जीने का अंदाज़ सिखाती है हंसी


आज की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव, पैसे कमाने की होड़, मुकाबले की भावना, ईर्ष्या से भरे समाज ने हमारे होठों से मुस्कान का नामों-निशान तक गायब कर दिया है। हालिया एक सर्वे के अनुसार करीब 65 प्रतिशत से अधिक लोगों के पास हंसने तक का समय नहीं है। शायद इसीलिए मधुमेह, हृदय, रक्तचाप सहित अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि अगर हर दिन सुबह हंसा जाए तो दिमाग को सुकून मिलता है और बीमारियां नज़दीक नहीं फटकती हैं।  विश्व हास्य दिवस हर वर्ष मई के प्रथम रविवार को मनाया जाता है।  वैसे विश्व हास्य दिवस की शुरुआत 11 जनवरी, 1998 को मुंबई से हुई थी। इसमें अहम योगदान डा. मदन कटारिया का था। जिन्होंने लॉफ्टर योगा मूवमेंट शुरू किया। दुनिया में करीब आठ हजार लॉफ्टर क्लब हैं। देश में इनकी संख्या 600 के लगभग है। देश में सबसे अधिक लॉफ्टर क्लब बेंगलुरू में हैं। फिर दिल्ली व पुणे का नंबर आता है। आपने देखा ही होगा कि आज समारोह हो या शादी-ब्याह, लोग ऐसे हंसते हैं, जैसे किसी पर अहसान कर रहे हों या हंसने का उन्हें बाकायदा बिल आता हो। सारा दिन माथे पर शिकन, दिमाग में स्कीमें और आगे निकलने की होड़ से जूझते जब शाम को घर लौटते हैं, तब भी बीवी बच्चों संग समय बिताना तो एक तरफ, उन्हें कह देते हैं, आज बहुत थक गया हूं, मैं परेशान हूं, मुझे अकेला छोड़ दो। वो यह भूल जाते हैं कि बड़ी से बड़ी थकान व परेशानी परिवार के साथ हंस खेलकर पलों में छू मंतर हो जाती है। कहते हैं कि दु:ख बांटने से घटता है व हंसी बांटने से दोगुनी होती है। हम किससे डरते हैं कि सब कुछ होते हुए भी खुश नहीं होते? वो कौन-सा किला या रियासत जीतना चाहते हैं जो हमें खुश होने का लाइसैंस दे जाएगी। डॉक्टरों के अनुसार हंसी विभिन्न रोगों की अचूक औषधि है। यह एक ऐसी दवा है जिसका हमारे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हंसने से मनुष्य का इम्यूनिटी सिस्टम सक्रिय होता है। इससे प्राकृतिक किलर सेल्स में बढ़ौतरी होती है, जो वायरसजनित रोगों एवं ट्यूमर्स सेल को खत्म करती है। हंसी हृदय का सर्वोत्तम व्यायाम है जिससे टी सेल की संख्या में बढ़ौतरी होती है। हंसने से एंटीबाडी इम्यूनोग्लोब्यूलिन ए की मात्रा बढ़ती है जो श्वसन नली में होने वाले इंफेक्शन से बचाव करती है। हंसने से तनाव को जन्म देने वाले हार्मोंस का स्तर घटता है। पाचन तंत्र सही रखने, वजन घटाने एवं चर्बी कम करने में हंसी अहम भूमिका निभाती है। जोर से हंसने से हमारे शरीर में एक तरंग-सी दौड़ जाती है जिसमें एंडरोफिन हार्मोन भी होता है जो प्राकृतिक रूप से हमारे शरीर का दर्द निवारक है, यह शरीर में स्फूर्ति बढ़ाने एवं स्वस्थ बनाए रखने में अहम् भूमिका निभाता है। हंसी से मस्तिष्क के दाएं और बाएं दोनों भागों की सक्रियता बढ़ती है, जिससे स्मरण शक्ति तेज शार्प होती है। हंसना एक ऐसी ही संजीवनी बूटी है, जो मनुष्य की मनोस्थिति बदलकर उसे खुश रहते हुए जीने का अंदाज सिखाती है। जानवर हंस नहीं सकते, लेकिन इंसान दिल खोलकर हंस सकता है, यह ईश्वर की मनुष्य को दी गई सबसे बड़ी नियामत है। हंसना महज मनोरंजन नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी यह स्वस्थ रहने की एक ‘थैरेपी’ है। यही वजह है कि अब हंसी के इन ठहाकों को भी योग का एक हिस्सा मान लिया गया है। आज पार्कों में सुबह-शाम लोगों को हंसना सिखाया जाता है, जिसे ‘लाफ्टर थैरेपी’ कहते हैं। आपको सुनकर अजीब नहीं लगता कि वो कला जिससे शृंगार कर भगवान ने हमें धरती पर भेजा है, हम उसी को सीख रहे हैं। आज डिप्रैशन, सिरदर्द, हार्ट अटैक या ब्लड प्रैशर के मरीज दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इसका सिर्फ एक ही कारण है वो है अंधी दौड़ जिसमें हमने अपने आपको बेमतलब फंसाया हुआ है। अगर लड़ना है तो अपनी बुराईयों से लड़ो न कि अपने ही लोगों से। किसी से जीतना है तो अपने मन को जीतो, किसी को मारना है तो अपने अंदर के लालच को मारो। स्कून पाना है तो अपनों संग खुलकर जियो। अपनी ज़िंदगी के हर दिन को हंसी के खूबसूरत सतरंगी रंगों में रंगो फिर देखो आपके सारे बोझ, चिंताएं व तनाव पलों में गायब हो जाएंगे व ज़िंदगी मुकाबले की बजाए जीने लायक बन जाएगी।