1 नवंबर से बदल गए कई बड़े नियम: कमर्शियल गैस सिलेंडर और हवाई ईंधन हुआ महंगा 

नई दिल्ली, 01 नवंबर - आज यानी 1 नवंबर 2026 से देश में कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो चुके हैं, जो सीधे तौर पर आम आदमी, नौकरीपेशा, व्यापारियों और पेंशनभोगियों के जीवन को प्रभावित करेंगे। महीने की पहली तारीख से जहां एक तरफ महंगाई का झटका लगा है वहीं दूसरी तरफ कुछ मामलों में राहत देने वाले बदलाव भी किए गए हैं।

1. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और जेट ईंधन महंगा

त्योहारों के सीजन के बीच महंगाई का एक और झटका लगा है। तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में 10 से 12 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम गृहणियों को राहत मिली है। जेट फ्यूल की कीमतों में लगातार चौथे महीने इजाफा हुआ है। एटीएफ की कीमत अब 137.12 रुपये से बढ़कर 138.50 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जिससे विमानन कंपनियों का खर्च बढ़ेगा।

2. फोन स्क्रीन पर अब दिखेगा कॉलर का 'असली नाम' (CNAP)

दूरसंचार विभाग के नए नियमों के तहत 1 नवंबर से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सेवा लागू हो गई है। अब किसी भी अनजान नंबर से कॉल आने पर मोबाइल स्क्रीन पर केवल नंबर नहीं, बल्कि केवाईसी (KYC) डेटा के आधार पर कॉलर का असली नाम दिखाई देगा। इसके लिए यूजर को फोन में कोई थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी, यह टेलीकॉम ऑपरेटर स्तर पर काम करेगा।

3. टोल प्लाजा पर 1500 रुपये का रियायती पास

सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत दी गई है। केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निजी वाहन चालकों के लिए विशेष रियायती पास की व्यवस्था शुरू की है। अब स्थानीय लोग सालाना मात्र 1,500 से 3,000 रुपये खर्च करके पूरे साल उस टोल से बेरोक-टो टोक आ-जा सकेंगे।

4. पेंशनर्स के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान

देश भर के पेंशनभोगियों के लिए रविवार (1 नवंबर) से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान शुरू हो गया है। अब 80 वर्ष से कम उम्र के पेंशनभोगी घर बैठे अपने स्मार्टफोन से फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा स्कैन कर) अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं, जिसकी अंतिम तिथि 30 नवंबर तय की गई है।

5. म्यूचुअल फंड और जीएसटी से जुड़े अहम बदलाव

म्यूचुअल फंड: एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब 'डायरेक्ट प्लान' डिफॉल्ट होगा। यदि कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनता है, तो सिस्टम पहले उसे दोनों के खर्च का अंतर समझाएगा। कारोबारियों के लिए जीएसटी प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। अब बिक्री के बाद छूट, क्रेडिट नोट जारी करने, आईटीसी (ITC) रिफंड और दूसरे राज्यों में ई-कॉमर्स पंजीकरण में काफी सहूलियत मिलेगी।

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