डिजिटल तकनीक से ही रुक सकता है पेपर लीक का खेल
भारत में हर कुछ महीनों में किसी न किसी भर्ती परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षा के पेपर लीक होने की खबर सामने आ जाती है। कभी शिक्षक भर्ती परीक्षा, कभी पुलिस भर्ती, कभी मैडीकल या इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा तथा कभी सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं। लाखों युवाओं की मेहनत कुछ लोगों के भ्रष्ट नेटवर्क और कमजोर परीक्षा व्यवस्था की वजह से बर्बाद हो जाती है। पेपर लीक अब केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई है बल्कि यह देश की प्रतिभा, युवाओं के भविष्य और व्यवस्था पर जनता के विश्वास के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। वर्षों तक मेहनत करने वाले छात्र जब परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र बाज़ार में बिकते हुए देखते हैं, तब उनके मन में व्यवस्था के प्रति निराशा और आक्रोश पैदा होना स्वाभाविक है।
सरकारें हर बार सख्त कानून बनाने, गिरफ्तारियां करने और जांच एजेंसियों को सक्रिय करने की बात करती हैं, लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। इसका कारण यह है कि समस्या केवल अपराधियों की नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की संरचना में मौजूद कमजोरियों की है। जब तक परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से आधुनिक और सुरक्षित नहीं बनाया जाएगा, तब तक केवल कार्रवाई से समाधान संभव नहीं है। वर्तमान परीक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी लंबी और बहु-स्तरीय प्रक्रिया है। प्रश्न-पत्र तैयार होने से लेकर उसके अंतिम रूप देने, प्रिंटिंग, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और अंतत: परीक्षा केन्द्र तक पहुंचाने तक अनेक चरण होते हैं। इन सभी चरणों के बीच लंबा समय अंतराल भी रहता है और कई लोग इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी एक स्तर पर ‘फाइनल प्रश्नपत्र’ पहले से तय हो जाता है। इसके बाद वही प्रश्नपत्र अलग-अलग हाथों और एजेंसियों से गुजरता हुआ परीक्षा केन्द्र तक पहुंचता है। यही वह सबसे बड़ा जोखिम है जहां पेपर लीक होने की संभावना पैदा होती है। यदि किसी परीक्षा का प्रश्न-पत्र परीक्षा से कई दिन पहले ही प्रिंटिंग प्रेस, वितरण एजेंसी, गोदाम, ट्रांसपोर्ट चैन या प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध हो, तो उसे पूरी तरह सुरक्षित रखना बेहद कठिन हो जाता है। आज तकनीक और डिजिटल संचार के दौर में एक फोटो, एक स्कैन कॉपी या एक मोबाइल कैमरा कुछ ही सेकंड में पूरे देश में प्रश्न-पत्र फैला सकता है।
यही कारण है कि अब पारंपरिक परीक्षा मॉडल को बदलने का समय आ चुका है। जिस प्रकार बैंकिंग, रेलवे, टैक्सेशन और सरकारी सेवाएं डिजिटल हो चुकी हैं, उसी प्रकार परीक्षा प्रणाली को भी एआई और डिजिटल तकनीक आधारित बनाना होगा। पेपर लीक रोकने का सबसे प्रभावी तरीका यह है कि ‘फाइनल प्रश्नपत्र’ पहले से अस्तित्व में ही न हो। यदि अंतिम प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही कंप्यूटर द्वारा तैयार और जारी किया जाए तो लीक होने की संभावना लगभग समाप्त की जा सकती है। इसके लिए सबसे पहले राज्यों को परीक्षा जोन में विभाजित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को पांच अलग-अलग परीक्षा जोन में बांटा जा सकता है। इससे हर क्षेत्र में अलग प्रश्नपत्र भेजने की व्यवस्था बनाई जा सकती है। इसके बाद अलग-अलग विशेषज्ञ पैनल से कई प्रश्नपत्र तैयार कराए जाएं। मान लीजिए दस विशेषज्ञ समूह दस अलग-अलग प्रश्न बैंक तैयार करें। इसके बाद एआई और कम्प्यूटर आधारित सॉफ्टवेयर इन सभी प्रश्नों को विषय, कठिनाई स्तर और सिलेबस कवरेज के आधार पर रैंडम तरीके से पुन: संयोजित करे।
इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि किसी भी व्यक्ति चाहे वह विशेषज्ञ हो, अधिकारी हो या तकनीकी टीम को यह पता नहीं होगा कि अंतिम प्रश्नपत्र कौन सा बनेगा। फिर परीक्षा शुरू होने से लगभग 20 से 30 मिनट पहले एआई सिस्टम स्वत: अलग-अलग जोन के लिए रैंडम तरीके से प्रश्नपत्र चुने और सीधे संबंधित परीक्षा केंद्रों को एन्क्रिप्टेड डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से भेज दे।
हर परीक्षा केन्द्र पर सुरक्षित हाई-स्पीड प्रिंटर और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम लगाए जा सकते हैं। प्रश्नपत्र वहीं स्थानीय स्तर पर तुरंत प्रिंट हो और सीधे छात्रों में बांट दिया जाए। इससे प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट, गोदाम और वितरण जैसी लंबी भौतिक प्रक्रिया लगभग समाप्त हो जाएगी। यदि और अधिक सुरक्षा चाहिए तो परीक्षा कक्ष के पास ही कंट्रोल प्रिंटिंग यूनिट बनाई जा सकती है, जहां अंतिम मिनटों में प्रश्नपत्र प्रिंट होकर तुरंत सीलबंद तरीके से कक्ष में पहुंच जाए। यह मॉडल केवल सुरक्षित ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी अधिक प्रभावी हो सकता है। वर्तमान व्यवस्था में बड़े पैमाने पर प्रिंटिंग, पैकेजिंग, सुरक्षा, परिवहन और भंडारण पर भारी खर्च होता है। डिजिटल और ऑन-साइट प्रिंटिंग मॉडल इन खर्चों को काफी कम कर सकता है।
एआई आधारित रैंडमाइजेशन का एक और बड़ा लाभ यह होगा कि संगठित पेपर माफिया का नेटवर्क कमजोर पड़ जाएगा। आज कई बार पूरे राज्य में एक ही प्रश्नपत्र होता है, इसलिए यदि एक कॉपी लीक हो जाए तो पूरी परीक्षा प्रभावित हो जाती है। लेकिन यदि अलग-अलग जोन में अलग प्रश्नपत्र हों, तो बड़े स्तर पर पेपर लीक का कोई अर्थ ही नहीं बचेगा।
पेपर लीक केवल प्रश्नपत्र चोरी नहीं है, यह मेहनती छात्रों के सपनों की चोरी है। यह देश की प्रतिभा के साथ अन्याय है। यदि वास्तव में इस समस्या को समाप्त करना है, तो अब समय आ गया है कि भारत अपनी परीक्षा प्रणाली को डिजिटल इंडिया और एआई के नए युग के अनुरूप पुनर्गठित करे। तकनीक ही आज समस्या भी है और समाधान भी। यदि पेपर माफिया डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकते हैंए तो सरकार और व्यवस्था उससे कहीं अधिक आधुनिक तकनीक का उपयोग करके इस चुनौती को समाप्त कर सकती है। एआई और डिजिटल तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आने वाले समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।
(अदिति फीचर्स)



