ऐसे तो समाज की नींव हिल जाएगी
मेरठ के हस्तिनापुर में विगत 17 जुलाई को दामिनी नामक युवती ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर षड्यंत्र किया और अपने पति को सांप से कटवा कर मार दिया। बीते कुछ समय से आपको कुछ दिनों के अंतराल पर ऐसे समाचार पढ़ने या देखने को मिलते होंगे कि अमुक महिला ने अपने पति की हत्या कर दी। देश में कुछ ऐसे चर्चित मामले भी हैं, जिनका उदाहरण दिया जा सकता है। फिर चाहे वह नीले ड्रम हत्याकांड वाली मुस्कान रस्तोगी हो, हनीमून पर पति की हत्या करवा देने वाली सोनम रघुवंशी हो, पति की हत्या करने और साक्ष्यों को घर के भीतर ही छुपाने वाली आगरा की रूबी हो, फिर चाहे वह झारखंड की उर्मिला कुमारी हो, पति को मंदिर बुलाकर उसकी हत्या करने वाली आंध्र प्रदेश की हसिनी हो, या फिर इस समय के सबसे चर्चित मामलों में से एक केतन अग्रवाल का मामला हो, जिसको उसकी होने वाली पत्नी सिया ने अपने प्रेमी चेतन के साथ मिलकर गहरी घाटी में धकेल कर मौत के घाट उतार दिया।
झारखंड के गढ़वा में सुनीता ने अपने पति बुद्धनाथ को खाने में जहर देकर मार डाला। राजस्थान के अलवर में अनीता ने पति वीरू जाटव की हत्या के लिए चार बदमाशों को 2 लाख रुपए सुपारी दी। गिरिडीह की सोनिया खातून ने इलाज के नाम पर जंगल में पति की हत्या कर दी। ये मामले भयभीत करने वाले और वाकई संबंधों और विश्वास को पूरी तरह झकझोर देने वाले हैं। इन मामलों ने आधुनिक समाज में रिश्तों के ताने-बाने, पारिवारिक दबाव और युवाओं की मानसिकता को लेकर एक गंभीर चर्चा छेड़ दी है। वहीं अगर हम इन मामलों पर दृष्टि डालें, तो यह एक पैटर्न-सा बनता है कि इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इन घटनाओं ने समाज में विश्वास और जीवनसाथी जैसे पवित्र संबंधों पर गंभीर प्रश्न खड़े किये हैं।
भारतीय समाज में ये घटनाएं अस्वाभाविक हैं और परिवार संस्था में भरोसा रखने वाले हर व्यक्ति को उद्वेलित करती हैं। यह समाज विज्ञानियों के लिये मंथन का विषय है कि कोई स्त्री कैसे अपने पति या होने वाले पति की हत्या करने की सोच बना लेती है? सोच बनाती ही नहीं है बल्कि उसे षड्यंत्र रचकर उसे अंजाम तक पहुंचाती भी है।
प्रश्न यह भी है कि आखिर इसके पीछे वह कौन-सी सोच या स्थिति जिम्मेदार है, जो इन महिलाओं को ऐसा कदम उठाने के लिए विवश कर रही है। आखिर कोई रिश्ता किसी मोड़ इतना भयानक कैसे हो सकता है कि जीवनसाथी ही जान का दुश्मन बन जाए? आखिर जिन पुरुषों को कोई गलती नहीं, बस सिर्फ शादी कर ली इसलिए मारा जा रहा है, ऐसे मामले क्यों बढ़ते जा रहे हैं?
मनोचिकित्सकों के अनुसार, इन अपराधों को पुरुष या महिला द्वारा किए गए अपराध के रूप में नहीं देखना चाहिए। इन्हें इन्सानी त्रासदी के रूप में देखने की ज़रूरत है, जो इमोशनल असंतुलन, समस्याओं से निपटने के गलत तरीके, सोचने-समझने की क्षमता में कमी और निर्णय लेने की कमजोर क्षमता का परिणाम हो सकते हैं। वहीं आज महिलाओं पर आर्थिक, सामाजिक, भावनात्मक और अस्तित्व से जुड़े कई तरह के दबाव बढ़े हैं। कई रिश्तों में क्षमता और अधिकार को लेकर संघर्ष भी देखने को मिलता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अब कपल्स में धैर्य पहले की तुलना में कम हो गया है। इसके साथ ही लोगों को यह भरोसा भी होने लगा है कि वे कानून से बच निकलेंगे। वहीं आज के रिश्ते सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया से काफी प्रभावित हैं। बाहर से ये रिश्ते जितने मजबूत दिखाई देते हैं, भीतर से उनमें इमोशनल जुड़ाव की कमी हो सकती है। अवास्तविक अपेक्षाएं और पारिवारिक मूल्यों के साथ तालमेल न बैठा पाना भी रिश्तों में अस्थिरता बढ़ा रहा है। वहीं जबरदस्ती की शादियां और सामाजिक दबाव कई बार गंभीर अपराधों की वजह बन जाते हैं, जो हाल ही में सामने आए केतन अग्रवाल मर्डर केस में देखने को मिला। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में हत्या जैसा हिंसक कदम उठाना पूरी तरह से अवैध और अस्वीकार्य है।
वर्ष 2024 में ‘एकम न्याय फाउंडेशन’ ने पतियों की पत्नियों द्वारा की गई हत्या, झूठे आरोपों, क्रूरता और घरेलू हिंसा के कारण पुरुषों की आत्महत्या के मामलों की एक रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में पत्नियों या महिला पार्टनरों की ओर से अपने पति की हत्या के 306 मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया। इनमें से 213 मामलों में पतियों की उनकी पत्नियों और उनके प्रेमियों ने हत्या की। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे कई मामलों में प्रारंभ में पत्नियों को इसलिए नहीं पकड़ा जा सका क्योंकि उन्होंने सभी प्रमाण मिटा दिए गए थे या पतियों की हत्याओं को आत्महत्या के रूप में पेश कर परिवार, जनता और पुलिस को भ्रमित करने का काम किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, वास्तविक घटनाओं की संख्या इससे कहीं अधिक है। इसकी एक खास वजह भी है। वास्तव में, वर्ष 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने आईपीसी की धारा 497 को समाप्त करते हुए व्यभिचार यानी अडल्ट्री को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था। न्यायालय ने इसे पुराना व पितृसत्तात्मक कानून बताया था और कहा कि यह महिलाओं की स्वायत्तता और गरिमा का उल्लंघन करता है। वर्तमान स्थिति दर्शाती है कि वैवाहिक जीवन में बढ़ता अविश्वास, संवाद की कमी और नैतिक मूल्यों का हृस गंभीर अपराधों को जन्म दे रहा है। इन सभी मामलों को जोड़कर देखने पर एक ही बात सामने आती है कि प्रेम संबंधों में विश्वास और धोखे का खेल इतना खतरनाक हो सकता है कि जीवन का अंत हो सकता है। समाज में ऐसे मुद्दों पर अब खुलकर चर्चा होने लगी है, जिससे खतरे और बढ़ गए हैं। हालांकि कुछ मामलों में आरोपियों को सजा का सामना करना पड़ रहा है।



