सभी पक्ष अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था, उसी दिन पिछले काफी दिनों से जंतर-मंतर के स्थान पर बैठे नई बनी कॉकरोच पार्टी से संबंधित हज़ारों ही युवा नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग-पत्र की मांग करते हुए रास्ते में पुलिस की ओर से लगाए गए अवरोधों को पार करते हुए संसद के निकट पहुंच गए थे। इसी रास्ते में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा कर्मचारियों में सख्त झड़पें हुईं। संसद की ओर मार्च करने का यत्न कर रही भीड़ को खदेड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और अश्रु गैस के गोले भी छोड़े।
इन झड़पों में भारी संख्या में युवाओं के घायल होने के साथ-साथ बहुत से पुलिस कर्मचारी भी घायल हुए। उसके बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में छोटे-बड़े कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के आवास के समक्ष धरना दिया। वह शिक्षा मंत्री के त्याग-पत्र की मांग कर रहे थे। हालात बिगड़ते देख कर प्रधानमंत्री द्वारा केन्द्रीय मंत्री डा. जतिन्दर सिंह और गृह सचिव गोबिंद मोहन को धरना स्थल पर भेजा गया, जिन्होंने आगामी दिनों में संसद में इन अनियमितताओं के समूचे घटनाक्रम संबंधी बहस करवाने के लिए सहमति प्रकट की, परन्तु राहुल गांधी और उनके साथियों ने धरना खत्म करने से इनकार कर दिया और वह इस बात पर बज़िद रहे कि वह केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग-पत्र देने तक यह धरना नहीं उठाएंगे। जिसके लिए सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस कर्मचारियों द्वारा ज़बरन यह धरना उठा दिया गया। अगले दिन लोकसभा में भी और राज्यसभा में भी सरकार ने स्पष्ट रूप में कहा कि वह नीट प्रश्न पत्र लीक के मामले में चर्चा करवाने के लिए तैयार है और यह भी कि विद्यार्थियों के संसद की ओर मार्च करने संबंधी भी प्रत्येक पक्ष से संसद के दोनों सदनों में चर्चा करवाई जा सकती है, परन्तु लोकसभा में कांग्रेसी सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग-पत्र की मांग को दोहराया। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने तब तक संसद का कामकाज़ न चलने देने की घोषणा की हुई है, जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से त्याग-पत्र नहीं देते। मंगलवार को एन.डी.ए. संसदीय दल की बैठक में सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक होना महा-पाप है, इस तरह की घटना पुन: न हो, इसके लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। नीट पेपर लीक होने पर शीघ्र कार्यवाही की गई थी। इसके लिए 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुन: परीक्षा करवा कर इसके परिणाम भी घोषित कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए आरोपियों को कानून के अनुसार सख्त सज़ाएं दिलाई जाएंगी। कांग्रेस द्वारा ऐसा व्यवहार धारण करने के कारण आम आदमी पार्टी ने यह आरोप लगाया है कि राहुल गांधी विद्यार्थियों के आन्दोलन का अपहरण करके कमज़ोर कर रहे हैं।
हम समझते हैं कि इस संबंध में सभी राजनीतिक पार्टियों को ज़िद्द पूरी करने के स्थान पर सदन में पेपर लीक के मामले पर विस्तारपूर्वक बहस करवानी चाहिए। विद्यार्थी मार्च के दौरान हुई झड़पों संबंधी दोनों ही पक्ष अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं। इस संबंध में भी प्रत्येक पक्ष से सदन में विस्तारपूर्वक बहस होनी ज़रूरी है। किसी अहम मामले पर सरकार की आलोचना करना, उसके विरुद्ध प्रदर्शन करना और उसके लिए सरकार से जवाबदेही लेना विपक्षी पार्टियों और आन्दोलनकारियों का हक ज़रूर बनता है परन्तु मंत्री के त्याग-पत्र संबंधी विपक्षी दलों द्वारा धारण की गई अडिग नीति से उठे इन मामलों के और भी बिगड़ने तथा स्थिति के गम्भीर होने वाले हालात बनते जा रहे हैं, उनमें से निकलना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि सरकार भी इस संबंधी हर तरह से अपनी पूरी सफाई देने के लिए तैयार हो चुकी है। त्याग-पत्र की मांग की ज़िद्द को लेकर आन्दोलनकारियों और विपक्षी पार्टियों को पुन: सोचने की ज़रूरत होगी।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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