सिर्फ ससराली बांध ही नहीं, लुधियाना के कई पुराने बांध भी खतरे की घंटी
लुधियाना, 11 जुलाई (परमिंदर सिंह आहूजा/प्रदीप भंडारी)- वर्ष 2025 की बाढ़ से हुई तबाही को लोग आज भी नहीं भूले हैं। उस समय बांध टूटने से पंजाब के कई इलाकों में घरों, फसलों और संपत्ति को भारी नुकसान हुआ था। अब मानसून के बीच लुधियाना के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल ससराली बांध पर जियोट्यूब बैग लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार लुधियाना के कई अन्य बांध 40 से 50 वर्ष पुराने हैं और उनकी हालत काफी जर्जर हो चुकी है।
ग्रामीणों का दावा है कि यदि इन पुराने बांधों को समय रहते मजबूत नहीं किया गया और वहां भी जियोट्यूब बैग नहीं लगाए गए, तो आने वाले मानसून में बाढ़ का पानी सिर्फ गांवों तक ही नहीं बल्कि लुधियाना शहर तक भी पहुंच सकता है।
स्थानीय लोगों ने यह भी चेतावनी दी कि ससराली बांध के पास लगाए गए जियोट्यूब बैगों के आसपास मौजूद रेत को किसी भी स्थिति में नहीं हटाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि यह सुरक्षा परत हटाई गई, तो बांध की मजबूती प्रभावित हो सकती है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से ससराली बांध को मजबूत करने का कार्य जारी है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि केवल एक बांध नहीं, बल्कि लुधियाना के सभी पुराने और कमजोर बांधों की जल्द मरम्मत और सुदृढ़ीकरण किया जाए, ताकि मानसून के दौरान किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके।

