जीरा सीमित दायरे में बना रहेगा


नई दिल्ली, 5 जून (एजैंसी) : ब्याह-शादियों का सीजन होने तथा कीमत उम्मीद से नीची होने के कारण किसानों की बिकवाली सीमित होने से ऊंझा में जीरे की आवक तुलनात्मक रूप से नीची बनी हुई है। आगामी दिनों में जीरे की थोक कीमत सीमित दायरे में ही घूमती रहने का अनुमान है। ब्याह-शादियों का सीजन होने और कीमत उम्मीद से नीची होने के कारण पिछले कुछ समय से घरेलू बाजारों में जीरे की सीमित आवक हो रही है। बीते कुछ दिनों से ऊंझा मंडी में जीरे की आवक घटकर करीब 10-12 हजार बोरियों की होने की जानकारी मिल रही है। सीमित आवक तथा लिवाली का समर्थन भी कमजोर पड़ने से ऊंझा में ‘जीएल गुलाब’ जीरा हाल ही में मंदा होकर फिलहाल 3240/3260 रुपए तथा ‘गणेश’ जीरा 3190/3210 रुपए प्रति 20 किलोग्राम के स्तर पर बना हआ है। इस मंदी का एक प्रमुख कारण यह भी है कि तात्कालिक मांग पूरी होने के कारण दिसावरों की लिवाली सामान्य से कमजोर बनी हुई है। भारत के अलावा विश्व में तुर्की और सीरिया में भी जीरे का उत्पादन होता है। इन दोनों देशों में हाल ही में जीरे की नई फसल बाजारों में आनी शुरू हो चुकी है। आमतौर पर इन दोनों देशों में संयुक्त रूप से करीब 35 हजार टन जीरे का उत्पादन होता है और इनकी क्वालिटी भारतीय जीरे की तुलना में हल्की होती है। इसके बाद भी बंगलादेश, श्रीलंका आदि जैसे पड़ौसी देशों के अलावा अन्य आयातक देशों की लिवाली का रुख भारत की ओर ही बना होने से यह संकेत मिलता है कि तुर्की, सीरिया में नई फसल कमजोर आ रही है।