अंडर-17 फीफा विश्व कप कैसी होगी भारत की कारगुज़ारी


हालांकि 6 से 28 अक्तूबर तक भारत की मेजबानी में खेले जाने वाले अंडर-17 फीफा विश्वकप के 17वें चरण में 24 टीमों के बीच खेले जाने वाले कुल 52 मैचों के बाद ही तय होगा कि इस वर्ग में चैम्पियन का ताज किसके लिए सजेगा। लेकिन फुटबॉल के गलियारों की उधेड़ बुन दिन-प्रतिदिन रोमांचक बनती जा रही है। अब जबकि टूर्नामैंट के ड्रा अनुसार ग्रुप ‘ए’ में भारत, अमरीका, कोलम्बिया और घाना को ही रखा गया है, ग्रुप ‘बी’ में पैरागुआ, माली, न्यूज़ीलैंड और तुर्की,  ग्रुप ‘सी’ में ईरीन, गुऐना, जर्मनी और कोस्ट्रीका, ग्रुप ‘डी’ में कोरिया, नाइजीरिया, ब्राज़ील और स्पेन ‘ई’ में होडूरास, जापान, न्यू कैलेडोनिया और फ्रांस तथा ग्रुप ‘एफ.’ में इराक, मैक्सिको, चिल्ली और इंग्लैंड को रखा गया है।
मेजबान होने के नाते विश्वकप में पहली बार भारतीय टीम घरेलू मैदान में उतर रही है। इसके मद्देनज़र खेल प्रेमियों के लिए यह चर्चित विषय है कि इस बड़े टूर्नामैंट में भारत की कारगुज़ारी कैसी होगी? भारतीय फुटबॉल के शुभचिंतक टीम की सम्भावनाओं के साथ-साथ फीफा विश्वकप में भारत को मिलने वाली चुनौती से अच्छी तरह वाकिफ हैं। भारतीय टीम के कोच लूई नोर्टन डी. माटोस का मानना है कि भारतीय टीम का पहला चरण बेहद मुश्किल भरा है, पर यकीनन ही भारतीय  टीम के हौंसले बुलंद है, पिछले कुछ समय से टीम का मनोबल ऊंचा है और दोस्ताना मैचों में भारत ने लगातार सराहनीय जीतों को हासिल किया है। कुल मिलाकर भारत के ग्रुप मैचों पर नज़र दोहराएं तो पता चलता है कि सफर बेहद मुश्किलों भरा है। पहली नज़र में कड़वे सच को कबूल करते हुए यह कहना पड़ेगा कि भारत की अगले चरण में पहुंचने की सम्भावना अक्सर न के बराबर है। मेजबान भारत का पहला मुकाबला 6 अक्तूबर को अमरीका के साथ है, जबकि अमरीका की टीम अभी तक खेले गए विश्वकप मुकाबलों में सिर्फ एक बार ही क्वालीफाई करने में असफल रही है। वह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। भारत का दूसरा मैच 9 अक्तूबर को कोलम्बिया के साथ होगा। यह टीम दक्षिण अमरीका क्षेत्र की एक मजबूत टीम मानी जाती है और फुटबॉल की दुनिया में कोलम्बिया एक जाना-पहचाना नाम है। भारतीय टीम अपना अंतिम ग्रुप मैच 12 अक्तूबर को घाना के विरुद्ध खेलेगी। घाना अफ्रीका क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है और टूर्नामैंट के 32 सालों के इतिहास में घाना दो बार ट्राफी अपने नाम कर चुका है। इसके अलावा ब्राज़ील, चिल्ली, जापान, इराक, मैक्सिको आदि मजबूत टीमें ट्राफी लेने के लिए करो या मरो तक जाने के लिए पूरी शक्ति लगाने को तैयार हैं।
दरअसल भारतीय टीम की तैयारियों के मद्देनज़र भी कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले, माटोस की टीम के साथ जुड़ने से पहले कोच जर्मनी निकोलाई एडम को खिलाड़ियों के साथ किए दुर्व्यवहार के कारण निलम्बित कर दिया गया था, जिस कारण टीम का ट्रेनिंग के प्रति नकारात्मक प्रभाव डालना सम्भव था। प्रत्येक कोच का ट्रेनिंग के प्रति नज़रिया अलग होता है, जर्मन फुटबॉल अलग तरह का है। जबकि पुर्तगाल कोच का तरीका अलग है। वैसे माटोस का कहना है कि अमरीका, कोलंबिया, घाना की टीमें मजबूत है, इसके प्रति सकारात्मक सोच होना अहम है। अब जबकि भारतीय टीम का रहना आसान नहीं है। लेकिन भारतीय टीम में हो रहा सुधार उत्साहवर्धक है। पिछले दिनों भारतीय टीम के पुर्तगाल और इटली के दौरे पर भारत ने इटली की वालमोनटोन सिटी अंडर-17 टीम को हराने और पुर्तगाल में खेले गए मैच में एस.एस. बेनफीका अंडर-17 टीम के साथ ड्रा खेलने को शुभ संकेत कहा जा सकता है।
अभी तो भारतीय टीम की जीतने की सम्भावनाएं कम हैं परन्तु टीम ने पिछले लगभग दो महीनों से लगातार सुधार की ओर बढ़ते कदमों को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि टीम जीतने के लिए ही खेलेगी। अगर ड्रा भी खेलते हैं तो भारत के लिए यह अच्छा परिणाम कहा जाएगा।
क्या भारत को घरेलू मैदान, पर्यावरण और मौसम का लाभ मिलेगा? ऐसी सम्भावना कम ही नज़र आती है, क्योंकि घाना और कोलम्बिया जैसी टीमें अक्सर ऐसे वातावरण में खेलने की आदी हैं, जबकि अमरीका इस विश्व कप के लिए अपनी टीम दुबई में तैयार कर रहा है।