गतिशीलता की उदाहरण
विगत दिवस प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के एक दिन के हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के दौरे पर व्यापक चर्चा हो रही है। श्री मोदी ने अनेक क्षेत्रों में शुरू की जाने वाली योजनाओं के नींव पत्थर रखे हैं और यह प्रभाव दिया है कि वह इसी गति के साथ भारत के मूलभूत ढांचे में बड़े और ऐतिहासिक कदमों से इसे मज़बूत बनाने के लिए तेज़ी के साथ आगे कदम बढ़ाने में यत्नशील रहेंगे। इन योजनाओं में बड़ी चर्चा जींद-सोनीपत में पहली हाइड्रोजन रेलगाड़ी (ट्रेन) को हरी झंडी देने की भी हो रही है। विगत दशकों में देश में नई, तेज़ और सुविधाओं वाली रेलगाड़ियां चलाने का सिलसिला चलता रहा है। पहले शताब्दी और अब वंदे भारत रेलगाड़ियों की और इनकी रफ्तार की बड़ी चर्चा रही है, परन्तु हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत स़फर के इस क्षेत्र में एक नया अनुभव है।
इसकी बड़ी उपलब्धि यह कही जा सकती है कि यह पूरी गाड़ी देश में ही बन कर तैयार हुई है। इससे भारत के आत्म-निर्भर होने की ओर एक और बड़ा कदम उठाया गया है। चाहे शुरू में यह रेलगाड़ी तुलनात्मक रूप में महंगी ज़रूर है परन्तु इसकी सफलता ऊर्जा के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि रखती है। इसे ़गैर पारम्परिक ऊर्जा के क्षेत्र में एक नवीनतम उपलब्धि भी कहा जा सकता है। इससे तो रेलगाड़ियां चलाने के लिए हो रही बिजली की खपत भी कम हो सकती है। पहले जर्मनी, फ्रांस, इटली, चीन और जापान ने हाइड्रोजन रेलगाड़ियां चलाने के तुज़ुर्बे ज़रूर किए हैं परन्तु उनके मुकाबले में अब भारत ने इस गाड़ी के साथ अधिक डिब्बे जोड़ कर और अधिक सफलता हासिल की है। इन देशों में दो या तीन डिब्बों वाली ऐसी रेलगाड़ियां चलती हैं परन्तु जींद-सोनीपत के बीच शुरू की गई इस रेलगाड़ी के 10 डिब्बे हैं और इसमें एक बार में 2600 यात्री स़फर कर सकते हैं। यह गाड़ी हाइड्रोजन फ्यूल सेव तकनीक के साथ चलती है, जिससे हाइड्रोजन बिजली में बदल जाती है। यह इसलिए धुआं रहित है, क्योंकि इसमें से सिर्फ भाप ही निकलती है। इससे कार्बन पैदा नहीं होती। चाहे इस क्षेत्र में भारत ने डीज़ल के स्थान पर विद्युतीय रेलगाड़ियां चला दी हैं, परन्तु हाइड्रोजन की रेलगाड़ियां उन स्थानों पर भी चलाई जा सकेंगी जहां बिजली की लाइनें डालना या तकनीक के पक्ष से ऐसा कर पाना कठिन है।
यदि भारत अपने स्रोतों द्वारा देश में बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन तैयार करने में सफल हो जाता है तो इसका तेल के आयात पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना बन सकती है। ऐसे सफल यत्न से देश में तकनीक के क्षेत्र में नए तुजुर्बे करने के प्रति हौसला और हिम्मत भी बढ़ेगी। ‘इसरो’ ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में नए से नए आयाम स्थापित कर बड़ी सफलता हासिल की है। आवागमन के क्षेत्र में नए अनुसंधानों के और भी बेहद लाभकारी होने की संभावना उजागर होनी शुरू हो गई है। इसलिए हाइड्रोजन रेलगाड़ी को इस गतिशीलता की एक अच्छी उदाहरण कहा जा सकता है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

