कॉकरोच जनता पार्टी की सक्रियता
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के किसी मामले के संदर्भ में की गई एक टिप्पणी को लेकर देश में जिस तरह का माहौल पैदा हुआ या पैदा करने का यत्न किया जा रहा है, वह देश के सामने गम्भीर सवालों और इसकी व्यवस्था में रह गई बड़ी त्रुटियों की ओर ध्यान केन्द्रित करता है। अमरीका में गये अभिजीत दीपके द्वारा नीट, सी.बी.एस.ई. और अन्य केन्द्रीय परीक्षाओं में रह गई त्रुटियों को लेकर सोशल मीडिया पर व्यंगमयी ढंग से कॉकरोच जनता पार्टी बनाकर उसके माध्यम से उजागर किया गया था, जिसको देश भर में लोगों द्वारा बड़ा प्रोत्साहन मिला। इस पार्टी के साथ नौजवान अधिक संख्या में जुड़े। फिर तेज़ी के साथ सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के साथ जुड़ने वालों की संख्या करोड़ों तक पहुंच गई थी।
अमरीका से वापस आकर जंतर-मंतर में अभिजीत दीपके नीट पेपर लीक और सी.बी.एस.ई. द्वारा 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के पेपरों की ऑन स्क्रीनिंग करवाई गई त्रुटिपूर्ण मार्किंग विरुद्ध रोष प्रकट करने पर इस कारण देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने के लिए हज़ारों नौजवानों सहित इकट्ठे हुए। उसका बड़ी सक्रियता से स्वागत किया गया। उसके द्वारा बनाई गई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के पक्ष में नारे लगाए गये और ‘नीट’ पेपर लीक होने के लिए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आरोपी ठहराया गया और उसके इस्तीफे की मांग की गई। इस इकट्ठ में लद्दाख के नेता सोनम वांगचुक के अलावा वामपंथी पार्टियों के कई नेता भी शामिल हुए। दीपके और उसके साथियों ने केन्द्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए एक सप्ताह का नोटिस दिया। उन्होंने कहा कि यदि वह एक सप्ताह के अंदर इस्तीफा नहीं देते तो इसके विरुद्ध दिल्ली के जंतर-मंतर से एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। कॉकरोच जनता पार्टी के इन नेताओं की चेतावनी का केन्द्र सरकार पर कितना असर होता है, यह आगे देखने वाली बात होगी। यह भी देखने वाली बात होगी कि सोशल मीडिया के माध्यम से अस्तित्व में आई यह नई पार्टी कितनी सक्रिय हो सकेगी?
नि:संदेह भारत इस समय बेरोज़गारी, गरीबी तथा महंगाई आदि अनेक अन्य समस्याओं से जूझ रहा है। सैद्धांतिक रूप में भी अलग-अलग पार्टियां अपने एजेंडे के अनुसार कार्य करती दिखाई दे रही हैं। इस नई पार्टी के नेताओं ने सत्तासीनों पर राजनीति में हिन्दू-मुस्लिम का मामला खड़ा करके वोट हासिल करने का गम्भीर आरोप भी लगाया है। हम भी ऐसे साम्प्रदायिक एजैंडे से सहमत नहीं हैं, परन्तु इस मुद्दे पर कई राष्ट्रीय तथा प्रांतीय पार्टियां भी लगातार आवाज़ उठाती रही हैं। अनेक कारणों से आज कांग्रेस तथा देश की अन्य विपक्षी पार्टियां चुनावों में भाजपा से पिछड़ रही दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी-अपनी विचारधारा के अनुसार सक्रियता अवश्य जारी रखी हुई है। विगत महीनों में ही देश में कई विधानसभाओं के चुनाव हुए हैं। उनमें चाहे भाजपा की भारी बढ़त अवश्य दिखाई देती है, परन्तु दूसरी पार्टियों ने भी कई स्थानों पर अपनी जीत के झण्डे गाढ़े हैं। अब वह फिर एक मंच पर एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला करने के लिए नई रणनीति तैयार कर रही हैं।
ऐसी स्थिति में कॉकरोच जनता पार्टी विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र तथा अन्य मुद्दों पर किस प्रभावशाली ढंग से अपना अस्तित्व दिखा सकेगी, इसके बारे में निश्चित रूप से अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, परन्तु ऐसा उभार तथा उबाल इस बात की ओर संकेत अवश्य करता है कि भारतीय सरकारों को समाज में रह गईं बड़ी त्रुटियों की ओर तत्काल ध्यान देने की ज़रूरत होगी। एकाएक उठा असंतोष भी इन गम्भीर सामाजिक त्रुटियों की ओर इशारा करता दिखाई दे रहा है, जिसकी ओर सरकार के साथ-साथ विपक्षी पार्टियों तथा समाज के सभी चेतन वर्गों को गम्भीरता से ध्यान देने की ज़रूरत होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

