शादी के बाद आपसी रिश्तों को सफल बनायें


प्रत्येक घर का अपना अलग माहौल होता है। शादी के बाद लड़की अचानक अलग माहौल में आई होती है और वह अपने पुराने घर के माहौल के अनुसार ढली होती है। नए माहौल के अनुसार ढलने के लिए उसको थोड़ा समय देना चाहिए और उस पर किसी किस्म का दबाव नहीं बनाना चाहिए। लड़की को अपने ससुराल परिवार के साथ समय बिताना चाहिए। मोबाइल का प्रयोग जितना हो सके कम करना चाहिए। लड़की अपने सास-ससुर को अपने माता-पिता और सास-ससुर अपनी बहू को अपनी बेटी बनाकर रखें। 
प्रत्येक छोटी-छोटी बात को मायके घर जाकर मां को बताना भी कई बार रिश्तों के टूटने का कारण बनता है। सास को भी चाहिए कि वह अपनी बहू से संबंधित बातें आस-पड़ोस में न करें। लड़की के बनाए खाने की सभी को तारीफ करनी चाहिए।
 लड़की को अपने पति तथा अन्य पारिवारिक सदस्यों की पसंद को धीरे-धीरे जानना चाहिए। सास को चाहिए कि वह अपनी बहू को इस संबंधी बताये और बहू को भी यदि कोई पकवान बनाना नहीं आता तो अपनी सास से पूछने के समय संकोच नहीं करना चाहिए। यदि लड़की कोई ऐसा पकवान बनाती है, जो उसके मायके घर बनाया जाता है, परन्तु ससुराल घर नहीं, तो ससुराल घर को इसका मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। बहू की पसंद का भी ख्याल रखना चाहिए।
नव-विवाहित लड़की को इतनी जल्दी घर में अकेले न छोड़ें, क्योंकि उसको नये रिश्तों को पहचानने में समय लगता है। घर में किसी रिश्तेदार के आने पर अकेली होने पर वह अचानक घबरा सकती है। लड़के या उसके पारिवारिक सदस्यों को कभी भी लड़की के मायके के बारे में ऐसी बात नहीं करनी चाहिए जो लड़की को बुरी लगे। यदि ननदें कुंवारी हैं, तो ननद-भाभी को सभी कार्य बांट कर करने चाहिए। सास को चाहिए कि वह प्रत्येक कार्य की ज़िम्मेदारी निश्चित करे। किसी एक पर घर के सभी कार्यों की ज़िम्मेदारी न डालें। 
सास और ससुर को बहू के कार्यों में हर समय त्रुटि या आलोचना नहीं करनी चाहिए। यदि बहू को कुछ कहना है तो प्यार से बैठकर समझाना चाहिए। माता-पिता को सभी लड़कों को और उनकी पत्नियों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए, नहीं तो भाईयों और उनकी पत्नियों में इस बात की हीन भावना आ सकती है जो बाद में लड़ाई का कारण बनती है। नौकरी करने वाली बहू के आराम के समय का ध्यान भी सास को रखना चाहिए। 
हर समय उनको घर के कार्य के बारे में सुनाना अच्छी बात नहीं। और बहू को भी चाहिए कि नौकरी का बहाना लगाकर हर समय कार्य से जी न चुराये। लड़की को यदि घर में मुश्किल आती है, तो उसको सबसे पहले अपने पति के साथ बातचीत करनी चाहिए, सास-ससुर को भी चाहिए कि वह बहू के परिवार या बिचौले के साथ बात करने की बजाय आपस में बातचीत करके ही मामला हल करें। 
लड़की को अपने लिए अलग होने या अलग घर की मांग नहीं करनी चाहिए। लड़की को समझना चाहिए कि उसका पति, पति होने के अलावा एक बेटा भी है। माता-पिता से अलग होने पर वह मानसिक रूप में परेशान रहेगा। लड़के को अपनी मां और पत्नी दोनों को सुनना चाहिए और दोनों को उनके बनते हक और सम्मान देना चाहिए। पुत्र की शादी के बाद मां को यह एहसास होने लगता है कि उसका बेटा उसको कम और अपनी पत्नी को ज्यादा प्यार और समय देता है, मां को कभी भी इस तरह नहीं सोचना चाहिए। उसको समझना चाहिए कि एक लड़की अपना घर-परिवार छोड़कर उनके घर आई है और वह उसकी बहू है। घर में नया सदस्य आने से प्यार का बंट जाना स्वाभाविक भी है। 
यदि घर में कोई नई चीज़ आती है तो उसकी खुशी सभी के साथ सांझी करनी चाहिए। कई बार देखने में आता है कि बहू-सास कई बार नई चीज़ें या अपने कपड़े आदि लाती हैं, परन्तु वह एक-दूसरे को दिखाती नहीं। एक-दूसरे से पूछकर-बताकर कार्य करने से आपसी प्यार बढ़ता है, कम नहीं होता। यदि सास बीमार है तो बहू को चाहिए कि उसकी अच्छी तरह से देखभाल करे, उसकी दवाइयां लेने के समय का ख्याल रखे। यदि सास स्वस्थ है तो उसको चाहिए कि बहू के साथ कुछ काम में हाथ बंटा लिया करे। कार्य करने से बीमारियां कम लगती हैं और शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है।
नौकरीपेशा पति-पत्नी ने कई तरह के लोगों के साथ मेल-मिलाप करना होता है। इसलिए कभी भी एक-दूसरे पर संदेह न करें। संदेह और गलतफहमी से रिश्ते-टूटते देर नहीं लगती। नौकरीपेशा पति-पत्नी को एक-दूसरे के वेतन का पता होना चाहिए। पत्नी को पति की सहमति के बिना अपना वेतन अपने मायके वालों को नहीं देना चाहिए। 
—चरणजीत सिंह कपूर