स्पेन की बादशाहत

दुनिया भर में सबसे अधिक देखा जाने वाला फीफा विश्व कप महाकुंभ यूरोप के देश स्पेन के विश्व कप चैम्पियन बनने के साथ समाप्त हो गया। इस बार स्पेन का फाइनल मुकाबला पिछली बार की चैम्पियन अर्जेंटीना के साथ था। दोनों टीमें अपनी पूरी कोशिश के बावजूद 90 मिनट तक कोई गोल न कर सकीं। दिए गए अतिरिक्त समय के 106वें मिनट में स्पेन के खिलाड़ी फेरन टोर्रेस ने गोल करके स्पेन को विश्व विजेता बना दिया। स्पेन की टीम की यह गोल करने की 20वीं कोशिश थी।
स्पेन वर्ष 2010 में पहली बार अतिरिक्त समय में गोल करके नीदरलैंड को हराकर विश्व कप विजेता बना था। अब 16 वर्ष के बाद पिछली बार की विजेता टीम अर्जेंटीना को हराकर दूसरी बार विश्व चैम्पियन बना है। इस तरह स्पेन दो बार फीफा कप जीतने वाला देश बन गया है। दूसरा विश्व कप जीतने के बाद खुशी में खिले हुए टोर्रेस ने अपने गोल बारे में कहा, ‘सच कहूं तो मैंने ज्यादा कुछ सोचा नहीं। मैंने फुटबाल को अपनी तरफ आते हुए देखा और मैंने सभी स्पेनी लोगों की पावर से शॉट लगा दिया।’ इस मैच दौरान स्पेन की टीम ने लगभग 65 प्रतिशत समय फुटबाल को अपने कंट्रोल में रखा, जबकि अर्जेंटीना को अपने बेहतर खिलाड़ियों के सामने गेंद को अपने पास रखने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। अर्जेंटीना के लिए मुश्किल तब और बढ़ गई जब उसके एक खिलाड़ी एंजो फर्नांडज को दूसरी बार फाउल खेलने पर रैफरी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। स्पेन ने वर्ष 2008 में भी यूरोपीय चैम्पियनशिप जीती थी और उसके बाद 2010 का फीफा कप जीता था। वह विश्व कप विजेता बनने से पहले 2024 में यूरोपीय चैम्पियन बना था और अब 2026 में फुटबाल का विश्व विजेता बना है। स्पेन की यह भी विशेषता रही है कि उसकी टीम ने पूरे विश्व कप में एक ही गोल खाया है। इसी लिए उसके गोलकीपर उनै साइमन को ‘गोल्डन ग्लव’ का खिताब मिला है। दूसरा ‘गोल्डन बॉल’ का सम्मान भी स्पेन के ही खिलाड़ी रोड्री को मिला है और ‘बैस्ट यंग प्लेयर’ का सम्मान भी स्पेन के  खिलाड़ी पाव कबरसी को मिला है। यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि स्पेन की टीम में अधिकतर खिलाड़ी युवा थे। उनकी रक्षा पंक्ति (डिफैंस) मज़बूत अनुशासन में रह कर खेलती है जिसका आपस में अच्छा तालमेल था। टीम को विजेता बनाने में 19 वर्षीय लामीन यमाल का विशेष योगदान रहा। मैचों के दौरान उसकी ड्रिब्ंिलग, रफ्तार तथा रचनात्मक खेल भावना ने सभी खिलाड़ियों को टीम के रूप में खेलने के लिए प्रेरित किया, जो टीम की सबसे बड़ी ताकत सिद्ध हुई। यह स्पेन के कोच की कोचिंग का भी कमाल है कि उनकी तैयार की गई टीम लगातार पिछले  38 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में अजय रही है। अर्थात् वह एक भी मैच नहीं हारी और उसने 29 मैच जीते और 9 बराबरी पर खेले। 
दूसरी ओर यदि बात करें अर्जेंटीना की तो इसके खिलाड़ी लियोन मेसी की खूब चर्चा थी और उससे बहुत आशाएं थीं, परन्तु वह अपने देश वासियों तथा प्रशंसकों की उम्मीदों पर पूरा नहीं उतर सके। 39 वर्षीय मेसी अपना 6वां विश्व कप खेल रहे थे। परन्तु 19 वर्षीय लामीन यमाल का यह पहला विश्व कप था। इस फाइनल मुकाबले में मेसी अपना करिश्मा नहीं दिखा सके। उनकी टीम ने पूरा मैच रक्षात्मक ढंग से खेला जबकि स्पेन के युवा खिलाड़ी पूरी टीम भावना के साथ, जज़्बे के साथ और तेज़ पासिंग से खेले। स्पेन के चैम्पियन बनते ही मेसी का लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने का सपना टूट गया। दूसरी ओर स्पेन ने बेमिसाल खेल का प्रदर्शन करते हुए दूसरी बार विश्व कप विजेता बनने का सपना पूरा कर लिया। फाइनल से पहले तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में इंग्लैंड ने फ्रांस को मात देकर टूर्नामैंट में तीसरा स्थान हासिल किया। हालांकि फ्रांस के शानदार खिलाड़ी एम्बापे को इस टूर्नामैंट में किए 10 गोल के कारण ‘गोल्डन बूट’ से सम्मानित किया गया है। पिछले लम्बे समय से विश्व भर के फुटबाल प्रेमियों को फीफा विश्व कप ने अपने साथ जोड़े रखा था, अब उन्हें चार वर्ष बाद होने वाले अगले फीफा विश्व कप का इन्तज़ार रहेगा।

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