विश्व फुटबॉल की जुनूनी दुनिया पर अब स्पेन की सल्तनत

नब्बे मिनट में दोनों में से कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी थी। हालांकि स्पेन ने दर्जनों अवसर बनाये गेंद को गोल में डालने के लिए, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर एमी मार्टिनेज़ ने फाइनल में रिकॉर्ड 11 बार सफल बचाव किया, जबकि लियोनल मेसी व उनके लड़कों को कोशिश करने का भी अवसर नहीं मिला, जिससे गेम पर ला रोजा की पकड़ का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। बहरहाल, एक्स्ट्रा-टाइम के दूसरे हाफ में 39 सेकंड भी न बीते थे यानी 106वें मिनट में पेड्रो पोर्रो ने लेफ्ट से आउट-स्विंगिंग क्रॉस बैक पोस्ट की तरफ मारा, निको विलियम्स गेंद को हेड करके वापस स्पेस में डालने में कामयाब रहे और फेरन टोर्रेस ने हाफ-वॉली को जाल में डाल दिया। डाइव लगाते हुए मार्टिनेज़ देखते रह गये। प्रतियोगिता में पेड्रो का यह एकमात्र गोल था और यही निर्णायक साबित हुआ, जोकि गोल करने का 20वां प्रयास था। टोर्रेस का यह विजयी गोल 19 जुलाई 2026 को ठीक 16 वर्ष व 8 दिन बाद आया था, जब एंड्रेस इनस्टा ने नीदरलैंड्स के खिलाफ एक्स्ट्रा-टाइम में गोल करके 2010 में स्पेन को पहली बार विश्व चैम्पियन बनाया था। स्पेन की दूसरी खिताबी विश्व कप जीत भी 1-0 के अंतर से ही आयी। मैच के बाद टोर्रेस ने अपने गोल के बारे में कहा, ‘सच कहूं तो मैंने ज्यादा कुछ सोचा नहीं। मैंने गेंद को अपनी तरफ आते हुए देखा और मैंने सभी स्पेनी लोगों की पॉवर से शॉट लगा दिया।’ 
गर्मी व तेज़ धूप की वजह से पिच की घास सूख गई थी, जिसकी वजह से गेम में गति नहीं आ पायी और कलात्मक ड्रिबल करना भी कठिन रहा लेकिन इसके बावजूद स्पेन का गेंद पर कब्ज़ा 65 प्रतिशत रहा और अर्जेंटीना को अपने बेहतर प्रतिद्वंदियों के सामने गेंद अपने पास रखने में कड़ा संघर्ष करना पड़ा, जो असफल अधिक रहा। यह बात उस समय भी सही थी, जब दोनों तरफ से 11-11 खिलाड़ी मैदान में थे और ज्यादा मुश्किल उस समय हो गई, जब अर्जेंटीना के 10 ही खिलाड़ी रह गये थे; क्योंकि एंजो फर्नांडज ने दूसरी बार फाउल किया और रेफरी के पास कोई विकल्प न था कि उन्हें बेंच पर बैठा दिया जाये। यह सामान्य समय के अंत से ज़रा पहले की बात है। स्पेन एकमात्र देश है जिसने दो बार यह कमाल किया कि यूरोपीय चैम्पियनशिप जीतने के बाद फिर विश्व कप भी जीता। उसने यह कारनामा पहले 2008-2010 में किया और अब 2024-2026 में किया है। स्पेन पहला विश्व कप चैम्पियन है, जिसने पूरी प्रतियोगिता में सिर्फ एक गोल खाया, इसलिए उसके गोलकीपर उनै साइमन को गोल्डन ग्लव से सम्मानित किया गया। 
गौरतलब है कि गोल्डन बॉल स्पेन के रोड्रि को मिली। बेस्ट यंग प्लेयर भी स्पेन के पाव कबरसी रहे और फेयर प्ले अवार्ड नीदरलैंड्स को मिला। तीन प्रमुख प्रतियोगिताएं- कोपा अमेरिकास (2021 व 2024) और विश्व कप 2024 लगातार जीतने के बाद मेसी की अर्जेंटीना चौथे फ्रंटियर पर नाकाम हो गई, विशेषकर इसलिए कि 8 बार बैलोन डी’ ओर जीतने वाले 39 वर्षीय मेसी, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में 8 गोल व 4 असिस्टस का श्रेय प्राप्त किया, को फाइनल में बामुश्किल ही गेंद को स्पर्श करने का अवसर मिला; क्योंकि स्पेन का दबदबा ही कुछ ऐसा था। पूरे फाइनल में मेसी कभी भी ऐसे नहीं लगे कि वह अर्जेंटीना का खिताब बरकरार रखने में कामयाब हो जायेंगे। हालांकि वह एकमात्र खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने देश की कप्तानी लगातार तीन विश्व कप में की है, लेकिन फाइनल में वह वैसे प्रभावी खिलाड़ी नज़र नहीं आये जैसे पहले दो विश्व कप और इस तीसरे विश्व कप के फाइनल से पहले थे। स्पेन ने अपने गेंद पर कब्ज़ा रखने वाले खेल से उतना ही बेबस कर दिया जितना उसने सेमीफाइनल में फ्रांस के एम्बाप्पे को किया था। प्रतियोगिता में 10 गोल व 4 अस्सिट्स के साथ एम्बाप्पे ने मेसी को पछाड़ते हुए गोल्डन बूट अपने नाम किया। एम्बाप्पे ने 2022 में भी गोल्डन बूट जीता था। एम्बाप्पे विश्व के एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने लगातार दो बार गोल्डन बूट जीता है। ब्राज़ील ने 1958 व 1962 में लगातार दो विश्व कप जीते थे। तब से कोई टीम ऐसी सफलता नहीं पा सकी है। अर्जेंटीना के लिए इस दोहराने का अवसर था, लेकिन स्पेन ने उसके इरादों को नाकाम कर दिया। फाइनल के बाद मेसी भावुक हो गये, उनकी आंखों से आंसू भी छलके, शायद इसलिए भी कि विश्व कप में यह उनका अंतिम मैच था।
इस जीत ने स्पेन के कोच लुई डे ला फुएंते को यह श्रेय प्राप्त हुआ कि उन्होंने सबसे अधिक आयु में अपनी टीम को विश्व कप खिताब दिलाया। वह 65 बरस के हैं। उन्होंने कहा, ‘हम विश्व चैम्पियन हैं और सब मिलकर इस मंच पर पहुंचें हैं।’ लेकिन अंतिम सीटी बजने के बाद खिलाड़ियों के बीच कुछ धक्कामुक्की भी देखने को मिली, जिसे जल्द नियंत्रित कर लिया गया। स्पेन जब जश्न मना रहा था तो अर्जेंटीना के अधिकतर खिलाड़ी अविश्वास में टर्फ पर बैठे हुए थे। आखिरकार समझदारी से काम लिया गया और स्पेन के खिलाड़ी ऑनर गार्ड में खड़े हो गये जब अर्जेंटीना का दल स्टेज पर रनर-अप मैडल लेने के लिए जा रहा था। अर्जेंटीना के कोच लियोनल स्कैलोनी ने स्वीकार किया कि स्पेन बेहतर टीम थी। बहरहाल, फीफा 2026 विश्व कप का फाइनल दो राजनीतिक विचारधाराओं के बीच भी था। एक तरफ स्पेनी सरकार के वामपंथी आदर्श थे तो दूसरी तरफ अर्जेंटीना का अति दक्षिणपंथी नज़रिया। यह टकराव सिर्फ मैदान पर ही न था बल्कि मैदान के बाहर भी था कि स्पेनी समर्थक स्टैंड में फिलिस्तीन का झंडा लिए हुए थे लेकिन इससे भी दिलचस्प मुकाबला अनुभव व यूथ का था। जहां 39 वर्षीय मेसी अपना छठा विश्व कप खेल रहे थे, वहीं 19 वर्षीय लमिने यमाल अपना पहला विश्व कप खेल रहे थे। दोनों खिलाड़ियों की आयु में 20 साल का अंतर था, जिसे अधिक दिलचस्प एक बीस साल पुराने फोटो ने भी बनाया, जिसमें मेसी शिशु यमाल को अपनी गोद में लिए हुए हैं। 
मेसी के अनुसार वह पहला अवसर था जब उन्होंने किसी बच्चे को अपनी गोद में लिया था और अब 20 साल बाद वह दोनों मैदान में आमने सामने थे। हालांकि इस विश्व कप में टेक्नोलॉजी (वीएआर), राजनीतिक हस्तक्षेप (डोनल्ड ट्रम्प के दबाव में अमरीका के खिलाड़ी पर से प्रतिबंध हटाना), हाइड्रेशन ब्रेक, फाइनल का देर से शुरू होना व अधिकतम 15 मिनट की बजाये 27 मिनट का हाफ-टाइम ब्रेक होना आदि को लेकर काफी विवाद भी रहा, लेकिन पांच ऐसे बहुमूल्य मंत्र भी सामने आये जो किसी भी क्षेत्र में किसी भी देश या कारपोरेशन के लिए सफलता का आधार बन सकते हैं। एक, टैलेंट पर फोकस करना, वह चाहे कहीं से भी हासिल हो। दो, नागरिकता में कट्टरता न दिखाना। फुटबॉल में खिलाड़ी दूसरे देश के लिए भी खेल सकता है अगर 21 वर्ष का होने से पहले तीन अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले हों। तीन, लोगों पर विश्वास करना व उन्हें साथ लाना। चार, अच्छे नियम जो सभी पर एक समान लागू होते हैं, बिना किसी भेदभाव के और पांच, अच्छा नेतृत्व। हर उस टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया जिसके पास खिलाड़ियों व कोचों का सक्षम नेतृत्व था।  
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर
 

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