेपर सेट करने वालों को भी इस परीक्षा में बैठा दिया जाता तो वे 30 फीसदी से ज्यादा सवाल नहीं हल कर पाते।
शहीद दिवस पर कांग्रेस करेगी दावा
ममता बनर्जी भले कह रही हैं कि जून में विपक्षी गठबंधन की बैठक होगी। उनकी पार्टी के नेता कांग्रेस के साथ फिर से सद्भाव बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अभी उनके साथ सद्भाव दिखाने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में सत्ता बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेस ने झंडा बुलंद किया है। प्रदेश कांग्रेस के नेता तृणमूल के ज़िला व पंचायत स्तर के कई कार्यालयों पर कांग्रेस का झंडा लगा रहे हैं। उनका कहना है कि ये सब पहले कांग्रेस के कार्यालय थे, जिन पर ममता बनर्जी की पार्टी ने कब्ज़ा कर लिया था। इस बीच खबर है कि ममता बनर्जी हर साल शहीद दिवस का जो कार्यक्रम करती हैं, उस पर भी कांग्रेस दावा करेगी। गौरतलब है कि 21 जुलाई, 1993 को ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रदर्शन के दौरान कोलकाता में युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता पुलिस गोलीबारी में मारे गए थे। कांग्रेस का कहना है कि मारे गए कार्यकर्ता युवा कांग्रेस के थे, इसलिए उनकी शहादत पर कार्यक्रम भी कांग्रेस करेगी। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने से पहले ममता बनर्जी कांग्रेस के बैनर तले ही शहीद दिवस का कार्यक्रम आयोजित करती थी। अब कांग्रेस इस पर दावा कर रही है और बताया जा रहा है कि इस साल 21 जुलाई को कांग्रेस भी कार्यक्रम करवाएगी।





