क्या पुतिन का 150 साल जीने का सपना पूरा हो सकेगा ?
रूस में बुढ़ापे को जवानी में बदलने का तरीका ढूंढा जा रहा है। राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन उम्र लम्बी करने की इस रिसर्च पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। रिसर्च को न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज नाम दिया गया है, जिस पर तकरीबन 26 बिलियन डॉलर खर्च किए जाने हैं, यानी 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक 2024 में यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया था जिसका लक्ष्य 2030 तक 1 लाख 75 हजार जिंदगियां बचाना है हालांकि यह रिसर्च पुतिन के इस दावे से जुड़ा हुआ भी देखा जा रहा है जो उन्होंने जिनपिंग से हॉट माइक पर बातचीत के दौरान किया था। जिनपिंग ने इस पर हैरानी भी जताई थी। बाद में क्रेमलिन ने इसकी पुष्टि की थी।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार पिछले साल सितंबर में बीजिंग में द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ मनाई गई थी। इस दौरान चीन ने विशाल सैन्य परेड आयोजित की थी, जिसमें पुतिन मेहमान बनकर गए थे। इस बीच जब पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ तियानमेन स्क्वायर पर चल रहे थे, तब उनकी बातचीत एक माइक्रोफोन ने पकड़ ली थी।
इस दौरान पुतिन के ट्रांसलेटर ने चीनी भाषा में कहा था कि अगर मानव अंगों को लगातार प्रत्यारोपित किया जा सके तो आप जितना चाहे उतने लंबे समय तक जी सकते हैं। यहां तक कि अमरता भी संभव है। जिनपिंग ने इसके जवाब में कहा था कि कुछ लोग अनुमान लगाते हैं कि इस सदी में मनुष्य 150 साल तक जी सकते हैं। चीनी मीडिया में ये प्रसारित होने के बाद क्रेमलिन ने इसकी पुष्टि की थी। खुद पुतिन ने कहा था कि अंग प्रत्यारेपण इसकी उम्मीद जगाते हैं कि जीवन आज की तुलना में काफी अलग तरीके से जारी रहेगा।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार रूस के अधिकारियों ने इस परियोजना को न्यू टेक्नोलॉजीज फॉर हेल्थ प्रिजर्वेशन नेशनल प्रोजेक्ट का नाम दिया है। यह एक सरकारी कार्यक्रम है। पिछले माह रूस की सरकार ने इस बात का ऐलान किया था कि प्रोजेक्ट के तहत वह बढ़ती उम्र को रोकने के लिए जीन थेरेपी विकसित कर रहे हैं। रूस के डिप्टी साइंस मिनिस्टर डेनिस के मुताबिक बुढ़ापे से लड़ाई में यह एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है। बताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट चार स्तर पर काम कर रहा है।
जीन थेरेपी- रूसी सरकार ने घोषणा की है कि वैज्ञानिक जीन थेरेपी विकसित कर रहे हैं जो सेलुलर एजिंग को धीमा करने के लिए डिजाइन की गई है। यह थेरेपी डीएनए स्तर पर बुढ़ापे के बढ़ने के तरीके को प्रभावित करेगी।
बायोप्रिंटिंग- इससे वैज्ञानिक मानव अंगों के ऊतक से चूहे की थायरॉइड ग्रंथी को बायोप्रिंट करने का दावा किया है। टारगेट 2030 तक बायोप्रिंट से अंग प्रत्यारोपण को सफल बनाना है।
जेनोट्रांसप्लांटेशन- मिनी पिग में इंसानों के इलाज के लिए अंग तैयार किए जाएं। यह अंग ज़रूरत पढ़ने पर इंसान के शरीर में लगाए जा सकेंगे। इसमें छोटे पिग की जेनेटिक एडिटिंग की जाती है, ताकि उसका शरीर मानव शरीर से मैच कर सके। इसमें किडनी, हार्ट, लिवर विकसित किए जा सकेंगे।
क्रायोथेरेपी- इसमें बहुत कम तापमान करके इलाज किया जाता है। खास तौर से चोट के बाद टिश्यू को राहत देने के लिए कैंसर सेल्स या एबनॉर्मल टिश्यू को फ्रीज करके खत्म किया जा सकता है। शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली कोशिकाओं को रोकने का इलाज की क्रायोथेरेपी कहलाता है।
जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट को पुतिन की बेटी मारिया वोरोत्सेवा लीड कर रही हैं। वह एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं और राज्य आनुवंशिकी कार्यक्रमों की निगरानी करती हैं। इसके अलावा भौतिक विज्ञानी मिखैल कोवाल्चुक जो कुर्चातोव इंस्टीट्यूट के प्रमुख बताई जा रहे हैं। ये पुतिन के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने तर्क दिया था कि विज्ञान जल्द ही मनुष्यों को अनिश्चित काल तक शरीर के अंगों की मुरम्मत और प्रतिस्थापन करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने रूसी मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि अमरत्व मुश्किल है, लेकिन मनुष्य की मुरम्मत करने की क्षमता ज़रूर बढ़ेगी।
रिपोर्टस के अनुसार रूस में लोगों की उम्र कम हो रही है। 2024 में रूस में औसत उम्र 73.44 साल थी। इनमें महिलाओं की जीवन प्रत्याशा 78.88 साल जबकि पुरुषों की केवल 68.26 साल है। अगर अमरीका से तुलना करें तो वहां पुरुषों की औसत उम्र 74 साल और पश्चिमी यूरोप में 78.80 साल है। रूसी पुरुषों की जीवन प्रत्याशा महज 68 साल होना पश्चिमी औसत से बहुत कम है। इसीलिए रूसी अधिकारियों ने इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय जनसांख्यिकीय चिंताओं से जोड़ा है जिसमें घटती जनसंख्या प्रवृत्तियां और पुरुषों की कम उम्र भी शामिल है।
क्रेमलिन के इस प्रोजेक्ट पर खास ध्यान देने की वजह पुतिन भी माने जा रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों ने ये दावा किया है कि पुतिन एंटी एजिंग रिसर्च अपने लिए करा रहे हैं ताकि लंबे समय तक शासन कर सकें। हालांकि पुतिन ऐसे पहले व्यक्ति नहीं जो अपरंपरागत विज्ञान के प्रति इतनी रुचि दिखा रहे हैं। 1920 में एलेक्जेंडर ओग्दानोव ने भी रेजुवेनेटिंग ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराया था, हालांकि वे 55 साल की उम्र में अपना खुद ही इलाज करने के चक्कर में मारे गए थे। क्या बुढ़ापा रोकना संभव है? इस पर हार्वर्ड मैडीकल स्कूल के प्रोफेसर डेविड सिंक्लेयर ने एंटी एजिंग पर कई शोध किए हैं। फरवरी 2026 में वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में उन्होंने कहा था कि हम इतिहास में पहली बार परीक्षण करने वाले हैं कि क्या हम बुढ़ापे को उलट सकते हैं और बीमारियों को ठीक कर सकते हैं? उनका शोध एपिजेनेटिक प्रोग्रामिंग थेरेपी पर आधारित है जो कोशिकाओं को अधिक युवा अवस्था में पुनर्स्थापित करने के लिए डिजाइन की गई है। डेविड की टीम ने पाया है कि एपिजेनेटिक उम्र को उलटा किया जा सकता है। डेविड के मुताबिक अमरीका में, स्वस्थ जीवनकाल को एक साल बढ़ाने से उत्पादकता में सुधार से लगभग 38 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक मूल्य उत्पन्न हो सकता है। पुतिन का यह प्रोजेक्ट कितना सफल होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन प्रत्येक मानव की इच्छा रहती है कि युवावस्था वाला जोश लम्बी उम्र तक बना रहे।



