अमित शाह के दौरे का असर
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से नशे के मुद्दे को लेकर एक बार फिर पंजाब के किए गए दौरे ने इस मामले पर एक तरह से केन्द्र-बिन्दू में ला खड़ा किया है। यह गृह मंत्री का कुछ ही दिनों में दूसरा दौरा है। इससे पहले वह भाजपा की ओर से प्रदेश को नशा मुक्त करने संबंधी शुरू किए गए अभियान में भाग लेने के लिए पंजाब आए थे। इस बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि नज़दीक आते चुनावों में भाजपा इस मामले को अपनी सक्रियता में अहम स्थान भी देगी और प्रदेश सरकार को भी इसके लिए अपना निशाना बनाएगी। अपने इस दौरे में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता में आने के समय ‘आप’ सरकार ने यह कहा था कि तीन महीनों में नशे के प्रचलन को खत्म कर देगी परन्तु इसके विपरीत पुलिस कर्मचारी ही नशों सहित पकड़े जा रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उनकी सरकार द्वारा 31 दिसम्बर, 2029 तक पंजाब को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस गम्भीर मामले के प्रति विगत अवधि में लगातार घटित हो रहे घटनाक्रम में कुछ घटनाएं अधिक उभर कर सामने आई थीं जिनमें मानसा में झोटा हत्याकांड, गुरदासपुर ज़िले के गांव माड़ी पन्नुआ में हुई बिक्रमजीत सिंह की हत्या, जो गांव के कुछ लोगों को नशा बेचने से रोकता था, जिस कारण उसकी हत्या कर दी गई थी और संगरूर ज़िले के गांव तूरबंजारा में गुलज़ार सिंह जिसने नशे का मुद्दा उठाया था, तथा फिर कथित रूप से सत्ता पक्ष के दबाव के कारण आत्महत्या कर ली थी, से संबंधित परिवारों को मिले और उन्हें जल्द से जल्द इन्साफ दिलाने का पूर्ण आश्वासन दिया। इस दौरे के दृष्टिगत पंजाब सरकार ने झोटा हत्याकांड की सी.बी.आई. से जांच करवाने का आदेश भी दिया था। इस पर गृह मंत्री ने शीघ्र इस जांच को शुरू करने की बात की। चाहे अमित शाह का यह दौरा संक्षिप्त था, परन्तु इसने इस मामले को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद छेड़ दिया है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसके लिए भाजपा को ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 तक प्रदेश में अकाली-भाजपा सरकार थी, जो इस बुरे घटनाक्रम को काबू करने में विफल रही थी। उस समय भाजपा सरकार की भागीदारी ज़रूर थी परन्तु अमन-कानून और इससे जुड़े अहम मामलों की ज़िम्मेदारी स. प्रकाश सिंह और उनके गृह मंत्री के पास थी। इसी तरह कांग्रेस भी अपने शासनकाल में इस बुरे घटनाक्रम को रोकने में असमर्थ रही थी। मौजूदा प्रदेश सरकार द्वारा चाहे नशे के गम्भीर मामले को सख्ती से खत्म करने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं। इस संबंध में सैकड़ों ही मामले तस्करों और असामाजिक तत्वों पर दर्ज किए गए हैं। उन्हें सज़ाएं भी दी गई हैं परन्तु इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि नशे का यह प्रचलन लगातार जारी रहा है। नि:संदेह इसने पंजाब की युवा शक्ति का हनन करके रख दिया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी यह कहा है कि सीमा पार से नशे की तस्करी को रोकने के लिए केन्द्र और प्रदेश सरकार को मिलकर प्रभावशाली कदम उठाने की ज़रूरत है।
हम इस बात को एक बड़ी सच्चाई समझते हैं क्योंकि इस गम्भीर मामले को पार्टीबाज़ी से ऊपर उठ कर संयुक्त रूप में लोगों के पूर्ण सहयोग से सख्त योजनाबंदी करके ही खत्म किया जा सकता है। इसके हल होने की सम्भावना भी तभी बनेगी जब इसके विरुद्ध मिलकर संयुक्त कदम उठाए जाएंगे। किसी भी अकेली सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयां क्रियात्मक रूप में हालात को पूरी तरह बदल देने में सहायक नहीं होंगी। इसलिए वायदों और दावों से ऊपर उठ कर संयुक्त अमलों की ज़रूरत होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

